इंदौर के भागीरथपुरा क्षेत्र में दूषित पानी पीने से हुई मौतों के बाद नगर निगम में प्रशासनिक बदलाव किया गया है। अब 2014 बैच के आईएएस अधिकारी क्षितिज सिंघल को इंदौर नगर निगम का नया निगमायुक्त नियुक्त किया गया है। उन्होंने शनिवार को ही अपने नए पद का कार्यभार संभाल लिया।
दिलीप कुमार यादव का सबसे छोटा कार्यकाल
निगमायुक्त दिलीप कुमार यादव का कार्यकाल इंदौर नगर निगम के इतिहास में सबसे छोटा रहा। उनकी नियुक्ति 9 सितंबर को हुई थी, लेकिन वे महज चार महीने ही निगमायुक्त के रूप में रह सके। उनकी विदाई के बाद निगम में कामकाज और फाइलों के संचालन पर सवाल उठने लगे थे।

फाइल अटकने पर हुए धरने और प्रदर्शन
नगर निगम सूत्रों के अनुसार पूर्व निगमायुक्त के समय कई बार पार्षद और जनता ने प्रदर्शन किए। आरोप था कि फाइलों पर समय पर साइन नहीं होते और काम अटका रहता था। उज्जैन नगर निगम में भी इसी तरह की शिकायतें सामने आई थीं। प्रशासनिक अधिकारी बताते हैं, “फंड ही नहीं होगा तो काम क्या और कैसे करेंगे?”—यह सवाल निगम के कामकाज में अक्सर सुनाई देता रहा।
क्षितिज सिंघल की प्रशासनिक शैली
नए निगमायुक्त क्षितिज सिंघल को प्रशासनिक हलकों में बेबाक और फैसलों में स्पष्ट अधिकारी के रूप में जाना जाता है। इससे पहले उन्होंने उज्जैन नगर निगम और बिजली कंपनी में सेवाएं दी हैं। उनके रुख को लेकर कहा जाता है कि वे कई बार नेताओं से सीधे टकरा सकते हैं, लेकिन काम में स्पष्टता और पारदर्शिता रखते हैं।
क्षितिज सिंघल की पत्नी शीतला पटले भी आईएएस अधिकारी हैं और वर्तमान में सिवनी की कलेक्टर के रूप में पदस्थ हैं। उल्लेखनीय है कि सिंघल कुछ वर्ष पहले 1 जनवरी को बिना मुहूर्त कोर्ट मैरिज करने के मामले में चर्चा में आए थे।
निगमायुक्त का मुख्य लक्ष्य: दूषित पानी की समस्या का समाधान
विशेषज्ञों का कहना है कि नगर निगम अब फंड और प्रशासनिक सहूलियत के साथ काम करेगा। नई नियुक्ति के बाद निगमायुक्त सिंघल का पहला लक्ष्य भागीरथपुरा में दूषित पानी की समस्या का स्थायी समाधान करना और जलापूर्ति के सिस्टम को पारदर्शी बनाना होगा।
प्रशासनिक हलकों में उम्मीद जताई जा रही है कि सिंघल की बेबाक और स्पष्ट कार्यशैली निगम के अटके कामकाज में तेजी लाएगी और जनता को जल्द राहत मिलेगी।