सागर स्थित वीरांगना रानी दुर्गावती टाइगर रिजर्व में 15 फरवरी को एक युवा बाघ मृत अवस्था में मिला। प्राथमिक पोस्टमार्टम रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि उसकी मौत किसी अन्य बाघ के साथ टेरिटरी (क्षेत्राधिकार) को लेकर हुई भीषण लड़ाई में हुई। वन विभाग ने मामले की विस्तृत जांच शुरू कर दी है।
रेडियो कॉलर से मिला सुराग, 15 फरवरी को मिला शव
टाइगर रिजर्व की निगरानी टीम को बाघ की लोकेशन रेडियो कॉलर के जरिए लगातार एक ही स्थान पर मिल रही थी। 15 फरवरी को टीम लोकेशन के आधार पर मानेगांव बीट के कक्ष क्रमांक 159 में पहुंची, जहां बाघ मृत अवस्था में पाया गया।
अधिकारियों के अनुसार, बाघ को 18-19 जनवरी की रात खुले जंगल में छोड़ा गया था। शुरुआत से ही उसका मूवमेंट अपेक्षाकृत कम था। पहले दिन लोकेशन न बदलने पर ज्यादा संदेह नहीं हुआ, लेकिन दूसरे दिन भी गतिविधि नहीं दिखी तो टीम सतर्क हुई। तीसरे दिन मौके पर पहुंचकर जांच की गई, जहां उसकी मौत की पुष्टि हुई।
तीन डॉक्टरों की पैनल ने किया पोस्टमार्टम

राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (NTCA) के प्रोटोकॉल के तहत तीन डॉक्टरों की पैनल ने पोस्टमार्टम किया। इसमें पन्ना टाइगर रिजर्व के वरिष्ठ वन्य प्राणी चिकित्सक डॉ. संजीव गुप्ता, रहली के पशु चिकित्सक नीरज ठाकुर और एनटीसीए प्रतिनिधि डॉ. प्रशांत देशमुख शामिल रहे।
वन संरक्षक सागर रिपुदमन सिंह भदोरिया की मौजूदगी में पूरी प्रक्रिया संपन्न हुई। पोस्टमार्टम के बाद नियमानुसार बाघ का अंतिम संस्कार कर दिया गया।
खोपड़ी की हड्डियां टूटीं, आंख के पास दांत का निशान
प्राथमिक पीएम रिपोर्ट में सामने आया कि बाघ की खोपड़ी की हड्डियां टूटी हुई थीं। आंख के पास गहरे दांत के निशान पाए गए और एक पैर का नाखून टूटा हुआ मिला। इन साक्ष्यों से स्पष्ट संकेत मिला कि उसकी किसी अन्य बाघ से जबरदस्त भिड़ंत हुई थी।
वन विभाग के अनुसार, यह टेरिटरी को लेकर संघर्ष का मामला प्रतीत होता है, जो जंगलों में अक्सर वयस्क नर बाघों के बीच होता है।
डॉग स्क्वॉड से सर्चिंग, अन्य बाघ के पगमार्क मिले
घटना के बाद वन विभाग ने डॉग स्क्वॉड की मदद से आसपास के क्षेत्र में सघन सर्चिंग कराई। मौके पर दूसरे बाघ के पगमार्क भी मिले।
साथ ही, आसपास के तालाबों के पानी की लिटमस पेपर से जांच की गई, जिसमें पीएच वैल्यू सामान्य पाई गई। करंट लगने या जहर दिए जाने जैसी किसी भी आशंका के संकेत नहीं मिले।
डीएफओ ने दी जानकारी

टाइगर रिजर्व के डीएफओ रजनीश कुमार ने बताया कि प्राथमिक जांच में मौत का कारण टेरिटरी फाइट ही सामने आया है। चोटों की प्रकृति और दूसरे बाघ के पगमार्क इस निष्कर्ष की पुष्टि करते हैं। हालांकि, विस्तृत रिपोर्ट आने के बाद ही अंतिम कारण स्पष्ट रूप से दर्ज किया जाएगा।
कान्हा से लाया गया था युवा बाघ
मृत बाघ को करीब एक माह पहले कान्हा टाइगर रिजर्व से शिफ्ट किया गया था। उसे मुहली रेंज के कोर एरिया में रेडियो कॉलर के साथ छोड़ा गया था, ताकि उसकी गतिविधियों की निगरानी की जा सके।
प्रबंधन के अनुसार, अप्रैल 2023 में सिवनी जिले के पेंच टाइगर रिजर्व के रूखड़ परिक्षेत्र से यह शावक के रूप में रेस्क्यू किया गया था। उस समय उसकी उम्र करीब 4-5 माह थी और वह अपनी मां से बिछड़ गया था।

35 माह की रिवाइल्डिंग ट्रेनिंग
मां का पता नहीं चलने पर शावक को कान्हा के घोरेला रिवाइल्डिंग बाड़े में रखा गया। करीब 35 माह की ट्रेनिंग के बाद वह खुद शिकार करने में सक्षम हुआ। सफल रिवाइल्डिंग के बाद उसे वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व में स्थानांतरित किया गया था।
वन विभाग के अधिकारियों का कहना है कि जंगल में टेरिटरी को लेकर संघर्ष स्वाभाविक प्रक्रिया है, लेकिन इस घटना से रिजर्व प्रबंधन के सामने नई चुनौतियां खड़ी हो गई हैं। फिलहाल पूरे क्षेत्र में निगरानी बढ़ा दी गई है, ताकि अन्य बाघों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।