नई दिल्ली। बॉलीवुड एक्ट्रेस करिश्मा कपूर के पूर्व पति और मशहूर उद्योगपति संजय कपूर के निधन के बाद उनकी संपत्ति को लेकर परिवार में कानूनी विवाद गहराता जा रहा है। अब इस मामले में संजय कपूर की तीसरी पत्नी प्रिया कपूर और उनकी मां रानी कपूर आमने-सामने आ गई हैं।
प्रिया कपूर ने दिल्ली हाईकोर्ट में याचिका दायर कर अपनी सास रानी कपूर पर अदालत में झूठी गवाही देने और तथ्यों को छिपाने का आरोप लगाया है। साथ ही उन्होंने ‘आरके फैमिली ट्रस्ट’ के खिलाफ दायर दीवानी मुकदमे को पूरी तरह खारिज करने की मांग की है।
हाईकोर्ट ने मांगा जवाब
बुधवार को जस्टिस मिनी पुष्करणा की पीठ ने प्रिया कपूर की याचिका पर सुनवाई करते हुए रानी कपूर को नोटिस जारी किया और जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया।

प्रिया कपूर ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता के तहत झूठी गवाही के आरोप में रानी कपूर के खिलाफ कार्रवाई शुरू करने की मांग की है। उनका कहना है कि रानी कपूर ने शपथपत्र में गलत बयान देकर अदालत को गुमराह किया है, जो न्यायिक प्रक्रिया का गंभीर दुरुपयोग है।
प्रिया कपूर के आरोप क्या हैं?
सुनवाई के दौरान दाखिल आवेदन में प्रिया कपूर ने दावा किया है कि हलफनामों और तस्वीरों सहित ‘पुख्ता सबूत’ मौजूद हैं, जो यह साबित करते हैं कि रानी कपूर ने जानबूझकर गलत बयान दिया।
आरोप है कि रानी कपूर ने अदालत में यह कहा था कि उन्होंने ‘आरके फैमिली ट्रस्ट डीड’ पर हस्ताक्षर नहीं किए या दस्तावेज पढ़े बिना साइन कर दिए।
प्रिया का कहना है कि ये दावे तथ्यात्मक रूप से गलत हैं और अदालत को भ्रमित करने के उद्देश्य से किए गए हैं।
रानी कपूर का दावा
दूसरी ओर, 80 वर्षीय रानी कपूर ने अपनी याचिका में आरोप लगाया है कि अक्टूबर 2017 में उनके नाम पर गठित ‘आरके फैमिली ट्रस्ट’ के लिए जाली और धोखाधड़ी वाले दस्तावेजों का इस्तेमाल किया गया।

उन्होंने अदालत से अनुरोध किया है कि उनकी बहू प्रिया कपूर, पोते-पोतियों और अन्य प्रतिवादियों को ट्रस्ट का उपयोग करने या उसके समर्थन में कोई भी कार्रवाई करने से स्थायी रूप से रोका जाए।
रानी कपूर का कहना है कि वह अपने दिवंगत पति सुरिंदर कपूर की संपत्ति की एकमात्र लाभार्थी थीं और संपत्ति को ‘आरके फैमिली ट्रस्ट’ में ट्रांसफर करते समय उनके साथ सुनियोजित धोखाधड़ी की गई।
‘सोना ग्रुप’ से जुड़ा है मामला
सुरिंदर कपूर ‘सोना ग्रुप ऑफ कंपनीज’ समेत कई व्यवसायों के संस्थापक थे। रानी कपूर का दावा है कि उनके बेटे संजय कपूर ने अपनी मृत्यु तक उन्हें कभी यह स्पष्ट नहीं किया कि उन्हें उनकी संपत्तियों और विरासत से वंचित किया जा चुका है।
उन्होंने यह भी कहा कि उन्हें कथित ‘आरके फैमिली ट्रस्ट’ की प्रति तक उपलब्ध नहीं कराई गई।
आगे क्या?
अब इस मामले में रानी कपूर को अदालत में अपना पक्ष रखना होगा। यदि अदालत को यह प्रतीत होता है कि शपथपत्र में जानबूझकर गलत बयान दिया गया है, तो झूठी गवाही के आरोप में कानूनी कार्रवाई संभव है।
संजय कपूर की मृत्यु के बाद शुरू हुआ यह पारिवारिक विवाद अब कानूनी जंग का रूप ले चुका है। आने वाले दिनों में अदालत की कार्यवाही से यह साफ होगा कि ट्रस्ट की वैधता और संपत्ति के अधिकारों को लेकर किसका दावा मजबूत है।