सागर जिले के शासकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय में नारी शक्ति वंदन पखवाड़ा के अंतर्गत एक प्रेरणादायक व्याख्यान माला का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम का उद्देश्य छात्राओं और महिलाओं में स्वास्थ्य, पोषण तथा सशक्तिकरण के प्रति जागरूकता बढ़ाना था। कार्यक्रम में मुख्य वक्ता के रूप में डॉ. भानु लक्ष्मी नेमा ने अपने विचार साझा किए और महिलाओं के समग्र विकास पर विस्तार से प्रकाश डाला।
कार्यक्रम की शुरुआत सरस्वती वंदना और दीप प्रज्वलन के साथ हुई, जिसके बाद मुख्य वक्ता का स्वागत महाविद्यालय परिवार द्वारा किया गया। इस अवसर पर बड़ी संख्या में छात्राएं, महिला प्राध्यापक और महाविद्यालय के अन्य सदस्य उपस्थित रहे।
महिला स्वास्थ्य और पोषण पर विशेष जोर
अपने व्याख्यान में डॉ. भानु लक्ष्मी नेमा ने कहा कि महिलाओं का सशक्तिकरण तभी संभव है, जब वे शारीरिक और मानसिक रूप से स्वस्थ हों। उन्होंने बताया कि आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में महिलाएं अक्सर अपने स्वास्थ्य की अनदेखी कर देती हैं, जिसका असर उनके संपूर्ण जीवन पर पड़ता है।
उन्होंने संतुलित आहार, नियमित व्यायाम और मानसिक स्वास्थ्य को बनाए रखने के महत्व पर विस्तार से चर्चा की। साथ ही उन्होंने कहा कि महिलाओं को अपने स्वास्थ्य के प्रति सजग रहना चाहिए और समय-समय पर आवश्यक जांच करानी चाहिए।

सशक्तिकरण के लिए जागरूकता जरूरी
डॉ. नेमा ने महिला सशक्तिकरण के विषय पर बोलते हुए कहा कि शिक्षा और जागरूकता ही महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाती है। उन्होंने छात्राओं को प्रेरित करते हुए कहा कि वे अपने अधिकारों को समझें और समाज में अपनी भूमिका को मजबूती से निभाएं।
उन्होंने यह भी कहा कि आज महिलाएं हर क्षेत्र में अपनी पहचान बना रही हैं, लेकिन अभी भी कई क्षेत्रों में जागरूकता की कमी है, जिसे दूर करने की आवश्यकता है।
प्राचार्य ने किया नारियों के सम्मान पर संबोधन
कार्यक्रम में महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. प्रवीण श्रीवास्तव ने भी अपने विचार व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि नारी समाज की आधारशिला है और उसके बिना किसी भी समाज की प्रगति संभव नहीं है।
उन्होंने छात्राओं से अपील की कि वे अपने आत्मविश्वास को मजबूत करें और अपने लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए निरंतर प्रयासरत रहें। साथ ही उन्होंने महिला सशक्तिकरण के लिए शिक्षा के महत्व को भी रेखांकित किया।
महिला आरक्षण बिल पर विचार
कार्यक्रम में डॉ. मनोज जैन ने महिला आरक्षण बिल के विषय पर अपने विचार प्रस्तुत किए। उन्होंने बताया कि यह बिल महिलाओं को राजनीतिक और सामाजिक क्षेत्र में अधिक अवसर प्रदान करेगा, जिससे उनकी भागीदारी बढ़ेगी और समाज में समानता को बढ़ावा मिलेगा।
उन्होंने कहा कि महिला आरक्षण बिल महिलाओं के अधिकारों को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है और इससे देश के विकास में महिलाओं की भूमिका और अधिक सशक्त होगी।

छात्राओं की सक्रिय भागीदारी
कार्यक्रम में बड़ी संख्या में छात्राओं ने भाग लिया और विषयों पर गहरी रुचि दिखाई। कई छात्राओं ने सवाल पूछकर अपनी जिज्ञासाएं भी व्यक्त कीं, जिनका विशेषज्ञों द्वारा समाधान किया गया।
इससे यह स्पष्ट हुआ कि आज की युवा पीढ़ी महिला सशक्तिकरण और स्वास्थ्य जैसे विषयों के प्रति जागरूक हो रही है और समाज में सकारात्मक बदलाव लाने के लिए तैयार है।
मुख्य वक्ता का सम्मान
कार्यक्रम के अंत में मुख्य वक्ता डॉ. भानु लक्ष्मी नेमा को स्मृति चिन्ह भेंटकर सम्मानित किया गया। यह सम्मान उनके द्वारा दिए गए ज्ञानवर्धक और प्रेरणादायक व्याख्यान के लिए किया गया।
कार्यक्रम का संचालन डॉ. स्वप्ना सराफ ने किया, जबकि आभार प्रदर्शन नेहा जैन द्वारा किया गया।
नारी शक्ति वंदन पखवाड़ा के अंतर्गत आयोजित यह व्याख्यान माला न केवल ज्ञानवर्धक रही, बल्कि इसने छात्राओं और उपस्थित महिलाओं को आत्मनिर्भर और सशक्त बनने की प्रेरणा भी दी।
महाविद्यालय में आयोजित इस कार्यक्रम ने यह संदेश दिया कि यदि महिलाएं स्वस्थ, शिक्षित और जागरूक हों, तो वे समाज और देश के विकास में महत्वपूर्ण योगदान दे सकती हैं। ऐसे आयोजनों से न केवल जागरूकता बढ़ती है, बल्कि एक सशक्त और समतामूलक समाज के निर्माण की दिशा में भी ठोस कदम उठाए जाते हैं।