बीना स्थित एसडीएम कार्यालय में सोमवार को ‘कृषक कल्याण वर्ष 2026’ के अंतर्गत खंड स्तरीय बैठक आयोजित की गई। बैठक का उद्देश्य किसानों को आधुनिक और टिकाऊ खेती के प्रति जागरूक करना तथा मिट्टी की सेहत सुधारने के उपाय बताना था।
कार्यक्रम में कृषि विभाग के अधिकारियों, जनप्रतिनिधियों और बड़ी संख्या में किसानों ने भाग लिया। मुख्य रूप से जैविक खेती, प्राकृतिक कृषि पद्धतियों और पराली (फसल अवशेष) प्रबंधन जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तार से चर्चा की गई।
मिट्टी की सेहत और आर्थिक लाभ पर जोर

वरिष्ठ कृषि विकास अधिकारी अवधेश राय ने किसानों को संबोधित करते हुए कहा कि वर्तमान समय में रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों का अत्यधिक उपयोग मिट्टी की उर्वरता को प्रभावित कर रहा है। उन्होंने किसानों से अपील की कि वे धीरे-धीरे जैविक और प्राकृतिक खेती की ओर कदम बढ़ाएं।
उन्होंने बताया कि जैविक खेती से:
- मिट्टी की संरचना और जैविक तत्वों में सुधार होता है
- उत्पादन लागत कम होती है
- फसलों की गुणवत्ता बेहतर होती है
- बाजार में बेहतर मूल्य मिलने की संभावना बढ़ती है
साथ ही यह पद्धति पर्यावरण संरक्षण और जैव विविधता के लिए भी लाभकारी है।
पराली जलाने के बजाय खाद बनाने की सलाह
बैठक में पराली प्रबंधन पर विशेष सत्र आयोजित किया गया। कृषि विशेषज्ञों ने किसानों को समझाया कि पराली जलाने से मिट्टी की ऊपरी परत के सूक्ष्म जीव नष्ट हो जाते हैं और वायु प्रदूषण बढ़ता है।
इसके बजाय पराली को खेत में ही सड़ाकर या जैविक खाद में बदलकर उपयोग करने की सलाह दी गई। इससे:
- मिट्टी में कार्बनिक पदार्थ की मात्रा बढ़ती है
- नाइट्रोजन और अन्य पोषक तत्वों की पूर्ति होती है
- रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता कम होती है

योजनाओं की दी गई जानकारी
बैठक में ‘प्रति बूंद अधिक फसल’ योजना के बारे में भी विस्तार से जानकारी दी गई, जिसके तहत सूक्ष्म सिंचाई पद्धतियों को अपनाकर पानी की बचत और उत्पादन बढ़ाने पर जोर दिया जाता है।
साथ ही उर्वरकों की उपलब्धता को पारदर्शी बनाने के लिए लागू ‘ई-टोकन’ प्रणाली की जानकारी साझा की गई। अधिकारियों ने बताया कि इस व्यवस्था से किसानों को समय पर उर्वरक प्राप्त होंगे और कालाबाजारी पर रोक लगेगी।

बड़ी संख्या में किसान रहे मौजूद
कार्यक्रम में तहसीलदार अंबर पंथी, जनपद अध्यक्ष उषा राय, उपसंचालक कृषि राजेश त्रिपाठी सहित कई जनप्रतिनिधि और कृषि विभाग के अधिकारी उपस्थित रहे। किसान संघ के पदाधिकारी और उर्वरक विक्रेता भी बैठक में शामिल हुए।
अधिकारियों ने किसानों की समस्याएं सुनीं और उन्हें शासन की विभिन्न योजनाओं का लाभ उठाने के लिए प्रेरित किया। साथ ही आश्वासन दिया कि कृषि विभाग किसानों को तकनीकी मार्गदर्शन और आवश्यक सहायता प्रदान करता रहेगा।
टिकाऊ खेती की ओर कदम
बैठक के अंत में अधिकारियों ने कहा कि ‘कृषक कल्याण वर्ष 2026’ का उद्देश्य किसानों की आय बढ़ाने के साथ-साथ खेती को टिकाऊ और पर्यावरण अनुकूल बनाना है।
किसानों ने भी जैविक खेती और आधुनिक तकनीकों को अपनाने में रुचि दिखाई। उम्मीद जताई जा रही है कि इस तरह की बैठकों से क्षेत्र में जागरूकता बढ़ेगी और कृषि क्षेत्र में सकारात्मक बदलाव देखने को मिलेगा।