सागर जिले की रीना साहू आज आत्मविश्वास और खुशी से भरी हैं। उनके चेहरे पर वह सच्ची मुस्कान है जो किसी माँ की तब झलकती है जब उसके बच्चों के सपनों को पंख मिलते हैं। रीना कहती हैं — “लाड़ली बहना योजना ने मेरी ज़िंदगी आसान बना दी। पहले ₹1250 से घर के खर्च और बच्चों की पढ़ाई चलती थी, अब ₹1500 मिलने से मैं बच्चों की कोचिंग फीस भी भर पाऊंगी।”

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव द्वारा “लाड़ली बहना योजना” की राशि ₹1250 से बढ़ाकर ₹1500 किए जाने के बाद रीना जैसी हजारों महिलाओं के जीवन में एक नई उम्मीद जगी है। यह योजना न केवल महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बना रही है, बल्कि उन्हें आत्मनिर्भरता और आत्मसम्मान का भाव भी दे रही है।
रीना बताती हैं कि इस योजना से पहले घर के छोटे-मोटे खर्च पूरे करना भी मुश्किल होता था। बच्चों की पढ़ाई के लिए कॉपी, किताबें, पेन और पेंसिल खरीदने में सोच-समझकर पैसे खर्च करने पड़ते थे। लेकिन अब इस योजना से उन्हें राहत मिली है। वह कहती हैं, “अब मेरे बच्चे भी अच्छी शिक्षा पा सकेंगे और आगे बढ़ सकेंगे। मुझे गर्व है कि मैं मुख्यमंत्री जी की इस योजना की लाभार्थी हूं।”
रीना की यह कहानी उन हजारों महिलाओं की आवाज़ है जो आज लाड़ली बहना योजना के माध्यम से अपने परिवार की आर्थिक स्थिति सुधार रही हैं। यह केवल आर्थिक सहायता नहीं, बल्कि महिलाओं के आत्मविश्वास और सम्मान को बढ़ाने का अभियान बन चुकी है।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने इस योजना के माध्यम से समाज के उस वर्ग को सशक्त करने की दिशा में ठोस कदम उठाया है, जो वर्षों से आर्थिक सीमाओं के कारण पिछड़ा हुआ था। रीना जैसी महिलाएं अब न केवल घर संभाल रही हैं बल्कि अपने बच्चों के भविष्य को भी नई दिशा दे रही हैं।
रीना कहती हैं, “मुख्यमंत्री जी ने हमारे जीवन में रोशनी लाई है। आज मैं अपने बच्चों के भविष्य को लेकर निश्चिंत हूं। लाड़ली बहना योजना ने हमें आत्मनिर्भर बनने की राह दिखाई है।”