सफलता की कहानी: प्राकृतिक और जैविक खेती से आत्मनिर्भर बने किसान गोविंद पटेल !

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सागर जिले के बंडा विकासखंड अंतर्गत ग्राम पंचायत मझगुवा के ग्राम गणेशगंज के किसान गोविंद पटेल ने प्राकृतिक और जैविक खेती अपनाकर एक मिसाल कायम की है। उन्होंने पारंपरिक रासायनिक खेती को छोड़कर प्राकृतिक खेती की पद्धति अपनाई और आज बेहतर उत्पादन तथा अधिक लाभ प्राप्त कर रहे हैं।

पहले गोविंद पटेल अपनी खेती में रासायनिक खाद और कीटनाशकों का अधिक उपयोग करते थे। इससे खेती की लागत लगातार बढ़ रही थी और जमीन की उर्वरता भी कम होती जा रही थी। बढ़ती लागत और घटती उपज से वे चिंतित रहते थे। इसी दौरान उन्होंने प्राकृतिक खेती के बारे में जानकारी प्राप्त की और प्रशिक्षण लेकर इस दिशा में कदम बढ़ाया।

प्रशिक्षण के बाद उन्होंने अपनी खेती में जीवामृत, घनजीवामृत, गोमूत्र आधारित जैविक कीटनाशक और देशी बीजों का उपयोग शुरू किया। धीरे-धीरे उन्होंने अपनी पूरी खेती को जैविक पद्धति में परिवर्तित कर दिया। प्राकृतिक खेती अपनाने से उनकी जमीन की संरचना में सुधार हुआ और मिट्टी की उर्वरता बढ़ने लगी। खेतों में केंचुओं की संख्या बढ़ी, जिससे मिट्टी की गुणवत्ता बेहतर हुई और नमी लंबे समय तक बनी रहने लगी।

गोविंद पटेल ने अपने खेतों में गेहूं, चना और विभिन्न सब्जियों की खेती जैविक तरीके से शुरू की। जैविक पद्धति से उगाई गई फसलों की गुणवत्ता बेहतर होने के कारण बाजार में उन्हें अच्छा मूल्य मिलने लगा। साथ ही रासायनिक खाद और महंगे कीटनाशकों पर होने वाला खर्च कम होने से उनकी खेती की लागत भी घट गई। परिणामस्वरूप उनकी आय में भी बढ़ोतरी हुई।

आज गोविंद पटेल अपने क्षेत्र के अन्य किसानों को भी प्राकृतिक खेती अपनाने के लिए प्रेरित कर रहे हैं। वे किसानों को बताते हैं कि प्राकृतिक और जैविक खेती से न केवल जमीन की उर्वरता बढ़ती है, बल्कि किसान कम लागत में अधिक लाभ भी प्राप्त कर सकते हैं।

गोविंद पटेल की यह सफलता इस बात का प्रमाण है कि यदि किसान धैर्य, सही मार्गदर्शन और प्रकृति के साथ संतुलन बनाकर खेती करें, तो वे आत्मनिर्भर बनने के साथ-साथ आर्थिक रूप से भी समृद्ध हो सकते हैं। उनकी पहल क्षेत्र के किसानों के लिए प्रेरणा का स्रोत बन रही है।

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