प्राकृतिक कृषि विषय पर कृषक संगोष्ठी का आयोजन !

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भारत सरकार के प्राकृतिक कृषि मिशन के अंतर्गत, कलेक्टर श्री संदीप जी.आर. के मार्गदर्शन में कृषक संगोष्ठी का आयोजन आज ग्राम मुहासा में किया गया। इस कार्यक्रम का आयोजन किसान कल्याण एवं कृषि विकास विभाग तथा आत्मा परियोजना (ATMA) के संयुक्त तत्वावधान में हुआ। संगोष्ठी में क्षेत्र के 150 से अधिक प्रगतिशील कृषक शामिल हुए।

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि विधायक पं. ब्रिज बिहारी पटैरिया थे, जिन्होंने किसानों से प्राकृतिक और जैविक खेती को अपनाने का आग्रह करते हुए कहा कि —

“प्राकृतिक खेती न केवल मिट्टी की उर्वरता बढ़ाती है, बल्कि यह किसान की लागत घटाकर उसकी आमदनी बढ़ाने का माध्यम भी है। रासायनिक खादों और कीटनाशकों के अत्यधिक उपयोग से भूमि की गुणवत्ता प्रभावित होती है। इसलिए हमें प्रकृति के अनुरूप खेती की ओर लौटना होगा।”


कलेक्टर के मार्गदर्शन में आत्मा परियोजना द्वारा संचालित पहल

कलेक्टर श्री संदीप जी.आर. के निर्देशानुसार आत्मा परियोजना द्वारा जिलेभर में किसानों के बीच प्राकृतिक कृषि के प्रति जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है। इसी क्रम में ग्राम मुहासा में यह संगोष्ठी आयोजित की गई, ताकि किसान व्यवहारिक तौर पर प्राकृतिक खेती की विधियों को समझ सकें।


विशेषज्ञों ने दी तकनीकी जानकारी

कार्यक्रम की शुरुआत में श्री एम.के. प्रजापति, परियोजना संचालक (आत्मा), ने प्राकृतिक कृषि मिशन के उद्देश्य एवं इसके लाभों पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि प्राकृतिक कृषि न केवल उत्पादन का एक तरीका है बल्कि यह जल, मिट्टी और पर्यावरण संरक्षण का माध्यम भी है।

डॉ. आशीष त्रिपाठी ने किसानों को प्राकृतिक कृषि की विभिन्न तकनीकों से अवगत कराया। उन्होंने बताया कि —

  • जीवामृत और घनजीवामृत मिट्टी के सूक्ष्मजीवों को सक्रिय करते हैं, जिससे फसल की वृद्धि स्वाभाविक रूप से होती है।
  • हरी खाद की फसलें मिट्टी की उर्वरता बढ़ाने का सबसे सरल तरीका हैं।
  • निमस्त्र और दशपरनी अर्क जैसे जैविक कीटनाशक रासायनिक दवाओं का बेहतर विकल्प हैं।
    उन्होंने कहा कि कम जुताई, फसल चक्र, और प्राकृतिक संसाधनों का संतुलित उपयोग ही स्थायी कृषि का आधार है।

विधायक पटैरिया ने साझा किए अनुभव

मुख्य अतिथि विधायक पं. ब्रिज बिहारी पटैरिया ने अपने संबोधन में किसानों को प्रेरित करते हुए कहा कि खेतों में संतुलित खाद का उपयोग करें और खाद एवं बीज के लिए दो पेटी वाले सीड ड्रिल का प्रयोग अनिवार्य रूप से करें। उन्होंने किसानों से आग्रह किया कि —

“बीज की अच्छी किस्में, जैविक खाद और समय पर सिंचाई से न केवल उपज बढ़ेगी बल्कि लागत घटेगी। खेती को लाभ का धंधा बनाने का सबसे सही तरीका यही है कि हम प्रकृति से जुड़ें।”


स्थानीय जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों की सक्रिय भागीदारी

संगोष्ठी में मंडल अध्यक्ष श्री रामलखन सिंह, जनपद सदस्य श्री मदन घोसी, सरपंच श्री दुबे जी, उद्यानिकी अधिकारी श्री परिहार, तथा आत्मा परियोजना के अधिकारीगण उपस्थित रहे। सभी ने अपने-अपने क्षेत्र के अनुभव साझा करते हुए किसानों को प्राकृतिक कृषि अपनाने की दिशा में कदम बढ़ाने की प्रेरणा दी।


किसानों की बढ़ती रुचि और भविष्य की योजना

संगोष्ठी में शामिल किसानों ने जीवामृत निर्माण, फसल अवशेष प्रबंधन और जैविक बीज उपचार के बारे में व्यवहारिक प्रशिक्षण प्राप्त किया। कई किसानों ने यह भी आश्वासन दिया कि वे आगामी रबी सीजन में अपनी कुछ भूमि पर प्राकृतिक कृषि का प्रयोग करेंगे।

आत्मा परियोजना के अधिकारियों ने बताया कि आगामी समय में जिले के विभिन्न ग्रामों में प्राकृतिक कृषि प्रदर्शन प्लॉट स्थापित किए जाएंगे, ताकि अधिक से अधिक किसान इसे प्रत्यक्ष रूप से देख सकें और अपनाएं।

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