संघर्ष से सफलता तक: सागर की रश्मि रावत ने पावरलिफ्टिंग में जीता स्वर्ण, अब राष्ट्रीय मंच पर नजर !

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सागर। जीवन में आने वाली कठिन परिस्थितियां यदि किसी व्यक्ति के हौसलों को कमजोर करने के बजाय उसे और अधिक मजबूत बना दें, तो सफलता की नई इबारत लिखी जाती है। सागर की रहने वाली महिला खिलाड़ी एवं शासकीय सेविका रश्मि रावत ने अपने अथक परिश्रम, दृढ़ संकल्प और आत्मविश्वास के बल पर ऐसी ही प्रेरणादायक कहानी रची है। परिवार, नौकरी, बच्चों की परवरिश और सामाजिक चुनौतियों के बीच उन्होंने न केवल अपने सपनों को जीवित रखा, बल्कि पावरलिफ्टिंग जैसे कठिन खेल में स्वर्ण पदक जीतकर एक नई पहचान भी बनाई है।

रश्मि रावत को बचपन से ही खेलकूद में विशेष रुचि थी। हालांकि 10 से 12 वर्ष की आयु के बाद परिस्थितियों के कारण उन्हें खेल गतिविधियों से दूर होना पड़ा। विवाह के बाद पारिवारिक परंपराओं और जिम्मेदारियों के चलते घर से बाहर नौकरी करने की अनुमति नहीं थी। बच्चों, पति और गृहस्थ जीवन की जिम्मेदारियों के बीच उनके अपने सपने और शौक पीछे छूटते चले गए, लेकिन उन्होंने कभी हार नहीं मानी। परिवार की सहमति से उन्होंने अपनी शिक्षा जारी रखी और लगातार आगे बढ़ने का प्रयास करती रहीं।

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जीवन में उस समय बड़ा संकट आया जब उनके ससुर का अचानक निधन हो गया। परिवार के मुखिया के चले जाने से पूरा परिवार मानसिक और सामाजिक चुनौतियों से घिर गया। गांव के माहौल और असुरक्षा की भावना के बीच बच्चों के भविष्य को बेहतर बनाने का संकल्प लेकर उन्होंने संघर्ष का रास्ता चुना। परिस्थितियां ऐसी थीं कि उन्हें पारिवारिक मर्यादाओं का पालन करते हुए कॉलेज में अध्यापन कार्य करना पड़ा। घूंघट और पल्लू की परंपरा निभाते हुए उन्होंने विद्यार्थियों को पढ़ाया, घर संभाला, ब्यूटी पार्लर का कार्य किया, बच्चों को कोचिंग दी और अपनी पढ़ाई भी जारी रखी।

रश्मि रावत ने अपने बच्चों की शिक्षा को हमेशा सर्वोच्च प्राथमिकता दी। घर की जिम्मेदारियों के साथ-साथ बच्चों की पढ़ाई और स्वयं के अध्ययन पर भी बराबर ध्यान दिया। इस दौरान परिवार को कई कठिन दौर से गुजरना पड़ा। उनके पति गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं से जूझते रहे। किडनी संबंधी बीमारी और अन्य स्वास्थ्य संकटों ने परिवार को मानसिक और आर्थिक रूप से प्रभावित किया। वर्ष 2014 में योग और स्वस्थ जीवनशैली को अपनाने के बाद उनके पति के स्वास्थ्य में सुधार आया और आज वे स्वस्थ जीवन व्यतीत कर रहे हैं।

अपने संघर्षों के बीच रश्मि रावत ने प्राइवेट कॉलेज में कार्य करते हुए शासकीय नौकरी के लिए आवेदन किया और अपने परिश्रम के बल पर चयनित हुईं। इसके बाद उन्होंने सागर में रहकर शासकीय दायित्वों का सफलतापूर्वक निर्वहन किया और बच्चों की शिक्षा पर भी पूरा ध्यान दिया। आगे चलकर उन्होंने एक अन्य प्रतियोगी परीक्षा में भी सफलता प्राप्त की और सूबेदार शीघ्रलेखक के पद पर नियुक्त हुईं।

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उनकी मेहनत और संघर्ष का प्रभाव उनके बच्चों पर भी पड़ा। उनकी पुत्री अनमोल रावत ने मां के मार्गदर्शन और प्रेरणा से मेडिकल प्रवेश परीक्षा नीट में उत्कृष्ट प्रदर्शन किया। अखिल भारतीय स्तर पर उल्लेखनीय रैंक प्राप्त कर उन्होंने परिवार और क्षेत्र का नाम रोशन किया। रश्मि रावत का मानना है कि बच्चों को केवल शिक्षा नहीं, बल्कि संघर्ष और अनुशासन का संस्कार देना भी जरूरी है।

बचपन का अधूरा सपना उन्होंने कोरोना काल के दौरान फिर से जीवित किया। स्वास्थ्य और फिटनेस के प्रति जागरूकता बढ़ने के बाद उन्होंने नियमित व्यायाम और जिम प्रशिक्षण शुरू किया। प्रतिदिन सुबह 6 बजे उठकर अभ्यास करना, घर और कार्यालय की जिम्मेदारियां निभाना तथा अनुशासित जीवनशैली अपनाना उनकी दिनचर्या का हिस्सा बन गया। उनकी मेहनत रंग लाई और उन्होंने पावरलिफ्टिंग प्रतियोगिताओं में शानदार प्रदर्शन करना शुरू कर दिया।

रश्मि रावत ने पहले जिला स्तर पर उत्कृष्ट प्रदर्शन किया और फिर राज्य स्तरीय प्रतियोगिताओं में स्वर्ण पदक हासिल कर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया। वर्ष 2026 में तीन माह के कठोर प्रशिक्षण के बाद उन्होंने जिला एवं राज्य स्तरीय पावरलिफ्टिंग प्रतियोगिताओं में गोल्ड मेडल जीतकर राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिता के लिए अपनी जगह सुनिश्चित की।

अब उनका लक्ष्य और भी बड़ा है। वे 18 से 23 जुलाई को महाराष्ट्र के औरंगाबाद में आयोजित होने वाली राष्ट्रीय पावरलिफ्टिंग प्रतियोगिता की तैयारी में जुटी हुई हैं। उनका सपना राष्ट्रीय स्तर पर स्वर्ण पदक जीतकर अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में भारत का प्रतिनिधित्व करना है।

रश्मि रावत का कहना है कि सफलता कभी एक दिन में नहीं मिलती। यह वर्षों के निरंतर परिश्रम, अनुशासन, संघर्ष और आत्मविश्वास का परिणाम होती है। उन्होंने अपने जीवन से यह साबित कर दिया है कि यदि लक्ष्य स्पष्ट हो और मन में दृढ़ संकल्प हो तो कोई भी चुनौती सफलता के मार्ग में बाधा नहीं बन सकती। उनकी प्रेरणादायक यात्रा आज न केवल महिलाओं बल्कि समाज के हर उस व्यक्ति के लिए प्रेरणा है जो विपरीत परिस्थितियों में भी अपने सपनों को साकार करने का साहस रखता है।

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