सागर : ई-विकास प्रणाली से उर्वरक वितरण को लेकर इनपुट डीलर्स को दिया गया प्रशिक्षण !

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कलेक्टर संदीप जी.आर. के निर्देशन में जिले में उर्वरक वितरण की नई व्यवस्था ई-विकास प्रणाली को प्रभावी रूप से लागू करने के उद्देश्य से 17 जनवरी 2026 को डॉ. हरि सिंह गौर विश्वविद्यालय के अभिमंच सभागार में एक दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। यह प्रशिक्षण कृषि कल्याण तथा कृषि विकास विभाग द्वारा आयोजित किया गया, जिसमें जिले के समस्त इनपुट डीलर्स को ई-विकास प्रणाली के माध्यम से उर्वरक वितरण की प्रक्रिया की विस्तृत जानकारी दी गई।

प्रशिक्षण सत्र में भोपाल से आए क्रिस्प (CRISP) के तकनीकी विशेषज्ञ शाश्वत सिंह ने ई-विकास प्रणाली के तकनीकी एवं व्यवहारिक पहलुओं पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने बताया कि यह प्रणाली उर्वरक वितरण को अधिक पारदर्शी, सरल एवं किसानों के अनुकूल बनाएगी। साथ ही प्रशिक्षण के दौरान डीलर्स द्वारा उठाई गई विभिन्न शंकाओं का समाधान भी किया गया।

ई-विकास प्रणाली से होगा सरल और पारदर्शी उर्वरक वितरण

तकनीकी विशेषज्ञों द्वारा बताया गया कि ई-विकास प्रणाली के अंतर्गत किसानों का आधार सत्यापन किया जाएगा। सत्यापन के पश्चात किसान की कुल कृषि भूमि के अनुसार अनुशंसित मात्रा में उर्वरक ई-टोकन के माध्यम से वितरित किया जाएगा। इससे उर्वरकों का दुरुपयोग रुकेगा और वास्तविक पात्र किसानों को समय पर उचित मात्रा में उर्वरक उपलब्ध हो सकेगा।

प्रशिक्षण में यह भी स्पष्ट किया गया कि ई-विकास प्रणाली से उर्वरक वितरण प्रक्रिया डिजिटल होने के कारण रिकॉर्ड संधारण सरल होगा तथा शासन स्तर पर निगरानी भी अधिक प्रभावी ढंग से की जा सकेगी।

इस अवसर पर कृषि विभाग के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे। कार्यक्रम में उपसंचालक कृषि राजेश त्रिपाठी, सहायक रसायन विशेषज्ञ एस.बी. सिंह, परियोजना संचालक आत्मा दमोह जे.एल. प्रजापति, अनुविभागीय कृषि अधिकारी अनिल राय, सहायक संचालक कृषि कुमुद बुनकर कोरी, अंकित रावत, जय दत्त शर्मा सहित जिले के समस्त वरिष्ठ कृषि विकास अधिकारी, कृषि विस्तार अधिकारी एवं आत्मा परियोजना से बीटीएम शैलेश पांडे उपस्थित रहे।

अधिकारियों ने इनपुट डीलर्स से अपील की कि वे ई-विकास प्रणाली को गंभीरता से अपनाएं तथा किसानों को नई व्यवस्था के प्रति जागरूक करें, ताकि उर्वरक वितरण की प्रक्रिया सुचारु, पारदर्शी और किसान हितैषी बन सके।

कार्यक्रम के अंत में अधिकारियों ने विश्वास व्यक्त किया कि ई-विकास प्रणाली के माध्यम से जिले में उर्वरक वितरण व्यवस्था और अधिक मजबूत होगी तथा किसानों को समय पर लाभ मिलेगा।

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