सागर। विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर कृषि विज्ञान केंद्र (केवीके) सागर द्वारा ग्राम एकपना बसोना में पर्यावरण संरक्षण, जल संवर्धन, पोषण सुरक्षा तथा खरीफ फसलों की उन्नत खेती को लेकर व्यापक जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में कोलुआ, बरखेड़ा एवं आसपास के गांवों के किसानों, महिलाओं, विद्यार्थियों और ग्रामीणजनों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। इस अवसर पर जागरूकता रैली, पौधरोपण, निबंध प्रतियोगिता तथा किसानों के लिए तकनीकी प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए गए।
कार्यक्रम का आयोजन कृषि विज्ञान केंद्र सागर एवं मानव विकास संस्था के संयुक्त सहयोग से किया गया। कार्यक्रम में कृषि विज्ञान केंद्र के प्रधान वैज्ञानिक एवं प्रमुख डॉ. के.एस. यादव ने उपस्थित किसानों और ग्रामीणों को संबोधित करते हुए पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकता पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में बढ़ता प्रदूषण, जलवायु परिवर्तन, भूजल स्तर में गिरावट और प्राकृतिक संसाधनों का अत्यधिक दोहन मानव जीवन के लिए गंभीर चुनौती बनता जा रहा है। ऐसे में पर्यावरण संरक्षण केवल एक जिम्मेदारी नहीं बल्कि आने वाली पीढ़ियों के सुरक्षित भविष्य की आवश्यकता है।
डॉ. यादव ने कहा, “पेड़ हैं तो हम हैं। वृक्ष हमें जीवनदायिनी ऑक्सीजन प्रदान करते हैं, वातावरण में मौजूद कार्बन डाइऑक्साइड का अवशोषण करते हैं और पर्यावरण संतुलन बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।” उन्होंने ग्रामीणों से अधिक से अधिक पौधे लगाने और उनके संरक्षण का आग्रह किया। साथ ही प्रधानमंत्री जल गंगा संवर्धन अभियान, वर्षा जल संचयन, खेत-तालाब निर्माण तथा प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण के महत्व पर भी विस्तार से जानकारी दी।

कार्यक्रम के दौरान किसानों को आगामी खरीफ सीजन की तैयारियों के संबंध में भी महत्वपूर्ण जानकारी प्रदान की गई। विशेषज्ञों ने सोयाबीन, उड़द और मूंग जैसी प्रमुख खरीफ फसलों की उन्नत खेती, उन्नत बीजों के चयन, संतुलित उर्वरक प्रबंधन तथा बदलते मौसम और अनियमित वर्षा की परिस्थितियों में अपनाई जाने वाली वैज्ञानिक कृषि तकनीकों के बारे में बताया। किसानों को जल संरक्षण आधारित कृषि पद्धतियों के उपयोग पर भी विशेष जोर दिया गया ताकि कम पानी में अधिक उत्पादन प्राप्त किया जा सके।
कृषि विज्ञान केंद्र के तकनीकी अधिकारी श्री मयंक मेहरा ने कार्यक्रम में न्यूट्री स्मार्ट विलेज की अवधारणा पर प्रकाश डालते हुए ग्रामीण परिवारों के पोषण स्तर में सुधार के उपाय बताए। उन्होंने कहा कि कुपोषण से लड़ने और संतुलित आहार सुनिश्चित करने के लिए प्रत्येक परिवार को अपनी पोषण वाटिका विकसित करनी चाहिए। उन्होंने फलदार वृक्षों, हरी सब्जियों और सूक्ष्म पोषक तत्वों से भरपूर फसलों के महत्व के बारे में जानकारी दी। विशेष रूप से महिलाओं को परिवार के स्वास्थ्य और पोषण में उनकी भूमिका के प्रति जागरूक किया गया।
कार्यक्रम का एक महत्वपूर्ण आकर्षण फलदार पौधों के रोपण की उन्नत तकनीकों का व्यावहारिक प्रदर्शन रहा। किसानों को गड्ढा तैयार करने, पौधारोपण, जैविक खाद के उपयोग, पौधों की सुरक्षा तथा पोषण प्रबंधन संबंधी तकनीकी जानकारी दी गई। विशेषज्ञों ने बताया कि पौधारोपण के बाद उनकी नियमित देखभाल और संरक्षण भी उतना ही आवश्यक है जितना पौधा लगाना।
विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर लगभग 50 फलदार एवं छायादार पौधों का रोपण किया गया। इनमें ऐसे पौधों को प्राथमिकता दी गई जो पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ ग्रामीणों को आर्थिक एवं पोषण संबंधी लाभ भी प्रदान कर सकें। कार्यक्रम में शामिल सभी लोगों ने पौधों की सुरक्षा और उनके संरक्षण का संकल्प लिया।

पर्यावरण संरक्षण के प्रति जनजागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से स्कूली बच्चों एवं ग्रामीणों की सहभागिता से एक जागरूकता रैली भी निकाली गई। रैली के दौरान बच्चों ने पर्यावरण बचाने, जल संरक्षण करने और अधिक से अधिक वृक्ष लगाने के संदेश दिए। गांव की प्रमुख गलियों से होकर निकली इस रैली ने ग्रामीणों को पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूक करने का कार्य किया।
बच्चों में पर्यावरण के प्रति जिम्मेदारी की भावना विकसित करने के लिए निबंध प्रतियोगिता का आयोजन भी किया गया। प्रतियोगिता में विद्यार्थियों ने पर्यावरण संरक्षण, जल बचत और वृक्षारोपण जैसे विषयों पर अपने विचार प्रस्तुत किए। इसके अलावा आंगनबाड़ी केंद्रों एवं सार्वजनिक स्थलों पर भी पौधारोपण कार्यक्रम आयोजित किए गए।
कार्यक्रम में मानव विकास संस्था की ओर से श्री आनंद कोरी, श्री रामसेवक पटेल, श्री रवि पटेल, श्री जितेन्द्र पटेल सहित अनेक सामाजिक कार्यकर्ताओं ने भाग लिया। प्रगतिशील कृषक श्री नरेन्द्र पटेल, श्री पूरन पटेल, श्री निलेश पटेल एवं श्री पालतू पटेल सहित बड़ी संख्या में किसान, महिलाएं और ग्रामीणजन भी उपस्थित रहे।
कार्यक्रम के समापन पर सभी प्रतिभागियों ने पर्यावरण संरक्षण, जल बचत, पौधारोपण एवं पौधों के संरक्षण का सामूहिक संकल्प लिया। साथ ही स्वच्छ एवं हरित वातावरण के निर्माण के लिए समाज के अन्य लोगों को भी जागरूक करने की शपथ ली। कृषि विज्ञान केंद्र के अधिकारियों ने कहा कि भविष्य में भी ऐसे कार्यक्रमों के माध्यम से किसानों और ग्रामीणों को पर्यावरण संरक्षण तथा टिकाऊ कृषि पद्धतियों के प्रति जागरूक किया जाता रहेगा।