छतरपुर जिले के बमीठा थाना क्षेत्र से एक ऐसी घटना सामने आई है, जिसने इंसानियत को शर्मसार कर दिया है। एक अज्ञात महिला द्वारा नवजात बच्ची को जन्म के तुरंत बाद पुलिया के नीचे लावारिस हालत में फेंक दिया गया। गनीमत यह रही कि समय रहते लोगों की नजर पड़ गई और मासूम की जान बचाई जा सकी। फिलहाल बच्ची जिला अस्पताल छतरपुर के एसएनसीयू (स्पेशल न्यूबॉर्न केयर यूनिट) में भर्ती है, जहां उसका उपचार जारी है।
पुलिया के नीचे रोने की आवाज से हुआ खुलासा
यह हृदयविदारक घटना गुरुवार को राष्ट्रीय राजमार्ग-39 (एनएच-39) पर ग्राम चुरारन के पास स्थित नीलम (चंदेल) ढाबा के नजदीक सामने आई। राहगीरों और आसपास के ग्रामीणों को अचानक पुलिया के नीचे से किसी नवजात के रोने की आवाज सुनाई दी। पहले तो लोग चौंके, फिर आवाज की दिशा में जाकर देखा तो शाल में लिपटी एक नवजात कन्या पड़ी मिली। ठंड, गंदगी और असुरक्षित माहौल में बच्ची को यूं बेसहारा छोड़ दिया गया था।

स्थानीय लोगों की तत्परता से बची जान
पुलिया के नीचे पड़ी बच्ची को देखकर लोगों ने बिना देर किए डायल 112 पर सूचना दी। सूचना मिलते ही बमीठा थाना प्रभारी आशुतोष श्रोत्रिय पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे। पुलिसकर्मियों ने बेहद संवेदनशीलता दिखाते हुए तुरंत बच्ची को सुरक्षित निकाला। इस दौरान आरक्षक भानु पटेल ने बच्ची को अपनी गोद में लेकर उसे ढांढस बंधाया और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र बमीठा पहुंचाया।
जन्म के तुरंत बाद छोड़े जाने की पुष्टि
सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में डॉक्टरों ने नवजात का प्राथमिक परीक्षण और उपचार किया। डॉक्टरों के अनुसार बच्ची को जन्म के कुछ ही समय बाद फेंका गया था, क्योंकि नाल अभी भी जुड़ी हुई थी। हालत नाजुक होने के कारण बच्ची को 108 एम्बुलेंस के जरिए जिला अस्पताल छतरपुर रेफर कर दिया गया। वर्तमान में बच्ची एसएनसीयू में भर्ती है और डॉक्टरों की निगरानी में उसका इलाज चल रहा है।
लकड़ी बीनने गई महिला ने सबसे पहले देखा
पुलिस जांच में यह भी सामने आया है कि नवजात बच्ची को सबसे पहले लकड़ी बीनने गई महिला अनीता बेगम ने देखा था। पुलिया के नीचे से आ रही रोने की आवाज सुनकर वह रुकी और पास जाकर देखा, जहां शाल में लिपटी बच्ची पड़ी थी। अनीता बेगम ने तत्काल एक अन्य महिला की मदद से पुलिस को सूचना दी, जिससे बच्ची को समय रहते चिकित्सा सहायता मिल सकी।
मां की तलाश में जुटी पुलिस
बमीठा पुलिस ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच शुरू कर दी है। आसपास के गांवों में हाल ही में प्रसव कराने वाली महिलाओं की जानकारी जुटाई जा रही है। साथ ही निजी और सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों के रिकॉर्ड भी खंगाले जा रहे हैं, ताकि यह पता लगाया जा सके कि बच्ची की मां कौन है और उसने ऐसा अमानवीय कदम क्यों उठाया।
थाना प्रभारी आशुतोष श्रोत्रिय ने बताया कि नवजात को इस तरह छोड़ना गंभीर अपराध है। पुलिस हर पहलू से जांच कर रही है और दोषी पाए जाने पर संबंधित महिला या अन्य जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
समाज के सामने सवाल
यह घटना एक बार फिर समाज के सामने कई सवाल खड़े करती है। बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ जैसे अभियानों के बावजूद ऐसी घटनाएं यह सोचने पर मजबूर करती हैं कि कहीं न कहीं सामाजिक जागरूकता और संवेदनशीलता की कमी अब भी बनी हुई है। फिलहाल पूरे क्षेत्र में इस घटना को लेकर आक्रोश और संवेदना का माहौल है, वहीं हर कोई मासूम बच्ची के जल्द स्वस्थ होने की कामना कर रहा है।