बीना। सागर जिले के बीना नगर में आयोजित तीन दिवसीय हिंदू किन्नर सम्मेलन का बुधवार रात भव्य और धार्मिक वातावरण के बीच समापन हो गया। सम्मेलन के अंतिम दिन शहर के प्रमुख मार्गों से विशाल शोभायात्रा निकाली गई, जिसमें देश के विभिन्न हिस्सों से आए किन्नर समाज के प्रतिनिधियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। शोभायात्रा का समापन नगर के प्रसिद्ध कटरा स्वामी मंदिर में घंटा अर्पित कर किया गया।
जुलूस के दौरान बीना शहर धार्मिक रंग में रंगा नजर आया। सड़कों पर बड़ी संख्या में नागरिक इस अनूठी शोभायात्रा को देखने के लिए उमड़ पड़े। जगह-जगह लोगों ने जुलूस का स्वागत किया और धार्मिक आयोजनों के प्रति अपनी आस्था व्यक्त की।

जानकारी के अनुसार शोभायात्रा खुरई रोड स्थित एक निजी गार्डन से प्रारंभ हुई। यहां से जुलूस ओवरब्रिज, सर्वोदय चौराहा, अंबेडकर तिराहा सहित शहर के विभिन्न प्रमुख मार्गों से होकर गुजरा। अंत में यह यात्रा कटरा स्वामी मंदिर पहुंची, जहां धार्मिक विधि-विधान के साथ घंटा चढ़ाने की रस्म पूरी की गई।
शोभायात्रा में शामिल किन्नर समाज के सदस्य आकर्षक पारंपरिक परिधानों में नजर आए। कई किन्नर रथों और सुसज्जित वाहनों में सवार होकर यात्रा में शामिल हुए। डीजे पर बज रहे भक्ति गीतों और धार्मिक संगीत की धुनों पर किन्नर समाज के लोग नृत्य करते हुए आगे बढ़ते रहे। पूरे मार्ग में उत्सव जैसा माहौल बना रहा।

जुलूस के दौरान सड़कों के दोनों ओर बड़ी संख्या में नागरिक मौजूद रहे। महिलाओं, युवाओं और बच्चों ने विशेष उत्साह के साथ इस आयोजन को देखा। कई लोगों ने अपने मोबाइल फोन में शोभायात्रा की तस्वीरें और वीडियो भी रिकॉर्ड किए।
आयोजन की विशालता को देखते हुए प्रशासन और पुलिस विभाग द्वारा सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए गए थे। यातायात व्यवस्था प्रभावित न हो, इसके लिए प्रमुख चौराहों और मार्गों पर पुलिस बल तैनात किया गया था। पुलिस अधिकारियों ने लगातार निगरानी रखकर जुलूस को शांतिपूर्ण और व्यवस्थित तरीके से संपन्न कराया।
सम्मेलन के आयोजकों ने बताया कि तीन दिनों तक चले इस धार्मिक आयोजन में अनेक आध्यात्मिक और सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए गए। कार्यक्रम के दौरान हवन, पूजन, सत्संग, भजन-कीर्तन और धार्मिक प्रवचनों का आयोजन किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भाग लिया।
आयोजकों के अनुसार सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य सनातन धर्म की परंपराओं का प्रचार-प्रसार करना तथा किन्नर समाज को सामाजिक और धार्मिक मुख्यधारा से जोड़ना था। उनका कहना था कि किन्नर समाज भारतीय संस्कृति और परंपरा का अभिन्न हिस्सा है तथा समाज में उनकी भूमिका को सम्मान और पहचान मिलनी चाहिए।
सम्मेलन में शामिल किन्नर संतों और धार्मिक वक्ताओं ने भी सनातन संस्कृति में किन्नर समाज के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि भारतीय धार्मिक ग्रंथों और परंपराओं में किन्नरों का विशेष स्थान रहा है। रामायण और महाभारत सहित अनेक धार्मिक कथाओं में किन्नर समाज की भूमिका का उल्लेख मिलता है।

वक्ताओं ने कहा कि ऐसे आयोजन समाज में समरसता, समानता और आपसी सम्मान की भावना को मजबूत करते हैं। साथ ही धार्मिक और सांस्कृतिक मूल्यों को नई पीढ़ी तक पहुंचाने में भी सहायक सिद्ध होते हैं।
तीन दिवसीय सम्मेलन के दौरान विभिन्न राज्यों से आए किन्नर प्रतिनिधियों को एक मंच पर अपने विचार साझा करने का अवसर भी मिला। इस दौरान सामाजिक मुद्दों, धार्मिक सहभागिता और समुदाय के उत्थान से जुड़े विषयों पर चर्चा की गई।
समापन समारोह के अवसर पर आयोजकों ने कार्यक्रम को सफल बनाने में सहयोग देने वाले प्रशासनिक अधिकारियों, सामाजिक कार्यकर्ताओं, धार्मिक संस्थाओं और स्थानीय नागरिकों का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि बीना की जनता ने जिस आत्मीयता और सम्मान के साथ किन्नर समाज का स्वागत किया, वह सदैव स्मरणीय रहेगा।
स्थानीय नागरिकों ने भी इस आयोजन को सकारात्मक पहल बताया। उनका कहना था कि इस प्रकार के कार्यक्रम सामाजिक सौहार्द को बढ़ावा देते हैं और विभिन्न वर्गों के बीच संवाद तथा सम्मान की भावना को मजबूत करते हैं।
कटरा स्वामी मंदिर में धार्मिक अनुष्ठान के साथ संपन्न हुए इस सम्मेलन ने न केवल धार्मिक चेतना का संदेश दिया, बल्कि समाज में समावेशिता और समानता की भावना को भी मजबूती प्रदान की। बीना में आयोजित यह तीन दिवसीय हिंदू किन्नर सम्मेलन धार्मिक, सामाजिक और सांस्कृतिक दृष्टि से एक महत्वपूर्ण आयोजन के रूप में याद किया जाएगा।