सागर, 15 अप्रैल 2026। मध्यप्रदेश में रबी विपणन वर्ष 2026-27 के तहत गेहूँ उपार्जन की प्रक्रिया ने रफ्तार पकड़ ली है। खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री गोविंद सिंह राजपूत ने जानकारी देते हुए बताया कि प्रदेश के सभी संभागों में न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर गेहूँ खरीदी का कार्य शुरू हो चुका है और अब तक हजारों किसानों को इसका सीधा लाभ मिल चुका है।
मंत्री श्री राजपूत के अनुसार, अब तक 42 हजार 689 किसानों से कुल 18 लाख 97 हजार 480 क्विंटल गेहूँ का उपार्जन किया जा चुका है। इस खरीदी के एवज में किसानों के खातों में 28 करोड़ 40 लाख रुपए की राशि सीधे हस्तांतरित की जा चुकी है। सरकार द्वारा की जा रही यह व्यवस्था किसानों को पारदर्शी और त्वरित भुगतान सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।
उन्होंने बताया कि गेहूँ विक्रय के लिए किसानों में उत्साह देखा जा रहा है। अब तक 2 लाख 58 हजार 644 किसानों द्वारा 1 करोड़ 13 लाख 95 हजार 407 क्विंटल गेहूँ बेचने के लिए स्लॉट बुक किए जा चुके हैं। किसान 24 अप्रैल 2026 तक स्लॉट बुक कर सकते हैं, जिससे उन्हें अपनी उपज बेचने में किसी प्रकार की असुविधा न हो।

प्रदेशभर में गेहूँ खरीदी के लिए 3171 उपार्जन केंद्र स्थापित किए गए हैं, जहां कार्यालयीन दिवसों में नियमित रूप से खरीदी की जा रही है। इन केंद्रों पर किसानों के लिए सभी आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराई गई हैं, जिससे उन्हें किसी प्रकार की परेशानी का सामना न करना पड़े।
मंत्री श्री राजपूत ने बताया कि जिन जिलों में उपार्जन कार्य प्रारंभ हो चुका है, वहां केंद्रों पर छायादार बैठने की व्यवस्था, स्वच्छ पेयजल, बारदाने, तौल कांटे, सिलाई मशीन, कंप्यूटर, इंटरनेट और गुणवत्ता परीक्षण उपकरण उपलब्ध कराए गए हैं। इसके साथ ही उपज की सफाई के लिए पंखे और छनने जैसी व्यवस्थाएं भी सुनिश्चित की गई हैं। इन सुविधाओं का उद्देश्य किसानों को एक सहज और व्यवस्थित वातावरण प्रदान करना है।
रबी विपणन वर्ष 2026-27 के लिए गेहूँ का समर्थन मूल्य 2585 रुपए प्रति क्विंटल निर्धारित किया गया है, जिसमें राज्य सरकार द्वारा 40 रुपए प्रति क्विंटल बोनस जोड़कर किसानों को कुल 2625 रुपए प्रति क्विंटल का भुगतान किया जा रहा है। यह मूल्य किसानों के हितों को ध्यान में रखते हुए तय किया गया है, जिससे उन्हें उनकी उपज का उचित मूल्य मिल सके।

गेहूँ के सुरक्षित भंडारण के लिए भी व्यापक व्यवस्थाएं की गई हैं। उपार्जित गेहूँ को जूट के बारदानों के साथ-साथ पीपी और एचडीपी बैग में संग्रहित किया जा रहा है। इसके अलावा, अब तक 8 लाख 65 हजार 600 क्विंटल गेहूँ का परिवहन भी किया जा चुका है, जिससे भंडारण व्यवस्था सुचारू रूप से संचालित हो सके।
मंत्री श्री राजपूत ने यह भी बताया कि इस वर्ष गेहूँ उपार्जन के लिए रिकॉर्ड 19 लाख 4 हजार किसानों ने पंजीयन कराया है, जो पिछले वर्ष की तुलना में 3 लाख 60 हजार अधिक है। यह वृद्धि इस बात का संकेत है कि किसान सरकार की नीतियों और समर्थन मूल्य व्यवस्था पर भरोसा जता रहे हैं।

विगत वर्ष प्रदेश में लगभग 77 लाख मीट्रिक टन गेहूँ का उपार्जन किया गया था। इस वर्ष सरकार ने विपरीत परिस्थितियों के बावजूद 78 लाख मीट्रिक टन गेहूँ उपार्जन का लक्ष्य निर्धारित किया है, जो पिछले वर्ष से एक लाख मीट्रिक टन अधिक है। सरकार का उद्देश्य है कि अधिक से अधिक किसानों को लाभ पहुंचाया जाए और कृषि क्षेत्र को सशक्त बनाया जाए।
समग्र रूप से देखा जाए तो प्रदेश में गेहूँ उपार्जन की प्रक्रिया सुव्यवस्थित तरीके से संचालित हो रही है। किसानों को बेहतर सुविधाएं, समय पर भुगतान और उचित समर्थन मूल्य प्रदान कर सरकार उनकी आर्थिक स्थिति को मजबूत करने की दिशा में लगातार प्रयास कर रही है।