शासकीय कला एवं वाणिज्य महाविद्यालय में महान गणितज्ञ श्रीनिवास रामानुजन के जन्मदिवस के अवसर पर राष्ट्रीय गणित दिवस के रूप में एक विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया गया। यह आयोजन 4 दिवसीय श्रृंखलाबद्ध कार्यक्रमों के तहत किया जा रहा है। महाविद्यालय की प्राचार्य डॉ. सरोज गुप्ता की अध्यक्षता में कार्यक्रम की शुरुआत हुई, जिसमें गणित के महत्व और श्रीनिवास रामानुजन के योगदान पर प्रकाश डाला गया। इस अवसर पर प्रमुख अतिथि के रूप में डॉ. रेनू बाला शर्मा, विषय विशेषज्ञ एल. एल. श्रीवास्तव, और विशिष्ट अतिथि विधायक प्रतिनिधि प्रासुक जैन ने अपने विचार व्यक्त किए।

कार्यक्रम का शुभारंभ और प्रमुख अतिथियों का स्वागत:
कार्यक्रम की शुरुआत सरस्वती वंदना से हुई, इसके बाद मुख्य अतिथि डॉ. रेनू बाला शर्मा और अन्य अतिथियों का स्वागत एवं सम्मान किया गया। इस अवसर पर 100 विद्यार्थियों ने पोस्टर निर्माण कर एक पोस्टर प्रदर्शनी का आयोजन किया, जिसमें गणित के विभिन्न पहलुओं और श्रीनिवास रामानुजन के कार्यों को प्रदर्शित किया गया।
गणित की महत्ता पर प्रमुख अतिथियों के विचार:
मुख्य अतिथि डॉ. रेनू बाला शर्मा ने गणित के महत्व पर बात करते हुए कहा कि जैसे मोर की शिखा और नागों में मणि का स्थान सबसे ऊपर है, वैसे ही वेदांग और शास्त्रों में गणित का स्थान सर्वोपरि है। उन्होंने विद्यार्थियों से गणित को एक शास्त्र के रूप में समझने की अपील की और कहा कि गणित हमारे जीवन का अभिन्न हिस्सा है, जिसे हम हर क्षेत्र में उपयोग करते हैं।
वहीं, विषय विशेषज्ञ एल. एल. श्रीवास्तव ने अपने व्याख्यान में गणितीय योगदान पर चर्चा की। उन्होंने श्रीनिवास रामानुजन के अद्वितीय योगदान को रेखांकित किया, जिसमें शून्य की महत्ता, अनंत श्रृंखलाओं और संख्या सिद्धांत के क्षेत्र में किए गए उनके अभूतपूर्व कार्य शामिल थे। श्रीवास्तव ने बताया कि रामानुजन ने जीवनभर 3,884 गणितीय प्रमेयों का प्रतिपादन किया और गणित के अनेक क्षेत्रों में मौलिक परिणाम निकाले, जिनका प्रभाव आज भी मौजूद है। उनका सबसे बड़ा योगदान रामानुजन संख्या 1729 को माना जाता है, जिसे वे “आश्चर्यजनक संख्या” के रूप में पहचानते थे।

गणित के दैनिक जीवन में उपयोग पर चर्चा:
विशिष्ट अतिथि विधायक प्रतिनिधि प्रासुक जैन ने अपने संबोधन में गणित के दैनिक जीवन में उपयोग को लेकर बात की। उन्होंने बताया कि गणित केवल एक शास्त्र नहीं है, बल्कि यह हमारे रोजमर्रा के जीवन में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। चाहे वह वित्तीय गणना हो, तकनीकी विकास हो या दैनिक जीवन की समस्याओं का समाधान हो, गणित सभी क्षेत्रों में लागू होता है।
प्राचार्य का भाषण और कार्यक्रम की सफलता:
कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रही प्राचार्य डॉ. सरोज गुप्ता ने गणित को सभी संकायों में सबसे श्रेष्ठ विषय बताया और इस दिन को गणितज्ञों के योगदान को सम्मानित करने का अवसर बताया। उन्होंने गणित विभाग और विद्यार्थियों के योगदान की सराहना करते हुए कार्यक्रम के सफल आयोजन में उनके समर्पण को मान्यता दी। डॉ. गुप्ता ने कहा कि गणित का अध्ययन न केवल सोचने की क्षमता को बढ़ाता है, बल्कि यह जीवन के विभिन्न पहलुओं को समझने में भी मदद करता है।
श्रीनिवास रामानुजन के जीवन पर प्रकाश:
कार्यक्रम के दौरान गणित विभाग की विभागाध्यक्ष डॉ. मधु स्थापक ने श्रीनिवास रामानुजन के जीवन पर संक्षिप्त विवरण प्रस्तुत किया। उन्होंने बताया कि रामानुजन ने अपने जीवन में गणित के कई महत्वपूर्ण सिद्धांतों का खुलासा किया और गणित के क्षेत्र में एक नई दिशा दी। उनका जीवन संघर्ष और समर्पण का प्रतीक था, और उनकी उपलब्धियां आज भी गणित के छात्रों और शोधकर्ताओं के लिए प्रेरणा का स्रोत बनी हुई हैं।

कार्यक्रम का संचालन और आभार ज्ञापन:
कार्यक्रम का संचालन डॉ. राना कुंजर सिंह ने किया और आभार डॉ. देव कृष्ण नामदेव ने व्यक्त किया। उन्होंने कार्यक्रम में शामिल सभी अतिथियों, गणित विभाग के सभी सदस्यों और विद्यार्थियों का धन्यवाद किया, जिनकी मेहनत से यह कार्यक्रम सफलतापूर्वक आयोजित किया जा सका।
कार्यक्रम में गणित विभाग का योगदान:
कार्यक्रम के आयोजन में गणित विभाग के डॉ. संजय राय, दीपक जैन, सुनील प्रजापति, श्रीमती भानुप्रिया पटेल, डॉ. शैलेन्द्र सिंह राजपूत, और डॉ. रविन्द्र सिंह राजपूत का विशेष योगदान रहा। डॉ. संदीप सबलोक ने बताया कि इस आयोजन में विभागीय शिक्षकों और विद्यार्थियों की मेहनत और सहयोग से कार्यक्रम को सफलतापूर्वक आयोजित किया गया।
यह कार्यक्रम गणित के महत्व और श्रीनिवास रामानुजन के योगदान को याद करते हुए आयोजित किया गया, जो विद्यार्थियों को गणित के प्रति उनकी रुचि और समझ को बढ़ाने का एक बड़ा अवसर प्रदान करता है। इस कार्यक्रम के माध्यम से विद्यार्थियों में गणित के प्रति जागरूकता और उसे समझने की एक नई दृष्टि उत्पन्न हुई। गणित के शास्त्र को और भी प्रासंगिक और महत्वपूर्ण बनाने के लिए इस तरह के आयोजन भविष्य में और भी होने चाहिए, ताकि गणित के क्षेत्र में और भी शोध व विकास हो सके।