पीटीसी मैदान में आयोजित 13 दिवसीय स्वदेशी मेला के दूसरे दिन बुधवार को उत्साह और उमंग का माहौल देखने को मिला। सुबह से लेकर देर शाम तक मेले में लोगों की खासी भीड़ उमड़ी और लगभग सभी स्टॉल पर खरीदारों व दर्शकों की रौनक बनी रही। स्वदेशी जागरण मंच के तत्वावधान में स्वर्णिम भारतवर्ष फाउंडेशन के माध्यम से आयोजित यह मेला न केवल स्वदेशी उत्पादों को बढ़ावा दे रहा है, बल्कि सांस्कृतिक चेतना और आत्मनिर्भर भारत के संकल्प को भी मजबूती प्रदान कर रहा है।

मेले के दूसरे दिन के मुख्य अतिथि विधायक प्रदीप लारिया रहे, जबकि मुख्य वक्ता प्रजातंत्र गंगेले (क्षेत्रीय विमर्श प्रमुख, स्वदेशी जागरण मंच) ने स्वदेशी की अवधारणा पर अपने विचार रखे। विशिष्ट अतिथि कपिल मलैया (महाकौशल प्रांत संयोजक, स्वदेशी जागरण मंच) की उपस्थिति ने कार्यक्रम को विशेष गरिमा प्रदान की। कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुआ, जिसे मेला सह संयोजिका प्रतिभा चौबे, विनीता केशरवानी और रश्मि तिवारी ने किया।
इस अवसर पर विधायक प्रदीप लारिया ने कहा कि स्वदेशी वस्तुओं का उपयोग केवल आर्थिक सशक्तिकरण ही नहीं, बल्कि देश की सांस्कृतिक पहचान को मजबूत करने का भी माध्यम है। उन्होंने आमजन से अपील की कि दैनिक जीवन में अधिक से अधिक स्वदेशी उत्पादों को अपनाकर स्थानीय कारीगरों और उद्यमियों को प्रोत्साहित करें।

मुख्य वक्ता प्रजातंत्र गंगेले ने अपने संबोधन में कहा कि स्वदेशी केवल एक शब्द नहीं, बल्कि राष्ट्रनिर्माण की विचारधारा है। यदि हम स्वदेशी उत्पादों को अपनाते हैं तो देश की अर्थव्यवस्था सुदृढ़ होती है और रोजगार के नए अवसर सृजित होते हैं। वहीं विशिष्ट अतिथि कपिल मलैया ने कहा कि स्वदेशी जागरण मंच का उद्देश्य गांव-गांव तक स्वदेशी का संदेश पहुंचाना और लोगों को विदेशी वस्तुओं पर निर्भरता कम करने के लिए प्रेरित करना है।
मेले की सांस्कृतिक प्रभारी सुष्मिता ठाकुर ने बताया कि दूसरे दिन सांस्कृतिक कार्यक्रमों की विशेष श्रृंखला आयोजित की गई, जिसमें महिला आत्म-सुरक्षा पर आधारित प्रस्तुति, रामायण पर सांस्कृतिक कार्यक्रम, राजस्थानी लोकनृत्य, गायन और तबला वादन ने दर्शकों का मन मोह लिया। सांस्कृतिक मंच पर प्रस्तुत इन कार्यक्रमों को देखने बड़ी संख्या में लोग जुटे और कलाकारों की सराहना की।

मेला संयोजिका दीप्ति चंदेरिया ने जानकारी देते हुए बताया कि मेले में जयपुरी ज्वेलरी, बैग, पारंपरिक परिधान, घरेलू उपयोग की सामग्री, हस्तशिल्प एवं हथकरघा से निर्मित उत्पाद प्रमुख आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं। देश के विभिन्न राज्यों से आए कारीगर अपने-अपने स्टॉल के माध्यम से स्थानीय कला और संस्कृति को प्रदर्शित कर रहे हैं, जिससे मेले को अखिल भारतीय स्वरूप मिला है।
महाकौशल प्रांत के विभाग संपर्क प्रमुख राजकुमार नामदेव ने कहा कि स्वदेशी और विदेशी दैनिक उपयोग की वस्तुओं के अंतर को जन-जन तक पहुंचाना समय की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि यदि टोली के सदस्य विभिन्न माध्यमों से स्वदेशी वस्तुओं के लाभों की जानकारी लोगों तक पहुंचाएं, तो निश्चित रूप से स्वदेशी को व्यापक समर्थन मिलेगा।
वहीं प्रांत संयोजक नितिन पटैरिया ने बताया कि मेले में गौ माता के गोबर से बने पर्यावरण-अनुकूल उत्पाद, हथकरघा से निर्मित वस्त्र और स्थानीय स्टार्टअप्स के स्टॉल भी लगाए गए हैं। युवा उद्यमियों को अपने उत्पाद प्रदर्शित करने और नए अवसर प्राप्त करने का मंच मिल रहा है, जिससे आत्मनिर्भर भारत की दिशा में एक सकारात्मक पहल हो रही है।
जिला संयोजक सौरभ रांधेलिया, मीडिया प्रभारी अखिलेश समैया और विभाग प्रशिक्षक रविन्द्र ठाकुर ने संयुक्त रूप से कहा कि स्वदेशी वस्तुएं गुणवत्ता, टिकाऊपन और उपयोगिता के मामले में किसी भी तरह से विदेशी उत्पादों से कम नहीं हैं। उन्होंने कहा कि इस तरह के मेलों के माध्यम से लोगों में स्वदेशी के प्रति विश्वास और जागरूकता बढ़ती है।
कुल मिलाकर, पीटीसी मैदान में चल रहा स्वदेशी मेला न केवल खरीदारी का केंद्र बना हुआ है, बल्कि यह सांस्कृतिक, सामाजिक और आर्थिक चेतना का भी सशक्त माध्यम बनकर उभर रहा है। आगामी दिनों में मेले में और भी आकर्षक कार्यक्रमों व गतिविधियों के आयोजन की योजना है, जिससे लोगों की भागीदारी और बढ़ने की उम्मीद है।