भोपाल नगर निगम की आयुक्त संस्कृति जैन को हाईकोर्ट से बड़ी राहत मिली है। मध्यप्रदेश हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने उस सिंगल बेंच के आदेश पर रोक लगा दी है, जिसमें उन्हें अदालत की अवमानना (कंटेम्प्ट ऑफ कोर्ट) का दोषी ठहराया गया था। डिवीजन बेंच के इस फैसले से फिलहाल कमिश्नर को सजा सुनाए जाने की प्रक्रिया पर ब्रेक लग गया है।
यह मामला भोपाल के श्यामला हिल्स क्षेत्र स्थित नादिर कॉलोनी में हुए एक कथित अवैध निर्माण को गिराए जाने से जुड़ा है। यह आदेश हाईकोर्ट की जबलपुर खंडपीठ में मार्लिन बिल्डकॉन प्राइवेट लिमिटेड बनाम नगर निगम भोपाल प्रकरण में दिया गया है।
सिंगल बेंच ने ठहराया था अवमानना का दोषी
इससे पहले हाईकोर्ट की सिंगल बेंच, जस्टिस विशाल मिश्रा ने भोपाल नगर निगम और आयुक्त संस्कृति जैन को दोषी माना था। कोर्ट ने कहा था कि नगर निगम ने अवैध निर्माण हटाने की कार्रवाई करते समय सुप्रीम कोर्ट द्वारा तय की गई गाइडलाइंस का पालन नहीं किया। सिंगल बेंच ने इसे कानून के राज के खिलाफ करार देते हुए आयुक्त संस्कृति जैन को कंटेम्प्ट ऑफ कोर्ट का दोषी ठहराया था।
सिंगल बेंच ने 6 फरवरी 2026 को सजा के बिंदु पर सुनवाई तय करते हुए आयुक्त को अपना पक्ष रखने के निर्देश दिए थे।

डिवीजन बेंच में चुनौती, आदेश पर लगी रोक
नगर निगम भोपाल ने सिंगल बेंच के इस आदेश को चुनौती देते हुए हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच में अपील दायर की। शुक्रवार को हुई सुनवाई के दौरान डिवीजन बेंच ने सिंगल बेंच के आदेश पर रोक लगाते हुए सभी पक्षकारों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। मामले की अगली सुनवाई 18 फरवरी को तय की गई है।
डिवीजन बेंच के इस आदेश के बाद फिलहाल आयुक्त संस्कृति जैन को बड़ी राहत मिली है और अवमानना से जुड़ी कार्रवाई आगे नहीं बढ़ेगी।
केस विचाराधीन था, फिर भी की गई तोड़फोड़
सिंगल बेंच के समक्ष सुनवाई के दौरान यह तथ्य सामने आया था कि जिस निर्माण को अवैध बताते हुए तोड़ा गया, उस संबंध में सिविल कोर्ट में पहले से मामला विचाराधीन था। इसके बावजूद नगर निगम ने बिना अदालत की अनुमति के तोड़फोड़ की कार्रवाई कर दी।
हाईकोर्ट ने इसे गंभीर मानते हुए कहा था कि जब मामला न्यायालय में लंबित हो, तब प्रशासन को किसी भी तरह की दमनात्मक कार्रवाई से पहले कोर्ट की अनुमति लेना जरूरी है।

कंपनी का आरोप – बिना कानूनी प्रक्रिया तोड़ा गया निर्माण
मार्लिन बिल्डकॉन प्राइवेट लिमिटेड की ओर से दलील दी गई कि नगर निगम ने 18 नवंबर 2025 को उनकी संपत्ति के फ्रंट हिस्से को बिना विधिवत कानूनी प्रक्रिया अपनाए ढहा दिया। कंपनी का कहना था कि निगम ने नोटिस और सुनवाई की प्रक्रिया को दरकिनार कर एकतरफा कार्रवाई की।
कंपनी ने नगर निगम के नोटिस को पहले ही सिविल कोर्ट में चुनौती दी थी और सुनवाई पूरी भी नहीं हुई थी।
नगर निगम की दलील – निर्माण अवैध था
वहीं, नगर निगम की ओर से कोर्ट में कहा गया कि संबंधित निर्माण अवैध था। निगम ने दलील दी कि 7 नवंबर 2024 को दी गई अनुमति पहले ही निरस्त की जा चुकी थी। इसके बाद 14 मई 2025 को नियमानुसार नोटिस जारी किया गया और सभी प्रक्रियाओं का पालन करते हुए कार्रवाई की गई।
कमिश्नर की पेशी और कोर्ट की सख्त टिप्पणी
सुनवाई के दौरान भोपाल नगर निगम की आयुक्त संस्कृति जैन स्वयं हाईकोर्ट में पेश हुई थीं। निगम की ओर से बिना शर्त माफी की पेशकश की गई थी, लेकिन सिंगल बेंच ने शर्त रखी थी कि जो निर्माण तोड़ा गया है, उसे पहले की स्थिति में बहाल किया जाए।
इस पर आयुक्त संस्कृति जैन ने स्पष्ट किया था कि तोड़े गए निर्माण को पहले जैसा बनाना संभव नहीं है। इस पर कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाते हुए कहा था कि अब आयुक्त को सजा के प्रश्न पर अपना पक्ष रखना होगा।
फिलहाल राहत, आगे 18 फरवरी को सुनवाई
डिवीजन बेंच द्वारा सिंगल बेंच के आदेश पर रोक लगाए जाने से फिलहाल यह मामला ठंडे बस्ते में चला गया है। अब 18 फरवरी को होने वाली सुनवाई में यह तय होगा कि आगे इस मामले में क्या रुख अपनाया जाता है।
यह मामला प्रशासनिक कार्रवाई, न्यायिक प्रक्रिया और कानून के पालन से जुड़ा एक अहम उदाहरण माना जा रहा है, जिस पर प्रदेशभर की नजरें टिकी हुई हैं।