बंडा में कृषि विभाग की सख्ती: निजी उर्वरक विक्रेताओं का निरीक्षण, खाद के नमूने लिए !

Spread the love

खरीफ सीजन की तैयारियों के बीच किसानों को गुणवत्तापूर्ण उर्वरक उपलब्ध कराने और खाद की कालाबाजारी पर रोक लगाने के उद्देश्य से कृषि विभाग ने बंडा क्षेत्र में निजी उर्वरक विक्रेताओं के यहां सघन निरीक्षण अभियान चलाया। बुधवार को कृषि विभाग की टीम ने बंडा स्थित दो प्रमुख उर्वरक विक्रेता प्रतिष्ठानों का निरीक्षण कर अभिलेखों की जांच की तथा उर्वरकों के नमूने लेकर गुणवत्ता परीक्षण की प्रक्रिया शुरू की।

कृषि विभाग के अधिकारियों ने सिंघई कृषि सेवा केंद्र, बंडा तथा बड़े बाबा कृषि सेवा केंद्र, बंडा का निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान दुकानों में संधारित स्टॉक रजिस्टर, विक्रय पंजी, खरीद संबंधी अभिलेखों और अन्य आवश्यक दस्तावेजों का परीक्षण किया गया। अधिकारियों ने यह सुनिश्चित करने का प्रयास किया कि उर्वरक विक्रय से संबंधित सभी रिकॉर्ड नियमानुसार संधारित किए जा रहे हैं या नहीं।

निरीक्षण के दौरान विभागीय अधिकारियों ने विभिन्न प्रकार के उर्वरकों के नमूने भी एकत्रित किए। इन नमूनों को निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार परीक्षण के लिए भेजा जाएगा, जिससे यह सुनिश्चित किया जा सके कि किसानों को उपलब्ध कराया जा रहा उर्वरक निर्धारित गुणवत्ता मानकों के अनुरूप है। कृषि विभाग का मानना है कि गुणवत्ताहीन या नकली उर्वरकों की बिक्री किसानों की फसलों को नुकसान पहुंचा सकती है, इसलिए समय-समय पर नमूना जांच की कार्रवाई आवश्यक है।

जांच के दौरान कुछ अभिलेखीय एवं प्रक्रियागत कमियां भी सामने आईं, जिनकी पूर्ति के लिए संबंधित विक्रेताओं को निर्देश दिए गए। अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि सभी उर्वरक विक्रेताओं को शासन द्वारा निर्धारित नियमों और दिशा-निर्देशों का पूर्ण पालन करना होगा। किसी भी प्रकार की लापरवाही या नियमों के उल्लंघन की स्थिति में नियमानुसार कार्रवाई की जा सकती है।

निरीक्षण के दौरान कृषि विभाग ने उर्वरक विक्रेताओं को विशेष रूप से ई-टोकन प्रणाली के माध्यम से ही उर्वरक विक्रय करने के निर्देश दिए। अधिकारियों ने कहा कि ई-टोकन व्यवस्था लागू होने से खाद वितरण प्रक्रिया अधिक पारदर्शी बनेगी और वास्तविक किसानों तक उर्वरक पहुंचाने में सहायता मिलेगी। इसके साथ ही उर्वरक की अनावश्यक जमाखोरी और कालाबाजारी जैसी गतिविधियों पर भी प्रभावी नियंत्रण रखा जा सकेगा।

विक्रेताओं को यह भी निर्देशित किया गया कि किसानों को उर्वरक केवल शासन द्वारा निर्धारित अधिकृत दरों पर ही उपलब्ध कराया जाए। कृषि विभाग ने स्पष्ट किया कि निर्धारित मूल्य से अधिक दर पर उर्वरक विक्रय करना नियमों का उल्लंघन माना जाएगा और ऐसी शिकायत मिलने पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी। विभाग का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि किसानों को समय पर और उचित मूल्य पर खाद उपलब्ध हो सके।

अधिकारियों ने बताया कि खरीफ सीजन के दौरान उर्वरकों की मांग बढ़ जाती है। ऐसे समय में खाद की उपलब्धता, गुणवत्ता और मूल्य नियंत्रण बनाए रखना कृषि विभाग की प्राथमिक जिम्मेदारी है। इसी कारण जिले भर में उर्वरक विक्रेताओं के यहां नियमित निरीक्षण और निगरानी की जा रही है। विभागीय टीम लगातार बाजार की स्थिति पर नजर बनाए हुए है ताकि किसानों को किसी प्रकार की परेशानी का सामना न करना पड़े।

कृषि विशेषज्ञों के अनुसार खरीफ फसलों की बुवाई के लिए यूरिया, डीएपी और अन्य उर्वरकों की पर्याप्त उपलब्धता अत्यंत महत्वपूर्ण होती है। यदि वितरण व्यवस्था पारदर्शी और व्यवस्थित रहे तो किसानों को समय पर खाद मिलती है और कृषि उत्पादन पर सकारात्मक प्रभाव पड़ता है। इसी दृष्टि से ई-टोकन प्रणाली को प्रभावी बनाने पर जोर दिया जा रहा है।

निरीक्षण के दौरान अनुविभागीय कृषि अधिकारी बंडा श्रीमती कुमुद बुनकर, सहायक संचालक कृषि श्री अनिल राय, वरिष्ठ कृषि विस्तार अधिकारी बंडा श्री यू.एस. अहिरवार, कृषि विस्तार अधिकारी मोहिता बड़ोनिया, भरत वंशवर्ती तथा रीतेश रोहितास उपस्थित रहे। अधिकारियों ने निरीक्षण के बाद विक्रेताओं को आवश्यक दिशा-निर्देश प्रदान किए तथा भविष्य में भी नियमों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करने को कहा।

कृषि विभाग ने संकेत दिए हैं कि आगामी दिनों में भी जिले के विभिन्न क्षेत्रों में उर्वरक विक्रेताओं के प्रतिष्ठानों का औचक निरीक्षण जारी रहेगा। विभाग का उद्देश्य किसानों के हितों की रक्षा करना, गुणवत्तापूर्ण उर्वरक उपलब्ध कराना तथा खाद वितरण व्यवस्था को पारदर्शी और जवाबदेह बनाना है। किसानों से भी अपील की गई है कि वे उर्वरक खरीदते समय रसीद अवश्य लें और किसी भी प्रकार की अनियमितता की जानकारी कृषि विभाग को दें, ताकि समय रहते उचित कार्रवाई की जा सके।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *