जबलपुर जिले में बरगी डैम की दाईं तट नहर के क्षतिग्रस्त होने से किसानों की परेशानी बढ़ गई है। 1 फरवरी को ग्राम सगड़ा-झपनी क्षेत्र में नहर का करीब 27 मीटर हिस्सा कट जाने से नहर का पानी पास से बह रहे नर्रई नाले में चला गया और आसपास के खेतों में भर गया। इससे कुछ इलाकों में बाढ़ जैसे हालात बन गए और खड़ी फसलें जलमग्न होकर नुकसान का शिकार हो गईं।
घटना की जानकारी मिलते ही जिला प्रशासन और नर्मदा घाटी विकास प्राधिकरण (एनवीडीए) के अधिकारी मौके पर पहुंचे। तत्काल बरगी डैम से नहर में आने वाला पानी बंद कराया गया और क्षति का आकलन शुरू किया गया। प्रारंभिक जांच में सामने आया कि नहर का यह हिस्सा पिछले कई महीनों से कमजोर था और यहां से लगातार पानी का रिसाव हो रहा था, जिसकी समय रहते मरम्मत नहीं की गई।

रबी सीजन के बीच नहर टूटने से किसानों की चिंता और बढ़ गई, क्योंकि इस समय खेतों में गेहूं और अरहर जैसी फसलें तैयार अवस्था में हैं। किसानों को आशंका थी कि यदि सिंचाई के लिए पानी समय पर नहीं मिला तो सैकड़ों एकड़ में फसल सूख सकती है। हालांकि एनवीडीए ने राहत की बात कहते हुए वैकल्पिक व्यवस्था के तहत माइनर नहरों और पाइपलाइन के माध्यम से पानी की आपूर्ति शुरू कर दी है।

मरम्मत कार्य में तेजी लाने के लिए मौके पर 100 से अधिक मजदूर, जेसीबी और एक्सकेवेटर मशीनें लगाई गई हैं। एनवीडीए का दावा है कि हर हाल में 15 से 20 फरवरी तक दाईं तट नहर को फिर से चालू कर दिया जाएगा। भोपाल से आई तकनीकी टीम ने भी मौके का निरीक्षण किया है। एनवीडीए की कार्यपालन यंत्री श्रद्धा बनसोडकर ने बताया कि मरम्मत कार्य युद्ध स्तर पर चल रहा है और 24 घंटे काम करने के निर्देश दिए गए हैं। फिलहाल बोरियों में मिट्टी भरकर पानी को डायवर्ट किया जा रहा है और तिरछी दीवार बनाकर क्षतिग्रस्त हिस्से को सुरक्षित किया जा रहा है।

इस घटना ने नहरों के रखरखाव और मेंटेनेंस पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। वर्ष 2002 में करोड़ों रुपये की लागत से बनी बरगी नहर का उद्देश्य जबलपुर सहित कटनी, सतना और रीवा जिलों तक सिंचाई का पानी पहुंचाना था। समय पर मरम्मत नहीं होने के कारण अब यह स्थिति बनी। एनवीडीए ने बताया कि भविष्य में ऐसी घटनाओं से बचने के लिए दाईं और बाईं तट नहर के सिस्टम करेक्शन हेतु करीब 500 करोड़ रुपये की लागत से सुधार कार्य किए जाएंगे, जिसके लिए डीपीआर तैयार कर भोपाल भेजी जा चुकी है।
वहीं किसानों का कहना है कि फिलहाल उन्हें वैकल्पिक व्यवस्था से पानी मिल रहा है। ग्राम पिपरिया निवासी शत्रुघन पटेल ने बताया कि नहर टूटने से पहले खेतों में पानी मिल चुका था, जिससे कुछ दिनों तक फसल सुरक्षित रहेगी। किसानों को उम्मीद है कि नहर की मरम्मत समय पर पूरी होगी और फसलों को बड़ा नुकसान नहीं होगा।