मातृ एवं शिशु मृत्यु दर घटाने के लिए कलेक्टर प्रतिभा पाल के कड़े निर्देश !

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सागर जिले में स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने और मातृ एवं शिशु मृत्यु दर में कमी लाने के उद्देश्य से जिला स्वास्थ्य समिति की महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। इस बैठक की अध्यक्षता कलेक्टर प्रतिभा पाल ने की, जिसमें स्वास्थ्य विभाग की विभिन्न योजनाओं और सेवाओं की प्रगति की विस्तृत समीक्षा की गई।

बैठक में जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी विवेक केवी, मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी तथा सिविल सर्जन सहित अन्य संबंधित अधिकारी उपस्थित रहे। कलेक्टर ने सभी अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि स्वास्थ्य सेवाओं में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी और दोषी पाए जाने पर सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।

मातृ एवं शिशु मृत्यु दर कम करने पर विशेष जोर

कलेक्टर प्रतिभा पाल ने बैठक में सबसे अधिक ध्यान मातृ एवं शिशु मृत्यु दर को कम करने पर दिया। उन्होंने कहा कि गर्भवती महिलाओं का समय पर पंजीयन सुनिश्चित किया जाए और उन्हें सभी आवश्यक स्वास्थ्य जांच समय पर उपलब्ध कराई जाएं।

उन्होंने यह भी निर्देश दिए कि प्रत्येक गर्भवती महिला की नियमित निगरानी की जाए, विशेष रूप से उन महिलाओं पर ध्यान दिया जाए जो हाई-रिस्क श्रेणी में आती हैं। हाई-रिस्क मामलों की पहचान कर उनकी अलग से सूची तैयार की जाए और उस पर लगातार निगरानी रखी जाए।

हाई-रिस्क गर्भवती महिलाओं की सतत निगरानी

कलेक्टर ने निर्देशित किया कि सभी बीएमओ (ब्लॉक मेडिकल ऑफिसर) के पास हाई-रिस्क गर्भवती महिलाओं की अद्यतन सूची अनिवार्य रूप से उपलब्ध होनी चाहिए। इसके साथ ही एएनएम और आशा कार्यकर्ताओं को निर्देश दिए गए कि वे इन महिलाओं का नियमित फॉलोअप करें और उनकी स्थिति पर नजर बनाए रखें।

उन्होंने कहा कि यदि किसी भी स्तर पर लापरवाही पाई गई, तो संबंधित अधिकारी-कर्मचारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

आपात स्थिति में त्वरित उपचार की व्यवस्था

बैठक में कलेक्टर ने यह भी निर्देश दिए कि किसी भी आपात स्थिति में गर्भवती महिला को तुरंत उच्च स्वास्थ्य केंद्र तक पहुंचाने की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। इसके लिए एंबुलेंस सेवाओं और अन्य आवश्यक संसाधनों को हमेशा तैयार रखा जाए।

उन्होंने कहा कि समय पर उपचार मिलने से कई गंभीर मामलों को रोका जा सकता है और मातृ एवं शिशु मृत्यु दर में कमी लाई जा सकती है।

एएनसी जांच पर दिया गया जोर

कलेक्टर प्रतिभा पाल ने एएनसी (एंटीनैटल केयर) जांच को अत्यंत महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि सभी गर्भवती महिलाओं की समय पर एएनसी जांच कराना सुनिश्चित किया जाए। इससे गर्भावस्था के दौरान होने वाली जटिलताओं का समय रहते पता लगाया जा सकता है और उचित उपचार दिया जा सकता है।

किशोरी बालिकाओं के लिए जागरूकता अभियान

बैठक में कलेक्टर ने किशोरी बालिकाओं के स्वास्थ्य, पोषण और स्वच्छता को लेकर भी विशेष निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि इस वर्ग के लिए विशेष जागरूकता अभियान चलाए जाएं, ताकि वे अपने स्वास्थ्य के प्रति जागरूक बन सकें।

उन्होंने यह भी कहा कि किशोरावस्था में सही पोषण और स्वच्छता की आदतें अपनाने से भविष्य में मातृ स्वास्थ्य बेहतर होता है, जिससे आने वाली पीढ़ी भी स्वस्थ रहती है।

स्वास्थ्य योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन पर जोर

कलेक्टर ने सभी स्वास्थ्य योजनाओं के प्रभावी और समयबद्ध क्रियान्वयन के निर्देश दिए। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचना चाहिए और इसमें किसी प्रकार की ढिलाई नहीं होनी चाहिए।

उन्होंने नियमित मॉनिटरिंग और समीक्षा बैठकें आयोजित करने के भी निर्देश दिए, ताकि योजनाओं की प्रगति पर लगातार नजर रखी जा सके।

अधिकारियों की जिम्मेदारी तय

बैठक में कलेक्टर ने स्पष्ट किया कि प्रत्येक अधिकारी और कर्मचारी की जिम्मेदारी तय की जाएगी और उनके कार्यों का मूल्यांकन किया जाएगा। उन्होंने कहा कि सभी को अपने दायित्वों का निर्वहन पूरी ईमानदारी और जिम्मेदारी के साथ करना होगा।

निष्कर्ष

सागर जिले में आयोजित इस बैठक ने यह स्पष्ट कर दिया है कि प्रशासन स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर गंभीर है और इसमें किसी भी प्रकार की लापरवाही को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। प्रतिभा पाल के सख्त निर्देशों से यह उम्मीद की जा रही है कि मातृ एवं शिशु मृत्यु दर में कमी आएगी और स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता में सुधार होगा।

यदि इन निर्देशों का सही तरीके से पालन किया गया, तो जिले में स्वास्थ्य व्यवस्था और अधिक सुदृढ़ होगी और आम नागरिकों को बेहतर चिकित्सा सुविधाएं मिल सकेंगी।

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