मुंबई, 19 जनवरी: शिवसेना (UBT) के सांसद संजय राउत ने सोमवार को कहा कि महाराष्ट्र के बृहन्मुंबई महानगरपालिका (BMC) मेयर चुनाव से पहले भाजपा भी अपने पार्षदों को किसी सुरक्षित जगह पर भेजने की योजना बना रही है। राउत ने आरोप लगाया कि “शिंदे पहले ही अपने पार्षदों को पांच सितारा होटल में भेज चुके हैं। सवाल है – कौन किससे डर रहा है?”
राउत ने बताया कि मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस स्विट्जरलैंड में वर्ल्ड इकॉनोमिक फोरम में भाग ले रहे हैं, और इस दौरान पार्षदों को इधर-उधर भेजा जा रहा है। उन्होंने इसे अजीब परिस्थितियों के रूप में बताया।
BMC चुनाव का हाल:
- महाराष्ट्र के 29 नगर निगमों में 15 जनवरी को चुनाव हुए थे।
- BMC में 227 सीटों में भाजपा ने 89 सीटें जीतीं, जबकि शिंदे गुट को 29 सीटें मिलीं।
- मेयर के लिए बहुमत का आंकड़ा 114 है। इस लिहाज से भाजपा को शिंदे गुट के कम से कम 25 पार्षदों का समर्थन चाहिए।
- मेयर पद के लिए लॉटरी 22 जनवरी को निकाली जाएगी, जिसमें आरक्षण कैटेगरी तय की जाएगी। इसके बाद अधिसूचना जारी होने के सात दिन बाद मतदान की संभावना है।

शिवसेना (UBT) की तैयारी:
चुनाव नतीजों के बाद शिवसेना ने अपने 29 पार्षदों को बांद्रा के होटल ताज लैंड्स एंड में ठहराया है। पार्टी का कहना है कि यह वर्कशॉप और ओरिएंटेशन के लिए किया गया है ताकि पार्षद BMC के कामकाज को समझ सकें।
संजय राउत के आरोपों के अनुसार, यह कदम हॉर्स-ट्रेडिंग रोकने के लिए उठाया गया है। सभी पार्षदों को 21 जनवरी दोपहर 3 बजे तक होटल में रहना अनिवार्य किया गया है।
शिंदे गुट की रणनीति:
- एकनाथ शिंदे ने रविवार को अपने सभी 29 पार्षदों के साथ होटल में बैठक की।
- शिंदे गुट चाहता है कि कम से कम ढाई साल शिवसेना का मेयर बने, ताकि 2026 में बाला साहेब ठाकरे की जन्मशताब्दी वर्ष के अवसर पर पार्टी को मेयर पद का लाभ मिल सके।
- यदि भाजपा शिंदे गुट की मांग नहीं मानती, तो सत्ता समीकरण बदल सकते हैं।
- इस रणनीति से 2022 की बगावत की यादें ताजा हो रही हैं, जब शिंदे ने विधायकों के साथ बगावत कर शिवसेना को तोड़ दिया था।
मुंबई कांग्रेस में गृहयुद्ध:
बीएमसी चुनाव में हार के बाद कांग्रेस में आंतरिक कलह उभर आई है। हार का ठीकरा मुंबई अध्यक्ष वर्षा गायकवाड़ पर फोड़ने वाले नेता जगताप को आलाकमान ने ‘कारण बताओ’ नोटिस जारी किया है।
इस समय BMC की सत्ता समीकरण बेहद नाजुक हैं और पार्षदों की खरीद-फरोख्त तथा दलबदल की संभावनाओं पर नजर बनी हुई है।