देशभर में शनिवार को एप-बेस्ड ट्रांसपोर्ट वर्कर्स यानी गिग वर्कर्स ने काम ठप कर हड़ताल शुरू की। तेलंगाना गिग एंड प्लेटफॉर्म वर्कर्स यूनियन (TGPWU) और इंडियन फेडरेशन ऑफ एप-बेस्ड ट्रांसपोर्ट वर्कर्स (IFAT) के आह्वान पर ओला, उबर, रैपिडो, पोर्टर समेत अन्य एप-बेस्ड सेवाओं से जुड़े ड्राइवर और वर्कर्स इसमें शामिल हुए हैं। हड़ताल का असर कैब और बाइक टैक्सी सेवाओं पर पड़ने की संभावना है, खासकर दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु जैसे बड़े शहरों में।
यूनियनों का कहना है कि यह विरोध ड्राइवरों की लगातार घटती कमाई, बढ़ते शोषण और सरकार की ओर से न्यूनतम बेस फेयर तय न किए जाने के खिलाफ है। ड्राइवरों का आरोप है कि एप-बेस्ड कंपनियां मनमाने तरीके से किराया तय कर रही हैं, जबकि सारा ऑपरेशनल रिस्क ड्राइवरों पर डाल दिया गया है। इससे काम के घंटे तो बढ़ रहे हैं, लेकिन आमदनी लगातार कम होती जा रही है।
यूनियनों ने बाइक टैक्सी सेवाओं को अवैध बताते हुए उन पर रोक लगाने की मांग भी की है। ड्राइवरों का कहना है कि बाइक टैक्सी के कारण किराया और ज्यादा नीचे चला जाता है, जिससे उनकी कमाई पर सीधा असर पड़ता है। ओला, उबर और रैपिडो जैसी कंपनियों पर आरोप है कि वे किराया तय करने में पूरी तरह अपनी मनमानी चला रही हैं।
न्यूनतम बेस फेयर तय न होने पर नाराजगी
यूनियनों के मुताबिक, मोटर व्हीकल एग्रीगेटर गाइडलाइंस-2025 लागू होने के बावजूद केंद्र और राज्य सरकारों ने अब तक न्यूनतम बेस फेयर को नोटिफाई नहीं किया है। इस खामी का फायदा उठाकर एग्रीगेटर कंपनियां किराया लगातार घटा रही हैं। TGPWU के संस्थापक अध्यक्ष और IFAT के को-फाउंडर व नेशनल जनरल सेक्रेटरी शेख सल्लाउद्दीन ने कहा कि गाइडलाइंस-2025 के तहत किराया तय करने से पहले मान्यता प्राप्त यूनियनों से परामर्श जरूरी है, लेकिन सरकारों की निष्क्रियता के चलते कंपनियों का शोषण बढ़ता जा रहा है।

करीब 35 लाख ड्राइवर ओला-उबर से जुड़े
देशभर में ओला-उबर जैसे प्लेटफॉर्म्स से करीब 35 लाख ड्राइवर जुड़े हुए हैं। यूनियनों का दावा है कि इस हड़ताल से महानगरों में परिवहन सेवाएं सबसे ज्यादा प्रभावित होंगी। भोपाल में करीब 15 हजार गाड़ियां ओला-उबर से जुड़ी हैं, जबकि रैपिडो पर लगभग 3 हजार बाइक रजिस्टर्ड हैं।
तेलंगाना गिग और प्लेटफॉर्म वर्कर्स यूनियन ने केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी को पत्र लिखकर जल्द से जल्द न्यूनतम किराया तय करने की मांग की है, ताकि ड्राइवरों को राहत मिल सके।
पहले भी हो चुकी है देशव्यापी हड़ताल
इससे पहले 31 दिसंबर 2025 को IFAT से जुड़े डिलीवरी वर्कर्स ने भी देशव्यापी हड़ताल की थी। उस हड़ताल में स्विगी, जोमैटो, ब्लिंकिट और जेप्टो जैसे प्लेटफॉर्म्स के राइडर्स शामिल थे। उस समय 10 मिनट में डिलीवरी का दबाव, कम वेतन, खराब कामकाजी हालात और सामाजिक सुरक्षा के अभाव को लेकर विरोध किया गया था। हड़ताल के बाद कंपनियों ने ‘10-मिनट डिलीवरी’ जैसे दावों को अपनी ब्रांडिंग से हटा दिया था।
एक आम आदमी पार्टी (AAP) सांसद ने ANI से बातचीत में कहा कि ओला-उबर ड्राइवरों और स्विगी-जोमैटो जैसे प्लेटफॉर्म्स के डिलीवरी वर्कर्स की मेहनत से ही बड़ी कंपनियां मुनाफा कमा रही हैं, लेकिन इस इकोसिस्टम में सबसे ज्यादा दबाव और शोषण गिग वर्कर्स पर ही डाला जा रहा है।