मध्य प्रदेश में मनरेगा फंड खत्म, 704 करोड़ की देनदारी बकाया !

Spread the love

एक ओर महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) का नाम बदलकर ‘वीबी-जीरामजी’ किए जाने को लेकर राजनीतिक बयानबाजी जारी है, वहीं दूसरी ओर योजना की वित्तीय स्थिति गंभीर सवाल खड़े कर रही है। ग्रामीण विकास मंत्रालय द्वारा राज्यसभा में दिए गए जवाबों के मुताबिक 9 फरवरी 2026 तक मध्य प्रदेश पर मनरेगा के तहत 704.64 करोड़ रुपए की देनदारी लंबित है। इसमें मजदूरी और सामग्री (मैटेरियल) दोनों मद शामिल हैं।

मनरेगा: काम पूरा, भुगतान बाकी

आंकड़ों के अनुसार राज्य के ‘स्टेट नोडल अकाउंट’ में 10 फरवरी तक शेष राशि शून्य से भी नीचे (-0.01997 लाख रुपए) दर्ज हुई, जो बताता है कि केंद्र से अतिरिक्त फंड की तत्काल आवश्यकता है। यदि समय पर राशि जारी नहीं हुई तो ग्रामीण मजदूरों के भुगतान में देरी की आशंका है।
पिछले तीन वर्षों में केंद्र से जारी राशि में वृद्धि दिखती है—

  • 2022-23: ₹5,711.77 करोड़
  • 2023-24: ₹5,891.65 करोड़
  • 2024-25: ₹6,252.03 करोड़

सामग्री घटक में राज्य की हिस्सेदारी (25%) भी बढ़ी है—

  • 2023-24: ₹749.65 करोड़
  • 2024-25: ₹860.89 करोड़

मंत्रालय के अनुसार मनरेगा में मजदूरी का 100% व्यय केंद्र वहन करता है, जबकि सामग्री पर 75% केंद्र और 25% राज्य का योगदान होता है।

आवास और सड़क में ‘जीरो बैलेंस’

इसके विपरीत, बुनियादी ढांचे की प्रमुख योजनाओं में राज्य ने आवंटित राशि का पूरा उपयोग कर लिया है। प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण (PMAY-G) में शेष राशि ₹0.00 है, यानी केंद्र से मिली किस्तें लाभार्थियों को हस्तांतरित या निर्माण कार्यों में उपयोग हो चुकी हैं।
इसी तरह प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (PMGSY) में भी कोई राशि शेष नहीं है।
प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना के तहत वाटरशेड विकास में भी बैलेंस शून्य है।
कौशल विकास की दीन दयाल उपाध्याय ग्रामीण कौशल्य योजना (DDU-GKY) और RSETI कार्यक्रमों में भी पूरा फंड खर्च हो चुका है।

सामाजिक सुरक्षा में 94.92 करोड़ अव्ययित

जहां एक ओर मनरेगा में भुगतान लंबित है, वहीं राष्ट्रीय सामाजिक सहायता कार्यक्रम (NSAP) के तहत 9,492.49 लाख रुपए (लगभग 94.92 करोड़) की राशि अव्ययित पड़ी है। यह राशि वृद्धावस्था, विधवा और दिव्यांग पेंशन योजनाओं के लिए है। मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि इसमें राज्य का ‘टॉप-अप’ अंश भी शामिल हो सकता है।
राष्ट्रीय स्तर पर NSAP में अव्ययित राशि के मामले में उत्तर प्रदेश (₹89,110.16 लाख) शीर्ष पर है, जबकि मध्य प्रदेश भी प्रमुख राज्यों में शामिल है।

अन्य योजनाओं की स्थिति

डिजिटल इंडिया भूमि अभिलेख आधुनिकीकरण कार्यक्रम (DILRMP) में राज्य के पास 26.34 करोड़ रुपए उपलब्ध हैं, जिनका उपयोग रिकॉर्ड डिजिटलीकरण के लिए किया जाना है।

राष्ट्रीय परिप्रेक्ष्य

मनरेगा की लंबित देनदारियों में पश्चिम बंगाल (₹5,753.11 करोड़) सबसे ऊपर है, जबकि उत्तर प्रदेश (₹860.03 करोड़) और राजस्थान (₹651.98 करोड़) भी प्रमुख राज्यों में हैं। मध्य प्रदेश की 704.64 करोड़ की देनदारी इसे शीर्ष लंबित राज्यों में शामिल करती है।

फंड उपयोग में अग्रणी, पर चुनौती बरकरार

राज्यसभा में दिए गए तीन अलग-अलग जवाबों से स्पष्ट है कि मध्य प्रदेश अधिकांश योजनाओं में ‘जीरो बैलेंस’ के साथ फंड उपयोग में अग्रणी है। आवास, सड़क, सिंचाई और कौशल विकास में तेज खर्च से बुनियादी ढांचा मजबूत हुआ है।
हालांकि, मनरेगा की बड़ी देनदारी और सामाजिक सुरक्षा मद में अव्ययित राशि वित्तीय प्रबंधन पर सवाल भी खड़े करती है। यदि केंद्र से जल्द भुगतान नहीं हुआ तो ग्रामीण मजदूरों को मजदूरी मिलने में देरी हो सकती है, जिससे आगामी ग्रामीण रोजगार लक्ष्यों पर असर पड़ना तय है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *