नेशनल हाईवे टोल न चुकाने पर NOC, फिटनेस और परमिट रोके जाएंगे !

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सरकार ने मंगलवार को नेशनल हाईवेज पर टोल नियमों को और सख्त कर दिया है। अब टोल न चुकाने वाले वाहनों को नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट (NOC), फिटनेस सर्टिफिकेट और नेशनल परमिट जैसी सेवाएं जारी नहीं की जाएंगी। यह बदलाव सेंट्रल मोटर व्हीकल्स रूल्स 2026 के तहत किया गया है, जिसका उद्देश्य इलेक्ट्रॉनिक टोल कलेक्शन को मजबूत करना और टोल चोरी को रोकना है।

कौन-कौन सी सेवाएं रोकी जाएंगी?

  1. नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट (NOC): यदि कोई वाहन मालिक अपनी गाड़ी बेचना या एक राज्य से दूसरे राज्य में ट्रांसफर करना चाहता है, तो बिना टोल भुगतान के NOC नहीं मिलेगा।
  2. फिटनेस सर्टिफिकेट: कॉमर्शियल और अन्य वाहनों का फिटनेस सर्टिफिकेट रिन्यू या नया जारी नहीं होगा जब तक पुराना टोल बकाया जमा न हो।
  3. नेशनल परमिट: ट्रक और बस जैसे कॉमर्शियल वाहनों को नेशनल परमिट जारी करने से पहले टोल बकाया की जांच की जाएगी।

सिस्टम कैसे काम करेगा?

  • टोल प्लाजा सेंसर और कैमरा: वाहन फास्टैग से टोल पार करता है, अगर बैलेंस कम है या ब्लैकलिस्टेड है, तो रजिस्ट्रेशन नंबर रिकॉर्ड हो जाएगा। भविष्य में मल्टी-लेन फ्री फ्लो (MLFF) सिस्टम में बैरियर नहीं होंगे, बल्कि हाई-डेफिनिशन कैमरे नंबर प्लेट की फोटो खींचेंगे।
  • NPCI और बैंक सूचना: टोल प्लाजा सर्वर डेटा नेशनल इलेक्ट्रॉनिक टोल कलेक्शन (NETC) को भेजेगा। एनपीसीआई देखेगा कि पैसा क्यों नहीं कट पाया।
  • वाहन पोर्टल के साथ डेटा सिंक: सड़क परिवहन मंत्रालय का डेटाबेस टोल सिस्टम के साथ जुड़ा होगा। टोल बकाया सीधे वाहन के डिजिटल रिकॉर्ड में जुड़ जाएगा।

‘अनपेड टोल यूजर’ की नई परिभाषा

सरकार ने इसे भी परिभाषित किया है। यदि कोई वाहन ETC सिस्टम (फास्टैग) से रिकॉर्ड होने के बावजूद टोल का भुगतान नहीं करता, तो उसे ‘अनपेड टोल यूजर’ माना जाएगा।

भविष्य की तैयारी: मल्टी-लेन फ्री फ्लो

सरकार का यह कदम भविष्य में बिना बैरियर वाले टोल सिस्टम (MLFF) के लिए अहम है। हाईवे पर वाहन तेज रफ्तार में गुजरेंगे और कैमरा-सेंसर टोल काटेंगे। कोई गाड़ी मौके पर रोकी नहीं जाएगी, इसलिए टोल बकाया को वाहन के कागजों से जोड़ दिया गया है।

फॉर्म 28 में बदलाव

एनओसी के लिए फॉर्म 28 अपडेट किया गया है। अब वाहन मालिक को घोषणा करनी होगी कि गाड़ी पर कोई टोल बकाया नहीं है और संबंधित टोल विवरण देना होगा। फॉर्म के कुछ हिस्से अब ऑनलाइन पोर्टल के जरिए इलेक्ट्रॉनिक रूप से भी भरे जा सकेंगे।

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