बीना और खुरई में सिंधी समाज द्वारा चेटीचंड के अवसर पर भगवान झूलेलाल जयंती बड़े उत्साह और श्रद्धा के साथ मनाई गई। इस दौरान धार्मिक अनुष्ठान, भजन-कीर्तन, शोभायात्राएं और सामूहिक कार्यक्रमों का आयोजन किया गया, जिसमें समाज के सभी वर्गों ने बढ़-चढ़कर भाग लिया।

बीना में यह आयोजन विशेष रूप से भव्य रहा। यहां गुरुनानक सिंधी धर्मशाला में तीन दिवसीय सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए गए, जिनमें झूलेलाल सांई का अभिषेक, भोग साहिब और शब्द कीर्तन प्रमुख आकर्षण रहे। बड़ी संख्या में श्रद्धालु इन कार्यक्रमों में शामिल हुए और भक्ति में लीन नजर आए। धर्मशाला परिसर में लंगर का आयोजन भी किया गया, जिसमें लोगों ने प्रसाद ग्रहण किया।
इसके बाद सिंधी धर्मशाला से एक विशाल शोभायात्रा निकाली गई। यह शोभायात्रा शहर के प्रमुख मार्गों—सिंधी कॉलोनी, सागर गेट, गांधी तिराहा, लल्लू सिंह चौराहा और जागेश्वरी मंदिर से होते हुए पाठक वार्ड स्थित झूलेलाल मंदिर पहुंची। शोभायात्रा के दौरान श्रद्धालु भजन-कीर्तन करते हुए और भगवान के जयकारे लगाते हुए चल रहे थे। खास बात यह रही कि संगीत की धुन पर महिला मंडल, नवयुवक मंडल और अन्य समाजजन नृत्य करते हुए उत्सव को और भी जीवंत बना रहे थे।

पाठक वार्ड स्थित मंदिर में भगवान झूलेलाल की आरती और अरदास पल्लव संपन्न हुए। इसके बाद देर रात अखंड ज्योति का विसर्जन बेतवा नदी के कुरवाई घाट पर किया गया। कार्यक्रम के अंत में भंडारा प्रसाद वितरित किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में लोगों ने भाग लिया।
इस अवसर पर सिंधी समाज के व्यापारियों ने अपने प्रतिष्ठान बंद रखकर त्योहार के प्रति अपनी आस्था और एकजुटता का परिचय दिया। पूरे शहर में धार्मिक और उत्सव का माहौल देखने को मिला।
इसी तरह खुरई में भी झूलेलाल जयंती हर्षोल्लास के साथ मनाई गई। यहां सिंधी कॉलोनी में भगवान की पालकी यात्रा निकाली गई, जिसके बाद संत कबरदास वार्ड स्थित सिंधी धर्मशाला से एक भव्य शोभायात्रा प्रारंभ हुई। यह शोभायात्रा शहर के विभिन्न मार्गों—भूसा मंडी रोड, परसा चौराहा, झंडा चौक, पठार, शिवाजी चौराहा और किला गेट से होती हुई मंदिर घाट पहुंची।

खुरई में भी श्रद्धालु भगवान झूलेलाल के भजनों पर झूमते नजर आए और पूरे मार्ग में शोभायात्रा का जगह-जगह स्वागत किया गया। देर रात मंदिर घाट पर ज्योत का विसर्जन किया गया, जो इस आयोजन का प्रमुख धार्मिक हिस्सा रहा।
दोनों शहरों में इस आयोजन ने न केवल धार्मिक आस्था को मजबूत किया, बल्कि समाज की एकता, संस्कृति और परंपराओं को भी जीवंत रूप में प्रस्तुत किया। झूलेलाल जयंती के अवसर पर निकाली गई शोभायात्राएं और आयोजित कार्यक्रम क्षेत्र में सामुदायिक सौहार्द और उल्लास का प्रतीक बनकर उभरे।