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आशंका है कि नाली के ऊपर आरसीसी को कवर करने के बहाने लोहा घोटाला किया गया, क्योंकि एक जगह से खुदाई की गई तो लोहा काफी कम मात्रा में मिला।

इस तरह नाली के ऊपर किया गया है आरसीसी।

इस तरह नाली के ऊपर किया गया है आरसीसी।

13 लाख 34 हजार रुपए का काम वार्ड-53 में कृष्णा आर्केड एवं वैष्णव परिसर भेल संगम इलाके में 240 मीटर लंबी नाली को आरसीसी से कवर करने का काम 25 जून-25 को 13 लाख 34 हजार 238 रुपए में मंजूर किया गया था। काम होने के बाद नवंबर में प्रभारी सहायक यंत्री निशांत तिवारी ने मेजरमेंट संबंधित रिकॉर्ड प्रस्तुत किए। जिसमें 240 मीटर लंबी और 3 फीट चौड़ी नाली को आरसीसी से कवर करने की बात बताई गई।

मेजर बुक में इस कार्य के लिए 16 हजार 139 किलो ग्राम लोहे का उपयोग होना बताया गया है। 5 दिसंबर को निगम के कार्यपालन यंत्री बृजेश कौशल ने प्रभारी सहायक यंत्री तिवारी और उप यंत्री रूपांकन वर्मा को लेटर लिखकर जांच किए जाने की बात कही गई थी। ताकि, निगम कमिश्नर जैन से इस स्थल का निरीक्षण करवाया जा सके।

जिम्मेदारों ने निरीक्षण नहीं किया निगम सूत्रों के अनुसार, ईई कौशल या फिर अन्य जिम्मेदारों ने निर्माण के दौरान साइट का दौरा नहीं किया। जब मामला सामने आया तो कौशल ने दोनों इंजीनियरों को लेटर लिखे। 8 दिसंबर को साइट निरीक्षण किया। हालांकि, अब तक निगम कमिश्नर जैन को रिपोर्ट नहीं सौंपी गई। इस संबंध में जब कौशल से बात करना चाही तो उन्होंने कॉल भी रिसीव नहीं किया।

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