भोपाल
राजधानी भोपाल में 31 मई को प्रस्तावित बृहद धर्मसभा को लेकर विवाद अब कानूनी मोड़ ले चुका है। गांधी नगर बस स्टैंड के पास आयोजित होने वाली इस धर्मसभा की प्रशासन द्वारा अनुमति निरस्त किए जाने के बाद आयोजकों ने मध्यप्रदेश हाईकोर्ट में याचिका दायर कर दी है। मामले में आज 29 मई को सुनवाई प्रस्तावित है, जिस पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं।
धर्मसभा में टी राजा सिंह को मुख्य वक्ता के रूप में आमंत्रित किया गया था। इसी वजह से कार्यक्रम को लेकर राजनीतिक और प्रशासनिक स्तर पर चर्चा और विवाद दोनों बढ़ गए।
12 वर्षों से हो रहा आयोजन
कार्यक्रम के आयोजक और धर्मसभा अध्यक्ष माधव सेन के अनुसार, गांधी नगर क्षेत्र में यह आयोजन पिछले 12 वर्षों से लगातार आयोजित किया जा रहा है। हर वर्ष महाकाल त्रिशूल यात्रा के साथ धर्मसभा का आयोजन किया जाता है। उन्होंने बताया कि पिछले वर्ष इस कार्यक्रम में कपिल मिश्रा भी शामिल हुए थे।

आयोजकों का कहना है कि इस बार भी उन्होंने तय प्रक्रिया के तहत प्रशासन से अनुमति मांगी थी। आवेदन 18 मई 2026 को दिया गया था, लेकिन प्रशासन ने करीब छह दिनों तक कोई स्पष्ट निर्णय नहीं लिया। बाद में 27 मई को लिखित रूप से अनुमति निरस्त कर दी गई।
हाईकोर्ट में पहुंचा मामला
माधव सेन ने बताया कि अनुमति रद्द होते ही उसी दिन जबलपुर स्थित मध्यप्रदेश हाईकोर्ट में याचिका दायर कर दी गई। उनका दावा है कि कोर्ट में आज सुनवाई हो सकती है और शाम तक फैसला आने की उम्मीद है।
आयोजकों का कहना है कि प्रशासन ने छोटे-छोटे तकनीकी कारणों का हवाला देकर कार्यक्रम रोकने का प्रयास किया है, जबकि यह आयोजन वर्षों से शांतिपूर्ण तरीके से होता आ रहा है।
प्रशासन ने भीड़ और ट्रैफिक का दिया हवाला
वहीं पुलिस प्रशासन ने अनुमति निरस्त करने के पीछे सुरक्षा और यातायात संबंधी कारण बताए हैं। जारी पत्र के अनुसार, गांधी नगर बस स्टैंड क्षेत्र पहले से ही अत्यधिक व्यस्त और भीड़भाड़ वाला इलाका है। यहां होटल, बाजार और व्यावसायिक गतिविधियों के कारण लगातार ट्रैफिक दबाव बना रहता है।
पुलिस का कहना है कि कार्यक्रम स्थल की क्षमता लगभग 500 से 600 लोगों तक सीमित है, जबकि आयोजकों ने आवेदन में 5 से 6 हजार लोगों की भीड़ जुटने की संभावना जताई थी। ऐसे में कानून-व्यवस्था और यातायात व्यवस्था प्रभावित होने की आशंका को देखते हुए अनुमति निरस्त की गई।
हिंदू उत्सव समिति ने उठाए सवाल
इस मामले में श्री हिंदू उत्सव समिति के अध्यक्ष चंद्रशेखर तिवारी ने प्रशासनिक निर्णय पर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि टी राजा सिंह जैसे वक्ता के आने की वजह से दबाव में आकर कार्यक्रम की अनुमति रद्द की गई।

तिवारी ने कहा कि मध्य प्रदेश में हिंदूवादी सरकार होने के बावजूद हिंदू संगठनों को कार्यक्रमों की अनुमति नहीं मिलना चिंता का विषय है। उन्होंने मुख्यमंत्री मोहन यादव से हस्तक्षेप की मांग करते हुए कहा कि सरकार को धार्मिक भावनाओं का सम्मान करना चाहिए।
राजनीतिक और सामाजिक चर्चा तेज
धर्मसभा को लेकर विवाद अब राजनीतिक और सामाजिक बहस का विषय बन गया है। एक पक्ष इसे धार्मिक स्वतंत्रता और आयोजन के अधिकार से जोड़कर देख रहा है, जबकि दूसरा पक्ष सुरक्षा और कानून-व्यवस्था को प्राथमिकता देने की बात कह रहा है।
टी राजा सिंह अपने बयानों और हिंदुत्व से जुड़े मुद्दों को लेकर अक्सर चर्चा में रहते हैं। ऐसे में उनके भोपाल आने की खबर के बाद कार्यक्रम को लेकर प्रशासनिक सतर्कता भी बढ़ गई थी।
अब कोर्ट के फैसले पर टिकी नजरें
फिलहाल पूरे मामले में अब सबकी निगाहें हाईकोर्ट की सुनवाई पर टिकी हुई हैं। यदि कोर्ट आयोजकों को राहत देता है तो 31 मई को धर्मसभा आयोजित हो सकती है। वहीं यदि प्रशासनिक निर्णय को सही माना जाता है, तो कार्यक्रम रद्द भी हो सकता है।
इस बीच गांधी नगर और आसपास के क्षेत्रों में पुलिस और प्रशासन की गतिविधियां भी बढ़ गई हैं। प्रशासन कानून-व्यवस्था बनाए रखने को लेकर अलर्ट मोड में नजर आ रहा है।