सागर। शासकीय कला एवं वाणिज्य महाविद्यालय, सागर द्वारा मध्य प्रदेश शासन की मंशानुसार भारतीय पारंपरिक खेलों को बढ़ावा देने के उद्देश्य से संभाग स्तरीय पिट्टू प्रतियोगिता का सफल आयोजन किया गया। प्रतियोगिता में सागर एवं दमोह जिलों की पुरुष एवं महिला टीमों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता की।

कार्यक्रम की मुख्य अतिथि अंतरराष्ट्रीय वेटलिफ्टर सुश्री आयुषी अग्रवाल रहीं। उन्होंने विधिवत पिट्टू खेलकर प्रतियोगिता का शुभारंभ किया। इस अवसर पर उन्होंने खिलाड़ियों से परिचय प्राप्त करते हुए उन्हें अनुशासन, समर्पण एवं खेल भावना के साथ खेलने का संदेश दिया तथा उज्ज्वल भविष्य के लिए शुभाशीष प्रदान किया।

कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहीं संस्था की प्राचार्य डॉ. सरोज गुप्ता ने अपने उद्बोधन में कहा कि मध्य प्रदेश शासन द्वारा भारतीय प्राचीन एवं परंपरागत खेलों जैसे पिट्टू, मलखंभ आदि को पुनः जीवित रखने एवं युवाओं को उनसे जोड़ने के लिए महाविद्यालय स्तर पर इन खेलों को प्रारंभ किया गया है। उन्होंने सभी खिलाड़ियों से खेल भावना के साथ खेलते हुए खेल की शुचिता बनाए रखने का आग्रह किया और सभी प्रतिभागियों के उज्ज्वल भविष्य की कामना की।

प्रतियोगिता के परिणामों में पुरुष वर्ग में सागर जिला की टीम विजेता एवं दमोह जिला की टीम उपविजेता रही। वहीं महिला वर्ग में भी सागर जिला की टीम ने विजेता का खिताब प्राप्त किया तथा दमोह जिला की टीम उपविजेता रही। छात्र वर्ग में प्रद्युम दुबे, शनि राजपूत एवं प्रेमलाल अहिरवार का प्रदर्शन विशेष रूप से सराहनीय रहा, जबकि छात्रा वर्ग में ऋषिका यादव एवं आरती कुर्मी ने उत्कृष्ट खेल कौशल का परिचय दिया।
प्रधानमंत्री कॉलेज ऑफ एक्सीलेंस, शासकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय दमोह से क्रीड़ा अधिकारी डॉ. साधु सिंह, डॉ. प्रिया थापा, डॉ. जितेन्द्र राजपूत, डॉ. अभिषेक गोयल एवं डॉ. अनामिका पाठक ने प्रतियोगिता को सफलतापूर्वक संपन्न कराने में विशेष योगदान दिया। समापन अवसर पर डॉ. जय कुमार सोनी एवं डॉ. शुचिता अग्रवाल द्वारा विजेता एवं उपविजेता खिलाड़ियों को पुरस्कार प्रदान किए गए।

कार्यक्रम के सफल आयोजन में पंजीयन समिति के सदस्य डॉ. अखलेश तिवारी, श्री प्रमोद सेन, सुश्री आकांक्षा सोनी तथा विशेष सहयोगी श्री शैलेन्द्र शर्मा, श्री भगवत एवं श्री निजाम का महत्वपूर्ण योगदान रहा। क्रीड़ा अधिकारी डॉ. अजय व्यास ने कार्यक्रम का कुशल संचालन किया एवं खेल प्रभारी श्री सुरेन्द्र यादव ने आभार प्रदर्शन किया।
समग्र रूप से यह आयोजन न केवल पारंपरिक खेलों के संरक्षण की दिशा में एक सराहनीय पहल रहा, बल्कि खिलाड़ियों में खेल भावना, अनुशासन एवं टीम वर्क को भी सुदृढ़ करने वाला सिद्ध हुआ।