छतरपुर की विश्वनाथ कॉलोनी में ससुर की हत्या के सनसनीखेज मामले में अदालत ने कड़ा फैसला सुनाया है। सोमवार को जिला न्यायालय ने आरोपी दामाद गोलू उर्फ मनीष विश्वकर्मा को आजीवन कारावास (उम्रकैद) और 1000 रुपये के अर्थदंड से दंडित किया। वहीं साक्ष्य छिपाने के दोषी सुनील गुप्ता को तीन वर्ष के सश्रम कारावास और 1000 रुपये जुर्माने की सजा सुनाई गई।
28 जुलाई 2023 को हुई थी वारदात
यह घटना 28 जुलाई 2023 को विश्वनाथ कॉलोनी में हुई थी। फरियादी निशांत गौतम ने कोतवाली थाना में रिपोर्ट दर्ज कराई थी कि वह रीजेंसी होटल के पीछे स्थित कॉलोनी में रहते हैं।
रिपोर्ट के अनुसार, दोपहर में वह अपने मित्र के साथ नौगांव गए थे। शाम करीब 6:15 बजे लौटने पर उन्होंने अपने पिता जगदीश प्रसाद गौतम को घर के बाहर चबूतरे पर खून से लथपथ पाया। घर के अंदर भी खून फैला हुआ था। अस्पताल ले जाने से पहले ही उनकी मृत्यु हो चुकी थी।
संदेह के आधार पर दामाद से पूछताछ
जांच के दौरान पुलिस ने मृतक के दामाद गोलू उर्फ मनीष विश्वकर्मा को संदेह के आधार पर हिरासत में लिया। पूछताछ में आरोपी ने बताया कि उसे शक था कि उसके ससुर ने उसकी पत्नी और बेटी को कहीं छिपा दिया है।
इसी रंजिश में उसने अपने साथियों वीरेंद्र अहिरवार और अमन गुप्ता के साथ मिलकर धारदार गुप्ती से जगदीश प्रसाद गौतम पर हमला कर उनकी हत्या कर दी। वारदात के बाद प्रयुक्त गुप्ती को अमन गुप्ता के चाचा सुनील गुप्ता ने ठिकाने लगाने की कोशिश की थी।
वैज्ञानिक साक्ष्य बने अहम आधार

पुलिस ने घटनास्थल से खून से सना तौलिया, बका, आरोपियों के कपड़े और हत्या में प्रयुक्त गुप्ती जब्त कर जांच के लिए एफएसएल सागर भेजे थे।
डीएनए रिपोर्ट में आरोपी मनीष की शर्ट पर लगा खून मृतक का होना प्रमाणित हुआ। यह वैज्ञानिक साक्ष्य अभियोजन पक्ष के लिए निर्णायक साबित हुआ और अदालत में मजबूत आधार बना।
जघन्य अपराध की श्रेणी में रखा गया मामला
मामले की गंभीरता को देखते हुए जिला स्तरीय समिति ने इसे जघन्य और सनसनीखेज अपराध की श्रेणी में रखा था। विवेचना निरीक्षक अरविंद सिंह दांगी द्वारा की गई।
अभियोजन पक्ष की ओर से विशेष लोक अभियोजक प्रवेश कुमार अहिरवार और अभिषेक मेहरोत्रा ने प्रभावी पैरवी की, जिसके आधार पर न्यायालय ने दोष सिद्ध पाते हुए कड़ी सजा सुनाई।
अदालत का सख्त संदेश
अदालत के इस फैसले को पारिवारिक रंजिश में की गई हत्या के मामलों में कड़ा संदेश माना जा रहा है। न्यायालय ने स्पष्ट किया कि सुनियोजित हत्या और साक्ष्य मिटाने जैसे अपराधों में किसी भी प्रकार की रियायत नहीं दी जाएगी।