पुरानी गल्ला मंडी स्थित वर्धमान पब्लिक स्कूल में रविवार को वार्षिक उत्सव ‘प्रगति’ का भव्य आयोजन किया गया। रंगारंग प्रस्तुतियों, प्रतिभा सम्मान एवं प्रेरक संबोधनों से सजा यह कार्यक्रम विद्यार्थियों, अभिभावकों और शिक्षकों के लिए यादगार साबित हुआ। मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित युवा भाजपा नेता अविराज सिंह ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि “व्यक्ति शिक्षा से महान बनता है। शिक्षा केवल किताबों या मार्कशीट तक सीमित नहीं, बल्कि संपूर्ण व्यक्तित्व के निर्माण का माध्यम है।”

अविराज सिंह ने कहा कि छात्र जीवन जीवन का सबसे महत्वपूर्ण और सुनहरा काल होता है, क्योंकि इस दौरान व्यक्ति पर केवल एक ही जिम्मेदारी होती है — अच्छी शिक्षा ग्रहण करना। उन्होंने विद्यार्थियों से कहा कि फुर्सत के समय का उपयोग कुशलता एवं रुचि आधारित हॉबी विकसित करने में करें ताकि समय का सकारात्मक उपयोग हो सके। “शिक्षा ही वह चाबी है जो सफलता के नए द्वार खोलती है” — उनका यह संदेश विद्यार्थियों को खूब प्रेरित करता दिखा।

अपने संबोधन में उन्होंने अनुशासन को सबसे बड़ा गुरु बताते हुए कहा, “मार्क्स कभी भविष्य तय नहीं करते। कोई भी मार्कशीट नहीं बताती कि बच्चा आगे क्या बनेगा। दुनिया में वही महान बनता है जो जीवन भर सीखता है और अनुशासित रहता है। धन से मिलने वाली खुशी कुछ पल की होती है, लेकिन ज्ञान से मिलने वाली खुशी जीवन भर साथ चलती है।”
अविराज सिंह ने अभिभावकों से कहा कि यदि वे अपने बच्चों को संस्कारी और अच्छे नागरिक के रूप में देखना चाहते हैं तो उन्हें अपने आचरण में भी संस्कृति और आदर्श को शामिल करना चाहिए, क्योंकि बच्चे वही सीखते हैं जो अभिभावक करते हैं।
डिजिटल युग की चुनौतियों पर महत्वपूर्ण संदेश
युवा नेता अविराज सिंह ने विद्यार्थियों और अभिभावकों का ध्यान मोबाइल फोन और तकनीक के अति-प्रयोग के खतरे की ओर भी आकर्षित किया। उन्होंने कहा कि दुनिया के 79 देशों और अमेरिका के 50 राज्यों में स्कूलों में मोबाइल ले जाना प्रतिबंधित है। न्यूयॉर्क की रिपोर्ट के अनुसार 12 वर्ष से कम उम्र के बच्चों को मोबाइल देना उनके मानसिक और शारीरिक विकास पर गंभीर प्रभाव डालता है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि “मोबाइल बुरा नहीं है, लेकिन इसका सीमित और सकारात्मक उपयोग होना चाहिए — जीवन मोबाइल तक सीमित नहीं है।”

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और चैटजीपीटी पर बोलते हुए उन्होंने कहा कि यह तकनीकें उपयोगी हैं, लेकिन इनका दायरा सीमित होना चाहिए क्योंकि कोई भी तकनीक इंसान की जगह नहीं ले सकती।
उन्होंने ऑस्ट्रेलिया में 16 वर्ष से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया प्रतिबंध के फैसले का उदाहरण देते हुए सोशल मीडिया के लाभ-हानि दोनों पक्षों पर जागरूकता की आवश्यकता बताई।
हर बच्चे की प्रतिभा अद्वितीय
शिक्षकों को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि तुलना बच्चों के आत्मविश्वास को खत्म करती है और छात्र कभी स्वयं को कमजोर न समझें। “स्वामी विवेकानंद ने कहा था — इस दुनिया का सबसे बड़ा पाप खुद को कमजोर समझना है।”
सभागार तालियों से गूंज उठा जब उन्होंने कहा कि हर बच्चा अपने आप में अनोखा और सक्षम है, बस उसे सही मार्गदर्शन और सकारात्मक माहौल की जरूरत होती है।

अतिथियों का सम्मान एवं कार्यक्रम का समापन
कार्यक्रम के अंत में विद्यालय प्रबंधन की ओर से मुख्य अतिथि अविराज सिंह सहित विशिष्ट अतिथियों को स्मृति-चिह्न भेंट कर सम्मानित किया गया।
कार्यक्रम की अध्यक्षता स्कूल संचालक प्रकाश चंद्र सराफ एवं संजय सराफ ने की। विशिष्ट अतिथि के रूप में नगर पालिका उपाध्यक्ष एवं भाजपा मंडल अध्यक्ष राहुल चौधरी, स्कूल संचालक निखिल सराफ, सलिल सराफ तथा प्राचार्य कपिल देव यादव मंचासीन रहे।
विद्यालय परिवार, शिक्षक-कर्मचारियों, अभिभावकों और छात्रों की प्रभावशाली उपस्थिति के बीच कार्यक्रम उत्साह और गरिमा के साथ संपन्न हुआ।