आधुनिक चिकित्सा और वैज्ञानिक दृष्टिकोण पर हुई चर्चा !

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सागर। 17 अक्टूबर 2025 को विश्व एनेस्थीसिया दिवस के अवसर पर इंडियन सोसायटी ऑफ एनेस्थीसियोलॉजी, सागर शाखा द्वारा सिविल लाइंस स्थित एक होटल में विशेष कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम की शुरुआत डॉ. सर्वेश जैन के व्याख्यान से हुई, जिसमें उन्होंने एनेस्थीसिया के विकास और ऐतिहासिक घटनाओं पर प्रकाश डाला।

डॉ. जैन ने बताया कि 16 अक्टूबर 1846 से पहले ऑपरेशन अत्यंत पीड़ादायक एवं अमानवीय अनुभव हुआ करते थे। उस समय मरीज दर्द से कराहते थे और सर्जरी के दौरान मृत्यु दर एवं संक्रमण दर अधिक थी। प्राचीन ब्रिटेन और अमेरिका में सर्जनों का कार्य अक्सर नाई (बार्बर) किया करते थे। 1846 में अमेरिका के मैसाचुसेट्स जनरल हॉस्पिटल में दंत चिकित्सक डॉ. विलियम मॉर्टन ने पहली बार ईथर गैस का प्रयोग कर मरीज को बेहोश किया, जिससे सर्जरी बिना दर्द के सफल हुई। यही दिन आधुनिक एनेस्थीसिया की जन्मतिथि के रूप में इतिहास में दर्ज हुआ।

इस अवसर पर सोसायटी की अध्यक्ष डॉ. शशिबाला चौधरी, सचिव डॉ. अजय सिंह और कोषाध्यक्ष डॉ. मनोज साहू को हाल ही में आयोजित राज्य स्तरीय सम्मेलन में “बेस्ट सिटी ब्रांच” पुरस्कार प्राप्त करने पर सम्मानित किया गया।

कार्यक्रम में भारत में वैज्ञानिक दृष्टिकोण (Scientific Temperament) की कमी पर भी चर्चा हुई। वक्ताओं ने कहा कि अधिकांश नवाचार विदेशों में हो रहे हैं, जबकि भारत में समाज अभी भी जाति और धर्म जैसे सामाजिक विषयों में उलझा हुआ है।

कार्यक्रम में इमरजेंसी मेडिसिन विभाग के प्रमुख डॉ. सत्येंद्र उइके, जिला चिकित्सालय से डॉ. प्रीति तिवारी, डॉ. अंशुल नेमा और डॉ. गौरव सेन उपस्थित रहे। इसके अलावा प्राइवेट प्रैक्टिशनर डॉ. कविता साहू और डॉ. स्वाति जैन की उपस्थिति विशेष रूप से उल्लेखनीय रही। कार्यक्रम ने आधुनिक चिकित्सा, एनेस्थीसिया और वैज्ञानिक चेतना को बढ़ावा देने का संदेश दिया।

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