मुंबई। भारतीय पूंजी बाजार में निवेशकों के लिए खुशखबरी है। सेबी (Securities and Exchange Board of India) ने हाल ही में पांच कंपनियों के पब्लिक इश्यू को मंजूरी दे दी है। 13 फरवरी को इन कंपनियों के ड्राफ्ट रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस (DRHP) पर सेबी ने अपनी ‘ऑब्जर्वेशन’ जारी की। अब ये कंपनियां अपने आईपीओ को बाजार में उतार सकती हैं।
मंजूरी मिलने वाली पांच कंपनियों में ड्यूरोफ्लेक्स, हेक्सागन न्यूट्रिशन, प्रीमियर इंडस्ट्रियल कॉरपोरेशन, विरूपाक्ष ऑर्गेनिक्स और ओम पावर ट्रांसमिशन शामिल हैं। इन कंपनियों के जरिए फ्रेश शेयर जारी करने और ऑफर फॉर सेल (OFS) के माध्यम से कुल निवेशकों से करोड़ों रुपए जुटाए जाएंगे।
1. ड्यूरोफ्लेक्स:
ड्यूरोफ्लेक्स 183.6 करोड़ रुपए के नए शेयर जारी करेगी। इसके अलावा प्रमोटर्स और मौजूदा निवेशक OFS के जरिए 2.25 करोड़ शेयर बेचेंगे। कंपनी मुख्य रूप से मैट्रेस, फोम, बेड और पिलो बनाती है और ऑर्थोपेडिक गद्दों के लिए मशहूर है। आईपीओ से जुटाया गया फंड कर्ज चुकाने और मैन्युफैक्चरिंग क्षमता बढ़ाने में इस्तेमाल होगा।

2. विरूपाक्ष ऑर्गेनिक्स:
यह आईपीओ पूरी तरह फ्रेश इश्यू होगा। कंपनी 740 करोड़ रुपए जुटाने की योजना बना रही है, जो सीधे कंपनी के खाते में जाएगा। विरूपाक्ष ऑर्गेनिक्स एक्टिव फार्मास्युटिकल इंग्रेडिएंट्स (API) और इंटरमीडिएट्स बनाती है, जिसका इस्तेमाल दवाइयों में होता है।
3. प्रीमियर इंडस्ट्रियल:
कंपनी 2.25 करोड़ नए शेयर जारी करेगी और 54 लाख शेयर OFS के जरिए बेचने का प्लान है। यह कंपनी वेल्डिंग उद्योग के लिए रॉ मटेरियल जैसे फेरो अलॉय पाउडर, मेटल पाउडर और अलग-अलग तरह के वायर बनाती है।

4. ओम पावर ट्रांसमिशन:
कंपनी 90 लाख नए शेयर जारी करेगी, जबकि 10 लाख शेयर प्रमोटर्स बेचेंगे। ओम पावर पावर ट्रांसमिशन लाइनों, सब-स्टेशनों के निर्माण और रखरखाव का काम करती है।
5. हेक्सागन न्यूट्रिशन:
इसका आईपीओ पूरी तरह OFS होगा। मौजूदा शेयरहोल्डर्स 3.08 करोड़ शेयर बेचेंगे। कंपनी के पास इससे कोई नया फंड नहीं आएगा। हेक्सागन न्यूट्रिशन बच्चों के लिए हेल्थ ड्रिंक्स और क्लिनिकल न्यूट्रिशन फूड बनाती है और बड़ी कंपनियों को न्यूट्रिशनल प्रीमिक्स सप्लाई करती है।
सेबी की मंजूरी का मतलब:
जब कोई कंपनी बाजार से पैसा जुटाना चाहती है, तो उसे DRHP सेबी के पास जमा करना होता है। सेबी इसकी जांच करता है कि निवेशकों को सही जानकारी दी गई है या नहीं। ‘ऑब्जर्वेशन’ मिलने का मतलब है कि सेबी को अब इसमें कोई आपत्ति नहीं है। इसके बाद कंपनियां आईपीओ की तारीख और प्राइस बैंड तय कर सकती हैं।

फ्रेश इश्यू और OFS में अंतर:
- फ्रेश इश्यू: कंपनी नए शेयर जारी करती है। आईपीओ से मिले पैसे का उपयोग कंपनी अपने बिजनेस बढ़ाने या कर्ज चुकाने में करती है।
- OFS (ऑफर फॉर सेल): पुराने निवेशक अपने शेयर बेचते हैं। इससे पैसा निवेशकों को मिलता है, कंपनी को नहीं।
इस मंजूरी के बाद निवेशक और बाजार विशेषज्ञ इन पांच कंपनियों के आईपीओ का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि यह कंपनियां विभिन्न उद्योगों में काम कर रही हैं—जैसे हेल्थ, फार्मा, मैन्युफैक्चरिंग और पावर—जो निवेशकों के लिए विविधता और अवसर दोनों प्रदान करती हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार, ड्यूरोफ्लेक्स और हेक्सागन न्यूट्रिशन जैसी कंपनियों के फ्रेश इश्यू और OFS से पूंजी जुटाने की योजना निवेशकों के लिए आकर्षक हो सकती है, क्योंकि इन कंपनियों के पास मजबूत मार्केटिंग और उत्पादन नेटवर्क मौजूद है। अब निवेशकों की निगाहें इन आईपीओ की लॉन्चिंग डेट पर टिकी हुई हैं, जो आने वाले महीनों में बाजार में आ सकती हैं।