छतरपुर। जिले के ओरछा रोड थाना क्षेत्र के रामपुर गांव से अंधविश्वास और जागरूकता की कमी का एक मार्मिक मामला सामने आया है। यहां सर्पदंश की शिकार एक 25 वर्षीय महिला को डॉक्टरों द्वारा मृत घोषित किए जाने के बावजूद परिजन उसकी जान बचने की उम्मीद में घंटों तक झाड़-फूंक और तांत्रिक उपचार का सहारा लेते रहे। बाद में जब महिला के शव को दोबारा जिला अस्पताल लाया गया, तो मौत की सूचना समय पर न देने को लेकर मायके और ससुराल पक्ष के बीच विवाद इतना बढ़ गया कि अस्पताल परिसर में हाथापाई की स्थिति बन गई।

घटना ने एक बार फिर ग्रामीण क्षेत्रों में व्याप्त अंधविश्वास, सर्पदंश के प्रति जागरूकता की कमी और समय पर वैज्ञानिक उपचार की आवश्यकता को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
घर में सोते समय हुआ सर्पदंश
जानकारी के अनुसार रामपुर गांव निवासी 25 वर्षीय हर्षिनी शिवहरे, पत्नी गोकुल प्रसाद शिवहरे, शनिवार रात अपने घर में सो रही थीं। इसी दौरान उन्हें किसी विषैले जीव अथवा सांप ने काट लिया। शुरुआत में उन्हें इस बात का अंदाजा नहीं हुआ, लेकिन सुबह उनकी तबीयत अचानक बिगड़ने लगी।
हर्षिनी ने परिजनों को शरीर में असामान्य परेशानी और कमजोरी की जानकारी दी। स्थिति गंभीर होती देख परिवार के सदस्य उन्हें तत्काल छतरपुर जिला अस्पताल लेकर पहुंचे। अस्पताल में डॉक्टरों ने प्राथमिक उपचार शुरू किया, लेकिन हालत नाजुक होने के कारण उन्हें बेहतर उपचार के लिए झांसी रेफर कर दिया गया।
झांसी में डॉक्टरों ने किया मृत घोषित
परिजन गंभीर हालत में हर्षिनी को लेकर झांसी पहुंचे, जहां डॉक्टरों ने उनका परीक्षण किया। जांच के बाद चिकित्सकों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। डॉक्टरों के अनुसार महिला की मौत सर्पदंश के कारण हो चुकी थी और उनके शरीर में जीवन के कोई संकेत नहीं थे।

लेकिन परिजनों को डॉक्टरों के इस निष्कर्ष पर विश्वास नहीं हुआ। उन्हें उम्मीद थी कि किसी चमत्कार या पारंपरिक उपचार के माध्यम से महिला को बचाया जा सकता है। इसी उम्मीद में उन्होंने शव को अस्पताल से लेकर झाड़-फूंक कराने का निर्णय लिया।
राठ और टीकमगढ़ में कराया तांत्रिक उपचार
डॉक्टरों द्वारा मृत घोषित किए जाने के बावजूद परिजन शव को लेकर पहले राठ-पनवाड़ी क्षेत्र पहुंचे। वहां कथित रूप से झाड़-फूंक और तांत्रिक उपचार कराया गया। कई घंटों तक विभिन्न उपाय किए गए, लेकिन कोई परिणाम नहीं निकला।
इसके बाद भी परिजनों की उम्मीद खत्म नहीं हुई। वे महिला के शव को लेकर टीकमगढ़ पहुंचे, जहां एक अन्य स्थान पर भी झाड़-फूंक कराई गई। बताया जाता है कि परिजन लगातार इस आशा में थे कि महिला फिर से जीवित हो सकती है।
हालांकि चिकित्सकीय दृष्टि से मृत्यु के बाद इस प्रकार के उपायों का कोई वैज्ञानिक आधार नहीं होता, लेकिन ग्रामीण क्षेत्रों में आज भी कई लोग सर्पदंश जैसी घटनाओं में तांत्रिक उपायों और झाड़-फूंक पर भरोसा करते हैं।
दोबारा अस्पताल पहुंचे परिजन
कई स्थानों पर झाड़-फूंक कराने के बाद जब कोई लाभ नहीं हुआ तो शाम के समय परिजन महिला को लेकर पुनः छतरपुर जिला अस्पताल पहुंचे। यहां डॉक्टरों ने एक बार फिर जांच की और स्पष्ट किया कि महिला की मृत्यु पहले ही हो चुकी थी।

इसके बाद अस्पताल प्रशासन ने आवश्यक औपचारिकताएं शुरू कीं। इसी दौरान घटना की जानकारी मृतका के मायके पक्ष को भी मिली।
मायके और ससुराल पक्ष में हुआ विवाद
अस्पताल पहुंचने पर मृतका के मायके पक्ष के लोगों ने आरोप लगाया कि उन्हें बेटी की गंभीर स्थिति और मौत की सूचना समय पर नहीं दी गई। उनका कहना था कि यदि उन्हें पहले जानकारी दी जाती तो वे समय रहते पहुंच सकते थे।
इसी मुद्दे को लेकर मायके और ससुराल पक्ष के बीच बहस शुरू हो गई। देखते ही देखते विवाद बढ़ गया और दोनों पक्षों के लोगों के बीच तीखी नोकझोंक होने लगी। कुछ लोगों ने एक-दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप लगाए और स्थिति हाथापाई तक पहुंच गई।
अस्पताल परिसर में अचानक हुए इस विवाद के कारण कुछ समय के लिए तनावपूर्ण माहौल बन गया। उपस्थित लोगों और अस्पताल कर्मियों ने हस्तक्षेप कर दोनों पक्षों को शांत कराया।
सर्पदंश के मामलों में जागरूकता जरूरी
विशेषज्ञों का कहना है कि सर्पदंश की स्थिति में झाड़-फूंक या तांत्रिक उपचार पर भरोसा करने के बजाय तत्काल अस्पताल पहुंचना चाहिए। समय पर एंटी-वेनम और उचित चिकित्सा मिलने से अनेक मरीजों की जान बचाई जा सकती है।
ग्रामीण क्षेत्रों में आज भी अंधविश्वास के कारण कई लोग चिकित्सकीय उपचार में देरी कर देते हैं, जिससे स्थिति और गंभीर हो जाती है। स्वास्थ्य विभाग लगातार लोगों को जागरूक करने का प्रयास कर रहा है कि सर्पदंश जैसी घटनाओं में केवल वैज्ञानिक और चिकित्सकीय उपचार ही प्रभावी होता है।
हर्षिनी शिवहरे की दुखद मौत और उसके बाद हुई घटनाएं इस बात की याद दिलाती हैं कि अंधविश्वास की जगह समय पर चिकित्सा सहायता और जागरूकता ही ऐसे मामलों में जीवन बचाने का सबसे बड़ा माध्यम है।