मंदिर के सामने शराब दुकान पर मानव अधिकार आयोग सख्त !

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भोपाल की अरेरा कॉलोनी में आर्य समाज मंदिर के सामने संचालित शराब दुकान को लेकर पिछले एक साल से चल रहा विरोध अब मानव अधिकार आयोग तक पहुंच गया है। रविवार को मानव अधिकार आयोग के सदस्य प्रियंक कानूनगो मौके पर पहुंचे और जिला प्रशासन द्वारा आयोग को दिए गए जवाब की जमीनी हकीकत की पड़ताल की। मंदिर के ठीक सामने शराब दुकान देखकर कानूनगो भी हैरान रह गए और प्रशासनिक जवाब को “हास्यास्पद” करार दिया।

10 नंबर मार्केट के पास स्थित आर्य समाज मंदिर के सामने पहुंचकर आयोग सदस्य ने रहवासियों से चर्चा की। उन्होंने बताया कि जिला प्रशासन ने अपने जवाब में कहा है कि शराब दुकान के 100 मीटर के दायरे में कोई “गजट नोटिफाइड” धार्मिक स्थल नहीं है। इस पर कानूनगो ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि अधिकारी भगवान के अस्तित्व का प्रमाण मांग रहे हैं, जो बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। सरकार की मंशा और नियम स्पष्ट हैं कि किसी भी धार्मिक स्थल के 100 मीटर के भीतर शराब दुकान नहीं होनी चाहिए।

निरीक्षण के दौरान कानूनगो ने जिला आबकारी अधिकारी की अनुपस्थिति पर भी नाराजगी जताई। उन्होंने बताया कि अधिकारी को पहले ही सूचना दी गई थी, इसके बावजूद उनका मौके पर न आना गंभीर लापरवाही है, जिसे बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

कानूनगो के पहुंचने की सूचना मिलते ही बड़ी संख्या में रहवासी मंदिर के सामने एकत्रित हो गए। लोगों ने हाथों में तख्तियां लेकर शराब दुकान हटाने की मांग की और शांतिपूर्ण विरोध दर्ज कराया। निरीक्षण के बाद आयोग सदस्य ने आबकारी विभाग के अधिकारियों से चर्चा की, जहां विभाग की ओर से बताया गया कि ठेकेदार को नोटिस जारी कर दुकान कुछ दिनों में हटाई जाएगी।

अरेरा कॉलोनी निवासी विवेक त्रिपाठी ने बताया कि जिस भूखंड पर शराब दुकान संचालित हो रही है, वह पूरी तरह आवासीय उपयोग के लिए निर्धारित है। इसके बावजूद वहां व्यावसायिक गतिविधि चलाई जा रही है, जो मध्यप्रदेश भूमि विकास नियम 2012 और नगर निगम अधिनियम 1956 का खुला उल्लंघन है। उन्होंने बताया कि नगर निगम भोपाल ने 19 नवंबर 2025 को नोटिस जारी कर 10 दिन में दुकान बंद करने के निर्देश दिए थे, लेकिन इसके बाद भी दुकान बेखौफ चलती रही। इतना ही नहीं, तिरपाल डालकर अवैध अहाता भी संचालित किया जा रहा है।

रहवासियों का कहना है कि शराब दुकान मंदिर से महज 40 मीटर की दूरी पर है, इसके बावजूद प्रशासन ने जांच रिपोर्ट में आर्य समाज मंदिर को मंदिर मानने से ही इनकार कर दिया। इस दुकान के कारण क्षेत्र की शांति भंग हो रही है, असामाजिक तत्वों का जमावड़ा लगा रहता है और महिलाओं व बच्चों का निकलना तक मुश्किल हो गया है।

स्थानीय लोगों ने मांग की है कि भूखंड E-4/21 पर संचालित शराब दुकान को तत्काल बंद किया जाए, जिम्मेदार अधिकारियों और दुकान संचालक पर कार्रवाई हो तथा आवासीय क्षेत्रों में इस तरह की अवैध व्यावसायिक गतिविधियों पर रोक के लिए स्थायी नीति बनाई जाए।

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