धार की ऐतिहासिक भोजशाला विवाद में कानूनी प्रक्रिया निर्णायक मोड़ पर, हाई कोर्ट करेगी अंतिम सुनवाई !

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धार। धार की ऐतिहासिक भोजशाला को लेकर लंबे समय से चल रहे विवाद में कानूनी प्रक्रिया निर्णायक मोड़ पर पहुंच गई है। सुप्रीम कोर्ट ने मामले को अंतिम सुनवाई के लिए मध्यप्रदेश हाई कोर्ट को सौंप दिया है। अब इस मामले की सुनवाई हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश या वरिष्ठतम न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली डिवीजन बेंच करेगी।

सुप्रीम कोर्ट का निर्देश

सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि भोजशाला से जुड़े सभी कानूनी पहलुओं पर निर्णय लेने के लिए हाई कोर्ट पूरी तरह स्वतंत्र रहेगा। साथ ही अदालत ने भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) को 98 दिनों के वैज्ञानिक सर्वे की रिपोर्ट 3 सप्ताह (21 दिन) में सार्वजनिक करने का निर्देश दिया है।

आगे क्या होगा?

भोजशाला विवाद में अगला कदम ASI की रिपोर्ट पर आधारित होगा। सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि:

  • रिपोर्ट की प्रतियां दोनों पक्षों को दी जाएंगी।
  • दोनों पक्ष दो सप्ताह के भीतर आपत्ति या सुझाव दे सकते हैं।
  • हाई कोर्ट में आगे की सुनवाई इसी रिपोर्ट के आधार पर होगी, जिसमें यह तय किया जाएगा कि भोजशाला का ऐतिहासिक और धार्मिक स्वरूप क्या है।
  • हाई कोर्ट के अंतिम फैसले तक भोजशाला के मौजूदा स्वरूप में कोई भी छेड़छाड़ नहीं की जा सकेगी।

पिछली सुनवाई और सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी

12 दिसंबर 2024 को सुप्रीम कोर्ट ने देशभर में लंबित मंदिर-मस्जिद विवादों को लेकर कहा था कि ऐसे मामलों में नई याचिकाएं और नए सर्वे नहीं होंगे। ऐसे प्रकरणों में ज्ञानवापी, मथुरा समेत कुल 27 मामले शामिल थे। प्राथमिकता के आधार पर सुप्रीम कोर्ट ने भोजशाला विवाद की सुनवाई को तेज किया।

विशेषज्ञों का कहना

कानून विशेषज्ञों के अनुसार, ASI की वैज्ञानिक रिपोर्ट विवाद को निपटाने में निर्णायक साबित हो सकती है। इस रिपोर्ट में संरचना, निर्माण काल और ऐतिहासिक महत्व का विवरण होगा, जो कोर्ट के निर्णय में अहम भूमिका निभाएगा।

भोजशाला विवाद पर हाई कोर्ट के फैसले का असर न केवल धार बल्कि पूरे मध्यप्रदेश और ऐतिहासिक स्थल संरक्षण के मामलों पर भी पड़ सकता है।

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