सागर। प्रधानमंत्री कॉलेज ऑफ एक्सीलेंस, शासकीय महाविद्यालय मकरोनिया बुजुर्ग में स्वामी विवेकानंद करियर मार्गदर्शन योजना के अंतर्गत आयोजित 30 दिवसीय अल्पावधि रोजगार एवं स्वरोजगार उन्मुखी प्रशिक्षण कार्यक्रम का समापन गरिमामय समारोह के साथ सम्पन्न हुआ। कार्यक्रम में विद्यार्थियों को नवीन उद्यम, स्टार्टअप, जैविक खेती, वर्मी कम्पोस्ट तथा उद्यानिकी आधारित रोजगार के अवसरों से अवगत कराया गया।
समापन समारोह के मुख्य अतिथि डॉ. नीरज दुबे (अतिरिक्त संचालक, उच्च शिक्षा, सागर संभाग) रहे, जबकि विशिष्ट अतिथि के रूप में डॉ. भावना यादव, डॉ. सरोज गुप्ता (प्राचार्य शासकीय कला एवं वाणिज्य अग्रणी महाविद्यालय सागर) एवं श्री पी.एस. बड़ोले (उपसंचालक उद्यान एवं खाद्य प्रसंस्करण विभाग सागर) उपस्थित रहे।
सांस्कृतिक प्रस्तुति से हुआ शुभारंभ
कार्यक्रम की शुरुआत एम.ए. की छात्रा प्रतिभा मौर्य द्वारा सरस्वती वंदना तथा अजय एवं विकास अहिरवार द्वारा स्वागत गीत से हुई। इसके बाद अतिथियों का स्वागत किया गया।

महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. ए.सी. जैन ने स्वागत उद्बोधन में बताया कि प्रशिक्षण का उद्देश्य विद्यार्थियों में प्राकृतिक व पारंपरिक खेती की समझ विकसित करना, जैविक उत्पादन को बढ़ावा देना तथा कृषि आधारित उद्यमों के लिए शासन की योजनाओं की जानकारी देना है, ताकि रासायनिक मुक्त खेती का वातावरण तैयार हो सके।
60 विद्यार्थियों को मिला व्यावहारिक प्रशिक्षण
ट्रेनिंग एंड प्लेसमेंट ऑफिसर आर.सी. प्रजापति ने प्रतिवेदन प्रस्तुत करते हुए बताया कि यह प्रशिक्षण 19 जनवरी से 13 फरवरी तक चयनित 60 विद्यार्थियों के लिए आयोजित किया गया।
प्रशिक्षण में विशेषज्ञों ने विभिन्न विषयों पर मार्गदर्शन दिया —
- डॉ. आशीष त्रिपाठी (कृषि विज्ञान केंद्र) – जैविक खेती का महत्व
- डॉ. के.एस. यादव – प्राकृतिक खेती की विधियां
- मयंक मेहरा – वर्मी कम्पोस्ट व फल-सब्जी संरक्षण
- राजेश कुमार मिश्रा – उद्यानिकी, फूल एवं औषधीय पौधों की खेती
- अंजली मिश्रा – डिजिटल मार्केटिंग
- डॉ. अनामिका दुबे – सोयाबीन आधारित खाद्य उत्पाद
- लोकेन्द्र सिंह राजपूत – अनुदान योजनाएं व सूक्ष्म उद्योग स्थापना
- युवा कृषक आकाश चौरसिया – बहुस्तरीय खेती व जल संरक्षण
- राज नेमा – जैविक उत्पादों की जानकारी
- एन.एस. तोमर (सेडमैप) – ऋण योजनाएं व उद्यमिता विकास प्रक्रिया

जैविक खेती ही स्वास्थ्य का आधार – अतिथि
डॉ. सरोज गुप्ता ने कहा कि प्राचीन भारत की कृषि व्यवस्था अत्यंत समृद्ध थी, लेकिन रासायनिक उर्वरकों के अंधाधुंध उपयोग से स्वास्थ्य समस्याएं बढ़ीं। इनसे बचाव का एकमात्र उपाय जैविक एवं पारंपरिक खेती है।
डॉ. भावना यादव ने विद्यार्थियों से अपने गांव-परिवार को जागरूक करने का आह्वान किया।
श्री पी.एस. बड़ोले ने विभागीय जैविक बाजार भ्रमण एवं खाद्य प्रसंस्करण उद्योग स्थापित करने में हर संभव सहयोग का आश्वासन दिया।
प्रमाण पत्र वितरण और स्टार्टअप की प्रेरणा
मुख्य अतिथि डॉ. नीरज दुबे ने प्रशिक्षकों एवं विद्यार्थियों को प्रमाण पत्र वितरित करते हुए कहा कि अधिकांश विद्यार्थी ग्रामीण पृष्ठभूमि से आते हैं, लेकिन कृषि को रोजगार के रूप में अपनाने में हिचकते हैं। ऐसे प्रशिक्षण उन्हें आधुनिक तकनीक, नवाचार और स्टार्टअप की दिशा देते हैं तथा भविष्य में वैकल्पिक रोजगार सृजित करते हैं।
उन्होंने महाविद्यालय को कृषि आधारित उद्योगों के नए प्रशिक्षण प्रारंभ करने का सुझाव देते हुए शासन की हर संभव सहायता का भरोसा दिलाया।

विद्यार्थियों ने लगाई फूड स्टॉल और प्रदर्शनी
कार्यक्रम के बाद विद्यार्थियों द्वारा तैयार खाद्य उत्पादों की प्रदर्शनी और फूड स्टॉल लगाई गई, जिसमें उन्होंने अपने उद्यम स्थापित करने की रुचि दिखाई। अतिथियों ने उत्पादों का अवलोकन कर उन्हें बाजार अनुरूप बनाने की सलाह दी।
कार्यक्रम का संचालन आर.सी. प्रजापति ने किया तथा अर्थशास्त्र विभागाध्यक्ष डॉ. कमलेश दुबे ने आभार व्यक्त किया।
इस अवसर पर महाविद्यालय स्टाफ सहित 150 से अधिक विद्यार्थी उपस्थित रहे।