भारत और रूस के बीच नई दिल्ली में आयोजित उच्चस्तरीय शिखर सम्मेलन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की मुलाकात से द्विपक्षीय रिश्तों को नई गति मिली है। पीएम मोदी ने पुतिन की इस यात्रा को ऐतिहासिक बताते हुए कहा कि इस समिट से कई बड़े और सकारात्मक नतीजे सामने आए हैं।

पुतिन की यात्रा को ऐतिहासिक बताया
पीएम मोदी ने कहा कि राष्ट्रपति पुतिन पहली बार वर्ष 2000 में भारत आए थे और उसी समय दोनों देशों के बीच रणनीतिक साझेदारी की नींव रखी गई थी। उन्होंने कहा कि आज दोनों देशों के रिश्ते पहले से अधिक मजबूत, स्थिर और भरोसेमंद बने हैं।
मोदी ने पुतिन के नेतृत्व की सराहना की
मोदी ने पुतिन की जमकर तारीफ करते हुए कहा कि वह उन्हें पिछले 25 वर्षों से जानते हैं। उन्होंने कहा कि भारत–रूस की दोस्ती इस बात का उदाहरण है कि एक दूरदर्शी नेता किस तरह अंतरराष्ट्रीय रिश्तों को नई दिशा दे सकता है।
मोदी ने कहा—“राष्ट्रपति पुतिन के विजन और नेतृत्व ने भारत–रूस संबंधों को और मजबूत किया है।”

भारत की स्पष्ट स्थिति— हम न्यूट्रल नहीं, शांति के साथ हैं
यूक्रेन युद्ध के मुद्दे पर पीएम मोदी ने अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत की साफ स्थिति दोहराते हुए कहा कि भारत न्यूट्रल नहीं है। भारत हमेशा से शांति, संवाद और कूटनीति के पक्ष में रहा है और आगे भी हर तरह के शांतिपूर्ण प्रयासों का समर्थन करेगा।
दुनिया को फिर शांति की जरूरत
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि आज दुनिया को एक बार फिर शांति की जरूरत है। ऐसे समय में भारत–रूस के रिश्ते वैश्विक स्थिरता के लिए मजबूत स्तंभ साबित हो रहे हैं। उन्होंने भरोसा जताया कि आने वाले समय में द्विपक्षीय संबंध और नई ऊंचाइयों पर पहुंचेंगे।
दोनों नेताओं की औपचारिक बातचीत शुरू
इससे पहले पीएम मोदी और राष्ट्रपति पुतिन के बीच औपचारिक वार्ता की शुरुआत हुई, जिसमें रक्षा सहयोग, ऊर्जा साझेदारी, व्यापार, विज्ञान–तकनीक और वैश्विक मुद्दों पर गहन चर्चा होने की उम्मीद है।