ग्वालियर जिले के डबरा में 49 लाख रुपए की कथित लूट का मामला पुलिस जांच में पूरी तरह पलट गया। जिस गर्भवती महिला को शुरुआत में पीड़ित माना जा रहा था, वही इस हाई-प्रोफाइल लूटकांड की मास्टरमाइंड निकली। पुलिस ने महज दो दिनों की जांच में पूरे मामले का खुलासा करते हुए लगभग 50 लाख रुपए का माल बरामद कर लिया है। इस साजिश में महिला ने अपने पति और उसके दोस्तों के साथ मिलकर ननद के घर में लूट की झूठी कहानी रची थी।
मामला डबरा के संस्कृति नगर स्थित सचदेवा फार्म क्षेत्र का है। यहां रहने वाली मोनिका उर्फ रानू श्रीवास्तव ने 4 जून को डबरा सिटी थाने में शिकायत दर्ज कराई थी कि जब वह अपने बच्चों के साथ काम पर गई हुई थी, तब घर में मौजूद उसकी पांच माह की गर्भवती भाभी पिंकी श्रीवास्तव को दो अज्ञात बदमाशों ने बंधक बना लिया। आरोप था कि बदमाशों ने मारपीट कर अलमारी का लॉक तोड़ा और करीब 2.50 लाख रुपए नकद तथा लगभग 46 लाख रुपए के सोने-चांदी के जेवरात लूटकर फरार हो गए।
घटना की गंभीरता को देखते हुए पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया। वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक धर्मवीर सिंह के निर्देश पर डबरा पुलिस और क्राइम ब्रांच की संयुक्त टीम गठित की गई तथा आरोपियों पर 10 हजार रुपए का इनाम भी घोषित किया गया। शुरुआती तौर पर मामला एक बड़ी लूट का प्रतीत हो रहा था, लेकिन जांच के दौरान कई ऐसे तथ्य सामने आए जिन्होंने पुलिस को संदेह करने पर मजबूर कर दिया।

पुलिस ने घटनास्थल के आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली। फुटेज में दो कथित बदमाश घर में प्रवेश करते दिखाई दिए, लेकिन उनकी गतिविधियां अस्वाभाविक लग रही थीं। जांच अधिकारियों को लगा कि दोनों कैमरे के सामने जानबूझकर अपनी मौजूदगी दर्ज करा रहे हैं। उनकी हरकतों में बनावटीपन साफ नजर आ रहा था। यही पुलिस के लिए पहला बड़ा सुराग साबित हुआ।
तकनीकी जांच और पूछताछ के बाद खुलासा हुआ कि सीसीटीवी में दिखाई देने वाला एक आरोपी कोई और नहीं बल्कि फरियादी महिला मोनिका का सगा भाई शुभम श्रीवास्तव था। वहीं घर में बंधक बनाई गई गर्भवती महिला पिंकी उसकी पत्नी थी। इसके बाद पुलिस ने जब दोनों को हिरासत में लेकर पूछताछ की तो पूरा षड्यंत्र सामने आ गया।
पूछताछ में शुभम ने बताया कि उसने पिंकी जाटव से प्रेम विवाह किया था। दोनों बाहर नौकरी करते थे, लेकिन आर्थिक तंगी का सामना कर रहे थे। पिंकी गर्भवती होने के कारण पिछले तीन महीने से वे डबरा में शुभम की बहन मोनिका के घर रह रहे थे। इसी दौरान लगभग 15 दिन पहले पिंकी ने मोनिका को अलमारी में बड़ी मात्रा में नकदी और कीमती जेवर रखते हुए देखा। करोड़ों जैसी दिखने वाली इस संपत्ति को देखकर दोनों की नीयत खराब हो गई और उन्होंने इसे हड़पने की योजना बनानी शुरू कर दी।

पुलिस के अनुसार आरोपियों ने कई दिनों तक टीवी पर क्राइम आधारित कार्यक्रम देखकर योजना तैयार की। उन्होंने तय किया कि घटना को वास्तविक लूट जैसा दिखाया जाएगा ताकि किसी को उन पर शक न हो। योजना के तहत 4 जून को जब मोनिका घर से बाहर गई, तब पिंकी ने खुद घर का दरवाजा खोला। इसके बाद शुभम और उसका साथी सोनू जाटव घर में दाखिल हुए। उन्होंने लोहे की रॉड से अलमारी का लॉक तोड़ा और नकदी तथा जेवरात निकाल लिए।
घटना को विश्वसनीय बनाने के लिए आरोपियों ने विशेष तैयारी की थी। कमरे में रखी ड्रेसिंग टेबल का कांच तोड़ा गया और उसी के टुकड़े से गर्भवती पिंकी के माथे पर हल्की चोट पहुंचाई गई। बाद में उसके हाथ-पैर बांध दिए गए ताकि वह लूट की शिकार दिखाई दे। पुलिस के अनुसार आरोपियों ने यहां तक योजना बनाई थी कि यदि किसी ने उन्हें रंगे हाथ पकड़ लिया तो वे गंभीर वारदात करने से भी पीछे नहीं हटते।
वारदात के बाद लूटे गए माल का बंटवारा भी किया गया। शुभम ने एक लाख रुपए अपनी पत्नी पिंकी को दिए, जिन्हें उसने घर में छिपा दिया। डेढ़ लाख रुपए उसके साथी सोनू जाटव को मिले। जबकि करीब 46 लाख रुपए के जेवरातों से भरा बैग तीसरे साथी आसिफ खान के पास ग्वालियर के तारागंज क्षेत्र में छिपाया गया था।

पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए आरोपियों की निशानदेही पर नकदी और जेवरात बरामद कर लिए। एसएसपी धर्मवीर सिंह ने बताया कि यह एक सुनियोजित फर्जी लूटकांड था, जिसमें परिवार के ही लोगों ने लालच में आकर अपराध को अंजाम दिया। मामले में शामिल सभी आरोपियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जा रही है।
इस सनसनीखेज खुलासे ने न केवल पुलिस की जांच क्षमता को साबित किया, बल्कि यह भी दिखाया कि लालच किस तरह रिश्तों को तार-तार कर सकता है। जिस घर में भरोसे के साथ भाई-भाभी को आश्रय मिला था, वहीं उन्होंने करोड़ों की संपत्ति पर नजर रखकर अपने ही परिवार के खिलाफ साजिश रच डाली। पुलिस अब मामले के सभी पहलुओं की जांच कर रही है और आरोपियों को न्यायालय में पेश करने की तैयारी की जा रही है।