छतरपुर जिला जेल में कैदियों के बीच हिंसक हमला, एक गंभीर घायल, ग्वालियर रेफर !

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छतरपुर: जिला जेल छतरपुर में शुक्रवार देर रात कैदियों के बीच हिंसक वारदात सामने आई है। रात करीब 2 बजे एक कैदी ने अपने ही बैरक में सो रहे दूसरे कैदी पर पत्थर से जानलेवा हमला कर दिया। हमले में कैदी गंभीर रूप से घायल हो गया, जिसे पहले जिला अस्पताल छतरपुर ले जाया गया, बाद में हालत नाजुक होने पर ग्वालियर रेफर किया गया।

जेल प्रशासन के अनुसार, आरोपी कैदी लख्खू उर्फ महेश्वरीदीन (30) ने लॉकअप से पहले अपने बिस्तर में करीब 2 से ढाई किलो वजनी पत्थर छिपा लिया था। लॉकअप के बाद उसी बैरक में सो रहे कैदी हाकिम पर उसने अचानक पत्थर से चेहरे और सिर पर हमला कर दिया। घायल कैदी हाकिम 10 साल की सजा काट रहा है।

घटना के बाद जेल बल ने तत्काल घायल को जिला अस्पताल पहुंचाया। डॉक्टरों के अनुसार उसकी हालत गंभीर बनी हुई है, जिसके चलते उसे ग्वालियर रेफर किया गया है।

पुरानी दुश्मनी में किया हमला
जानकारी के मुताबिक, दोनों कैदी एक ही गांव के निवासी हैं और उनके बीच पुरानी रंजिश चली आ रही थी। बताया गया कि हाकिम ने जेल मेन्यू के अनुसार रात की जागने की ड्यूटी पूरी कर रात 12 बजे सो गया था। इसके बाद आरोपी लख्खू पेशाब के बहाने उठा और छिपाकर रखा पत्थर उठाकर हमला कर दिया।

जेलर दिलीप सिंह ने बताया कि घटना के बाद तुरंत कार्रवाई की गई और घायल को इलाज के लिए अस्पताल भेजा गया।

जान से मारने के प्रयास में एफआईआर
जेल प्रशासन ने सिटी कोतवाली थाना को लिखित आवेदन देकर बताया कि आरोपी ने जान से मारने की नीयत से हमला किया और जेल की सुरक्षा व्यवस्था को भी गंभीर रूप से प्रभावित किया। टीआई अरविंद दांगी ने बताया कि आवेदन के आधार पर लख्खू के खिलाफ जान से मारने के प्रयास का मामला दर्ज कर लिया गया है।

जेल प्रशासन के अनुसार, लख्खू रिकॉर्डशुदा अपराधी है और उसके खिलाफ पहले से धारा 302 और 307 के कई मामले दर्ज हैं। फिलहाल वह 307 के मामले में ही जेल में बंद था।

कांग्रेस ने उठाए सुरक्षा पर सवाल
प्रदेश कांग्रेस कमेटी के सचिव अनीस खान ने जेल प्रशासन की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने कहा कि जब जेल के अंदर सुई तक नहीं जा सकती, तो इतना भारी पत्थर बैरक तक कैसे पहुंचा। साथ ही यह भी सवाल किया कि पुरानी दुश्मनी के बावजूद दोनों कैदियों को एक ही बैरक में क्यों रखा गया।

अनीस खान ने आरोप लगाया कि इससे पहले भी जेल के अंदर मोबाइल और नशीली वस्तुएं पकड़ी जा चुकी हैं और बिना जेल प्रशासन की मिलीभगत के ऐसी घटनाएं संभव नहीं हैं।

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