बम्होरी बीका। जीवन में सफलता और सार्थकता पाने के लिए केवल भाग्य पर निर्भर रहने की बजाय कर्तव्य और कर्म को प्राथमिकता देना चाहिए, यह संदेश युवा नेता अविराज सिंह ने सिद्धधाम हनुमान मंदिर बम्होरी बीका में आयोजित पंचकुण्डीय श्री विष्णु महायज्ञ एवं संगीतमय श्रीमद्भागवत कथा के दौरान दिया। उन्होंने कहा कि भगवान श्रीराम और भगवान श्रीकृष्ण के जीवन से यही शिक्षा मिलती है कि मनुष्य को अपने जीवन में कर्म, कर्तव्य और संयम को महत्व देना चाहिए।
इस धार्मिक आयोजन में क्षेत्र के अनेक श्रद्धालु उपस्थित थे। व्यासपीठ पर विराजमान परम पूज्य भगवतकृष्ण जी महाराज का श्रद्धालुओं ने सादर नमन किया। अविराज सिंह ने महाराज के चरणों में प्रणाम करते हुए कहा कि भगवान श्रीराम और भगवान विष्णु के आदर्शों से जीवन में सही मार्गदर्शन मिलता है। उन्होंने विशेष रूप से श्री वेंकटेश्वर स्तोत्र के महत्व पर जोर दिया, जो तिरुपति बालाजी को समर्पित है, और कहा कि इसका श्रवण मात्र भक्तों पर भगवान विष्णु की कृपा लाता है।

अविराज सिंह ने कहा कि जब प्रतिभा का उपयोग परमार्थ के लिए किया जाता है, तो साधारण प्राणी भी देवतुल्य बन जाते हैं। उन्होंने युवाओं से आग्रह किया कि वे नियमित रूप से धार्मिक कथाओं का श्रवण करें और उनके संदेशों को अपने जीवन में अपनाएं। कथा सुनने से हृदय में भक्ति का दीप प्रज्वलित होता है और व्यक्ति सही दिशा में जीवन जीने की कला सीखता है।
उन्होंने भगवान श्रीकृष्ण के जीवन से यह भी शिक्षा दी कि विनम्रता सबसे बड़ा गुण है और अहंकार से बचना चाहिए। साथ ही शरीर और मन की स्वच्छता, अच्छे विचार, सकारात्मक सोच और उत्तम आचरण ही सच्चा धर्म है। उन्होंने बताया कि सच्ची पूजा केवल आरती और भोग तक सीमित नहीं, बल्कि जनसेवा, वरिष्ठों का सम्मान और मातृ शक्ति का आदर भी पूजा का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं।
अविराज सिंह ने युवाओं को प्रेरित करते हुए कहा कि जीवन में आदर्श भगवान श्रीराम और भगवान श्रीकृष्ण होने चाहिए। रामकथा हमें यह सिखाती है कि भाग्य से अधिक कर्म और कर्तव्य का महत्व है। हनुमान जी की अपार शक्ति और ऊर्जा का मूल आधार भगवान श्रीराम हैं, और जब शक्ति का उपयोग परमार्थ के लिए किया जाता है, तो साधारण मनुष्य भी महान बन सकता है।
उन्होंने कलयुग की परिस्थितियों पर ध्यान आकर्षित करते हुए संयमित भोजन और संयमित जीवन का महत्व बताया। उनके अनुसार, “जीने के लिए खाएं, खाने के लिए न जिएं।” इसके माध्यम से व्यक्ति न केवल अपने शरीर को स्वस्थ रख सकता है, बल्कि आत्मिक उन्नति भी प्राप्त कर सकता है।
अविराज सिंह ने कहा कि ऐसे धार्मिक आयोजन समाज को आध्यात्मिक दिशा देने के साथ-साथ युवाओं में संस्कार और नैतिक मूल्यों को स्थापित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उन्होंने उम्मीद जताई कि इस तरह के आयोजन अधिक से अधिक लोगों को जीवन में कर्म, कर्तव्य और संयम की महत्ता समझाने में सहायक होंगे।