बीएमसी सागर में चिकित्सकीय तत्परता की मिसाल !

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बुंदेलखंड मेडिकल कॉलेज (बीएमसी) सागर एक बार फिर उन्नत चिकित्सकीय सेवाओं और समन्वित टीमवर्क का उदाहरण बना है। यहां चिकित्सकों की तत्परता, सटीक निर्णय और तकनीकी दक्षता के चलते मात्र एक माह के नवजात शिशु की जान बचा ली गई। समय पर सर्जरी नहीं होती, तो शिशु की स्थिति जानलेवा हो सकती थी।

प्राप्त जानकारी के अनुसार 12 दिसंबर 2025 को एक माह के शिशु को अत्यंत गंभीर अवस्था में बीएमसी सागर में भर्ती कराया गया था। बच्चे को लगातार उल्टियां हो रही थीं, जिससे परिजन बेहद चिंतित थे। प्रारंभिक जांच के बाद जब एक्स-रे कराया गया, तो चौंकाने वाली स्थिति सामने आई। जांच में पाया गया कि शिशु की आंतें उलझ गई हैं और उसे ऑब्सट्रक्टेड इन्गुआइनल हर्निया की गंभीर समस्या है।

चिकित्सकों के अनुसार, यदि इस स्थिति में समय पर सर्जरी नहीं की जाती, तो आंतों में गैंग्रीन, संक्रमण और सेप्टिसीमिया जैसी जानलेवा जटिलताएं उत्पन्न हो सकती थीं, जिससे शिशु की जान को गंभीर खतरा था। हालात की गंभीरता को देखते हुए तत्काल वरिष्ठ चिकित्सकों को सूचित किया गया।

इमरजेंसी मेडिसिन विभाग के डॉ. सत्येंद्र उईके के निर्देशन में पीडियाट्रिक सर्जन डॉ. विशाल गजभिये एवं डॉ. सौरभ जैन ने शिशु की त्वरित जांच की और मात्र आधे घंटे के भीतर इमरजेंसी सर्जरी का निर्णय लिया। इसके बाद करीब ढाई से तीन घंटे तक चली जटिल आपातकालीन सर्जरी को सफलतापूर्वक अंजाम दिया गया और शिशु की जान बचा ली गई।

इस चुनौतीपूर्ण ऑपरेशन में निश्चेतना (एनेस्थीसिया) विभाग की भूमिका भी अत्यंत महत्वपूर्ण रही। डॉ. सर्वेश जैन एवं डॉ. मोहम्मद इलियास ने विशेष सावधानी और दक्षता के साथ शिशु को सुरक्षित एनेस्थीसिया प्रदान किया, जिससे सर्जरी बिना किसी जटिलता के संपन्न हो सकी।

सर्जरी के बाद शिशु को एनआईसीयू में भर्ती किया गया। एक दिन तक उसे वेंटिलेटर सपोर्ट पर रखा गया, इसके बाद तीन दिनों तक ऑक्सीजन सपोर्ट दिया गया। शुरुआती दिनों में शिशु को दूध नहीं दिया गया, लेकिन चौथे दिन से धीरे-धीरे फीडिंग शुरू की गई, जिससे उसकी स्थिति में निरंतर सुधार देखने को मिला। वर्तमान में शिशु की हालत स्थिर बताई जा रही है।

बुंदेलखंड मेडिकल कॉलेज के डीन डॉ. पी. एस. ठाकुर ने इमरजेंसी मेडिसिन, पीडियाट्रिक सर्जरी एवं निश्चेतना विभाग की पूरी टीम की सराहना करते हुए कहा कि बीएमसी में इस प्रकार की जटिल और जान बचाने वाली सर्जरी पूरी तरह निशुल्क उपलब्ध है, जो आम जनता के लिए बड़ी राहत है। वहीं अधीक्षक डॉ. राजेश जैन ने भी सफल ऑपरेशन पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए चिकित्सकों की टीम को बधाई दी।

शिशु विभाग की टीम में डॉ. आशीष जैन, डॉ. रूपा अग्रवाल, डॉ. अंकित जैन, डॉ. अजीत आनंद असाठी, डॉ. महेंद्र सिंह चौहान, डॉ. अंकित जैन (एस.आर.), डॉ. नरेंद्र परमार, डॉ. पियूष गुप्ता एवं डॉ. सौम्या व्यास शामिल रहे। इसके अतिरिक्त इमरजेंसी मेडिसिन विभाग के डॉ. प्रियांशु जैन तथा ओटी स्टाफ विनोद कुमार शर्मा सहित अन्य कर्मचारियों का भी सराहनीय योगदान रहा।

कुल मिलाकर, विभिन्न विभागों के आपसी समन्वय, त्वरित निर्णय क्षमता और चिकित्सकीय दक्षता के कारण एक मासूम की जान बचाई जा सकी। यह मामला न केवल बीएमसी सागर की चिकित्सा सेवाओं की गुणवत्ता को दर्शाता है, बल्कि यह भी साबित करता है कि समय पर सही इलाज से असंभव को भी संभव बनाया जा सकता है।

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