नई दिल्ली। भारत सरकार ने सरकारी तेल कंपनियों से अमेरिका और वेनेजुएला से कच्चे तेल की खरीद बढ़ाने पर विचार करने को कहा है। ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के मुताबिक, यह निर्देश हालिया भारत-अमेरिका ट्रेड डील के बाद दिए गए हैं।
रिपोर्ट में दावा किया गया है कि अमेरिकी राष्ट्रपति ने ट्रेड समझौते की घोषणा करते हुए कहा था कि भारत ने रूसी कच्चे तेल का आयात बंद करने का वादा किया है। हालांकि भारत सरकार ने इस दावे पर सार्वजनिक रूप से कोई सीधा बयान नहीं दिया है। सरकार का कहना है कि वह ऊर्जा स्रोतों में विविधता लाने की नीति पर काम कर रही है और देश की ऊर्जा सुरक्षा उसकी प्राथमिकता है।
स्पॉट टेंडर में अमेरिकी तेल को प्राथमिकता
सरकार ने तेल कंपनियों से कहा है कि स्पॉट मार्केट से टेंडर के जरिए खरीदारी करते समय अमेरिकी कच्चे तेल को प्राथमिकता दें। वेनेजुएला से तेल खरीद को लेकर भी सकारात्मक रुख अपनाने को कहा गया है, हालांकि वहां से आपूर्ति प्राइवेट ट्रेडर्स के जरिए होगी।

दो बड़ी चुनौतियां
विशेषज्ञों के अनुसार अमेरिकी और वेनेजुएला का तेल बड़े पैमाने पर लेना आसान नहीं होगा। इसके पीछे दो प्रमुख कारण हैं:
- रिफाइनिंग क्षमता: भारत की अधिकांश रिफाइनरीज ‘मीडियम’ या ‘हैवी-सौर’ क्रूड के लिए डिजाइन की गई हैं, जबकि अमेरिकी तेल ‘लाइट-स्वीट’ श्रेणी का होता है। इसे प्रोसेस करना तकनीकी रूप से अलग और कई बार कम अनुकूल होता है।
- लागत और मालभाड़ा: अमेरिका से भारत की दूरी ज्यादा होने के कारण फ्रेट कॉस्ट बढ़ जाती है। कजाकिस्तान और पश्चिम अफ्रीका से तेल आयात अपेक्षाकृत सस्ता पड़ता है।
40 लाख बैरल की खरीद
हाल ही में इंडियन ऑयल (IOC), भारत पेट्रोलियम (BPCL) और हिंदुस्तान पेट्रोलियम (HPCL) ने वेनेजुएला से करीब 40 लाख बैरल कच्चा तेल खरीदा है। निजी क्षेत्र की रिलायंस इंडस्ट्रीज ने भी 2025 के मध्य के बाद पहली बार वेनेजुएला से तेल की खेप मंगाई है।

अमेरिका से तेल आयात को लगभग दोगुना कर 4 लाख बैरल प्रतिदिन तक ले जाने का लक्ष्य बताया जा रहा है, जो पिछले वर्ष के 2.25 लाख बैरल प्रतिदिन से काफी अधिक होगा।
वेनेजुएला पर प्रतिबंध और भारत
अमेरिका ने 2019 में वेनेजुएला पर प्रतिबंध लगाए थे, जिसके बाद भारत ने वहां से तेल आयात रोक दिया था। 2023-24 में आंशिक राहत मिलने के बाद भारत ने दोबारा आयात शुरू किया।
2024 में वेनेजुएला से आयात 63,000 से 1 लाख बैरल प्रतिदिन तक पहुंच गया। 2025 में यह व्यापार करीब 1.41 अरब डॉलर तक पहुंचा। हालांकि मई 2025 में अमेरिका ने फिर से सख्ती बढ़ा दी।
ऊर्जा सुरक्षा बनाम कूटनीति
विशेषज्ञों का मानना है कि “विचार करने” जैसे शब्द कूटनीतिक भाषा का हिस्सा हैं। सरकार सीधे आदेश देने से बचती है ताकि अंतरराष्ट्रीय बाजार को यह संकेत न मिले कि भारत बाजार तंत्र में हस्तक्षेप कर रहा है।
फिलहाल पेट्रोलियम मंत्रालय और सरकारी तेल कंपनियों ने इस मुद्दे पर आधिकारिक टिप्पणी से इनकार किया है। आने वाले समय में कीमत, वैश्विक आपूर्ति और कूटनीतिक समीकरण इस रणनीति की दिशा तय करेंगे।