नीमच में आंगनवाड़ी कार्यकर्ता कंचनबाई मेघवाल ने बच्चों की जान बचाते हुए अपने प्राणों की आहुति दी, हर तरफ से श्रद्धांजलि !

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इंदौर।
मध्य प्रदेश के नीमच जिले के रानपुर गांव में एक घटना ने पूरे देश को भावुक कर दिया। 45 वर्षीय आंगनवाड़ी कार्यकर्ता कंचनबाई मेघवाल ने मधुमक्खियों के हमले के बीच अपने 20 बच्चों की जान बचाने के लिए खुद अपने प्राणों की आहुति दे दी।

घटना का विवरण

पता चला है कि सोमवार को आंगनवाड़ी केंद्र में बच्चों की संख्या काफी अधिक थी। केंद्र की सहायिका बच्चों को लेने गई हुई थी। इसी दौरान मधुमक्खियों ने हमला कर दिया। पास ही रहने वाली कंचनबाई, जो स्वसहायता समूह की अध्यक्ष थीं और हाथ से कपड़े धो रही थीं, तुरंत दरी और कंबल लेकर दौड़ीं और बच्चों को ढककर बचाने लगीं।

उनकी इस वीरता के बावजूद मधुमक्खियों ने उन पर हमला कर दिया। उन्हें डायल 112 के माध्यम से अस्पताल ले जाया गया, लेकिन दुर्भाग्यवश उन्होंने इस दौरान स्वयं अपनी जान गंवा दी

कंचनबाई पीछे दो बेटियों और एक बेटे को छोड़ गई हैं।


राजस्थान की डिप्टी सीएम दीया कुमारी ने नमन किया

राजस्थान की डिप्टी सीएम दीया कुमारी ने कंचनबाई के बलिदान को महिला सशक्तिकरण और मातृत्व का सर्वोच्च उदाहरण बताते हुए नमन किया। उन्होंने कहा कि कंचनबाई ने बच्चों को सुरक्षित रखने के लिए सैकड़ों मधुमक्खियों के डंक सहन किए, और उनका यह त्याग हर महिला की करुणा, साहस और अदम्य शक्ति को उजागर करता है।

उन्होंने अपने पोस्ट में लिखा:

“मध्यमक्खियों के हमले के बीच 20 मासूम बच्चों को चटाइयों और तिरपाल से ढककर बचाना, कंचनबाई का मातृत्व और कर्तव्य का सर्वोच्च उदाहरण है। उनका बलिदान महिला सशक्तिकरण की प्रेरक मिसाल बनकर सदैव स्मरणीय रहेगा।”


सीएम डॉ मोहन यादव ने जताया दुख

मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने भी कंचनबाई की वीरता पर गहरा दुःख व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार इस दुःख की घड़ी में उनके परिवार के साथ है

सीएम यादव ने परिवार को 4 लाख रुपये की आर्थिक सहायता देने की घोषणा की और बच्चों की शिक्षा का खर्च राज्य सरकार उठाएगी। उन्होंने लिखा:

“ईश्वर उनकी आत्मा को शांति एवं परिजनों को यह दुःख सहने की शक्ति दें। ॐ शांति।”


भीम आर्मी चीफ चंद्रशेखर आजाद ने भी किया नमन

भीम आर्मी चीफ चंद्रशेखर आजाद ने कंचनबाई के साहस को सलाम करते हुए कहा कि उनका यह मानवता का सर्वोच्च उदाहरण है। उन्होंने सरकार से मांग की कि कंचनबाई के बच्चों को आजीवन निशुल्क शिक्षा और आर्थिक सहायता दी जाए। साथ ही उन्होंने कहा कि कंचनबाई को राजकीय सम्मान दिया जाना चाहिए, ताकि आने वाली पीढ़ियां उनके साहस और इंसानियत से प्रेरणा ले सकें।


हर तरफ से मदद की अपील

कंचनबाई के बलिदान ने पूरे देश में संवेदना की लहर दौड़ा दी है। सामाजिक संगठन, राजनीतिक नेता और आम नागरिक उनके परिवार की मदद के लिए आगे आए हैं।

विशेषज्ञों का कहना है कि कंचनबाई की वीरता मातृत्व, साहस और कर्तव्य निष्ठा का प्रतीक बन गई है। उनके इस अद्भुत बलिदान ने यह संदेश दिया है कि संकट की घड़ी में सर्वोपरि मानवता और बच्चों की सुरक्षा सबसे महत्वपूर्ण है।

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