मध्य प्रदेश और राजस्थान के नेता प्रतिपक्षों ने दिल्ली में एक संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस कर जहरीले कफ सिरप से बच्चों की मौतों को लेकर सरकार पर सवाल उठाए। प्रेस कॉन्फ्रेंस में मध्य प्रदेश के नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार और परासिया विधायक सोहन लाल बाल्मीकि के साथ राजस्थान के नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली भी मौजूद रहे।
सिंघार ने डिप्टी सीएम पर सवाल उठाए
उमंग सिंघार ने कहा कि कफ सिरप पीने के कारण 19 बच्चों की मौत हो चुकी है। परासिया से विधायक सोहन बाल्मीकि ने पहले बच्चों की मौत के बाद कलेक्टर, मुख्यमंत्री और स्वास्थ्य मंत्री को पत्र लिखकर इस मुद्दे पर ध्यान दिलाया, धरना प्रदर्शन किए, लेकिन सरकार ने कोई कार्रवाई नहीं की। सिंघार ने इसे सरकारी भ्रष्टाचार और कमीशन का मामला करार दिया और कहा कि न्यायिक जांच होनी चाहिए।

बाल्मीकि ने सरकार पर हमला बोला
सोहन लाल बाल्मीकि ने कहा कि मध्य प्रदेश सरकार छोटे मामलों में घर तोड़ती है, लेकिन बच्चों की मौतों पर कोई ठोस कदम नहीं उठा रही। उन्होंने सीधे तौर पर उपमुख्यमंत्री और स्वास्थ्य मंत्री राजेंद्र शुक्ल को जिम्मेदार ठहराया और सवाल उठाया कि क्या उनके घर पर बुलडोजर चलाया जाएगा। उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री ने बच्चों के परिवारों से मुलाकात की, लेकिन कोई राहत देने की बात नहीं कही।
ICMR की टीम ने लिया सैंपल, एक महीने बाद भी रिजल्ट नहीं आया
बाल्मीकि और सिंघार ने बताया कि आईसीएमआर की टीम दिल्ली से सैंपल लेकर गई थी, लेकिन एक महीने बाद भी उसका परिणाम नहीं आया। यदि समय पर कार्रवाई होती, तो निश्चित रूप से मौतें रोकी जा सकती थीं।

सरकार की उदासीनता पर कड़ी टिप्पणी
सिंघार ने कहा कि नियम के अनुसार, बच्चों की मौत की घटनाओं में 72 घंटे के भीतर टेस्ट कराना जरूरी होता है। लेकिन सरकार ने ऐसा नहीं किया। मामले की संवेदनहीनता दिखाते हुए उन्होंने कहा कि एक परिवार की मृत बच्ची योगिता ठाकरे का शव पोस्टमॉर्टम के लिए कब्र से निकाला गया।
डिप्टी सीएम के बयान पर भी सवाल
सिंघार ने उपमुख्यमंत्री और स्वास्थ्य मंत्री के तमिलनाडु की कफ सिरप कंपनी को क्लीन चिट देने और मौतों को नकारने वाले बयान पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि रीवा जिला इस जहरीले सिरप का सबसे बड़ा नशे का अड्डा बन गया है और स्थानीय प्रशासन इसे रोकने में नाकाम रहा।

सरकार की वित्तीय राहत पर आपत्ति
सिंघार ने कहा कि सरकार 4 लाख रुपए की राहत देने की योजना बना रही है, जबकि गरीब परिवारों ने अपने बच्चों के इलाज में लाखों रुपए खर्च किए हैं। उन्होंने मांग की कि इलाज में हुए वास्तविक खर्च की राशि परिवारों को दी जाए और प्रभावित परिवारों के एक सदस्य को नौकरी दी जाए।
ब्यूरो रिपोर्ट रिपब्लिक सागर मीडिया !
संवाददाता – अर्पित सेन
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