सागर जिले की बीना विधानसभा सीट से कांग्रेस के टिकट पर निर्वाचित विधायक निर्मला सप्रे के दलबदल प्रकरण में सियासी और कानूनी गतिविधियां तेज हो गई हैं। बुधवार को विधानसभा अध्यक्ष नरेन्द्र सिंह तोमर ने इस मामले में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिं्घार से अलग-अलग बैठक कर चर्चा की। माना जा रहा है कि यह बैठक दलबदल कानून के तहत लंबित याचिका पर निर्णय प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के उद्देश्य से हुई।
दरअसल, इस मामले में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार सहित अन्य याचिकाओं पर मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की डबल बेंच—चीफ जस्टिस संजीव सचदेवा और जस्टिस विनय सर्राफ—सुनवाई कर रही है। पिछली सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से एडवोकेट जनरल ने अदालत को बताया था कि मामला वर्तमान में विधानसभा अध्यक्ष के समक्ष विचाराधीन है और स्पीकर स्तर पर इस पर सक्रिय रूप से विचार चल रहा है। साथ ही यह भी संकेत दिया गया कि निर्णय जल्द लिया जा सकता है।

हाईकोर्ट ने 15 जनवरी को सरकार के इस बयान को रिकॉर्ड पर लेते हुए तत्काल कोई अंतिम आदेश पारित नहीं किया और सरकार की स्थगन (Adjournment) याचिका स्वीकार कर ली। अब इस प्रकरण की अगली सुनवाई 27 फरवरी को निर्धारित है। अदालत ने फिलहाल दलबदल पर कोई स्पष्ट टिप्पणी या आदेश नहीं दिया है, लेकिन यह संकेत दिया है कि निर्णय का दायित्व स्पीकर के स्तर पर है। अगली तारीख तक यह देखा जाएगा कि विधानसभा अध्यक्ष इस मामले में कोई ठोस फैसला लेते हैं या नहीं।
बैठक के बाद नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने मीडिया से बातचीत में कहा कि हाईकोर्ट ने सरकार और विधानसभा से पूछा था कि इस मामले में क्या कार्रवाई की जा रही है। विधानसभा की ओर से जवाब दिया गया कि कार्रवाई प्रगति पर है। सिंघार ने सुप्रीम कोर्ट के उन निर्देशों का भी उल्लेख किया, जिनमें दलबदल से जुड़े मामलों में 90 दिनों के भीतर निर्णय लेने की बात कही गई है। उन्होंने कहा कि अध्यक्ष सभी पक्षों को सुन रहे हैं और उन्हें उम्मीद है कि 8 से 15 दिनों के भीतर फैसला आ सकता है।
कांग्रेस की मुख्य आपत्ति यह है कि विधायक निर्मला सप्रे ने भाजपा के मंच पर शपथ ली और सार्वजनिक बयान दिए, जिनके प्रमाण स्पीकर को सौंपे जा चुके हैं। वहीं, सिंघार ने भाजपा पर आरोप लगाया कि वह संभावित उपचुनाव से बचना चाहती है। उनका दावा है कि यदि बीना में उपचुनाव होता है तो कांग्रेस की जीत सुनिश्चित है। उन्होंने यह भी कहा कि भाजपा कानूनी तर्कों के माध्यम से अदालत को भ्रमित करने की कोशिश कर रही है।
अब सभी की निगाहें 27 फरवरी की सुनवाई और उससे पहले स्पीकर के संभावित निर्णय पर टिकी हैं, जो इस पूरे विवाद की दिशा तय करेगा।
ब्यूरो रिपोर्ट रिपब्लिक सागर मीडिया !
संवाददाता – अर्पित सेन
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