ग्वालियर में गूंजेंगी ध्रुपद की स्वर लहरियां, 17 से 19 फरवरी तक ,बैजू बावरा महोत्सव !

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संगीत नगरी ग्वालियर एक बार फिर ध्रुपद की पारंपरिक स्वर लहरियों से गूंजने जा रही है। राजा मानसिंह तोमर संगीत एवं कला विश्वविद्यालय द्वारा 17 से 19 फरवरी तक तीन दिवसीय ‘बैजू बावरा महोत्सव’ का आयोजन किया जा रहा है। यह महोत्सव विश्वविद्यालय परिसर स्थित तानसेन सभागार में आयोजित होगा, जहां देशभर के ख्यातिप्राप्त संगीतज्ञ ध्रुपद और धमार शैलियों पर व्याख्यान एवं प्रस्तुतियां देंगे। बैजू बावरा की स्मृति में ग्वालियर में यह पहला आयोजन है।

ध्रुपद परंपरा को समर्पित आयोजन

मध्यकालीन महान संगीतज्ञ बैजू बावरा ने ध्रुपद गायन शैली को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया और ग्वालियर को विशिष्ट पहचान दिलाई। उन्हीं की स्मृति में आयोजित यह महोत्सव न केवल संगीत साधकों, बल्कि आम शहरवासियों को भी ध्रुपद की समृद्ध परंपरा से जोड़ने का अवसर देगा। विश्वविद्यालय प्रशासन के अनुसार, यह आयोजन परंपरा और आधुनिकता के संगम का मंच बनेगा।


तीन दिवसीय महोत्सव का विस्तृत कार्यक्रम

पहला दिन – 17 फरवरी

महोत्सव का शुभारंभ सुबह 10:30 बजे होगा। उद्घाटन सत्र की मुख्य अतिथि प्रो. लावण्य कीर्ति सिंह ‘काव्या’ होंगी, जो ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय की संकायाध्यक्ष हैं। वे ‘भारतीय ज्ञान परंपरा: ध्रुपद गायन शैली का परंपरागत एवं वर्तमान स्वरूप’ विषय पर व्याख्यान देंगी। कार्यक्रम की अध्यक्षता कुलगुरु प्रो. स्मिता सहस्त्रबुद्धे करेंगी।

पहले दिन ध्रुपद कार्यशाला के विषय विशेषज्ञ पद्मश्री उस्ताद वासिफुद्दीन डागर होंगे। पखावज पर व्याख्यान एवं प्रदर्शन पंडित मोहन श्याम शर्मा प्रस्तुत करेंगे। दोपहर बाद योगिनी तांबे तथा उस्ताद डागर की ध्रुपद प्रस्तुतियां श्रोताओं को मंत्रमुग्ध करेंगी।

दूसरा दिन – 18 फरवरी

इस दिन धमार कार्यशाला का संचालन डॉ. विशाल जैन करेंगे। साथ ही डॉ. श्याम रस्तोगी द्वारा सुरबहार वादन एवं ध्रुपद गायन की विशेष प्रस्तुतियां होंगी, जिससे श्रोता ध्रुपद की गूढ़ता और गंभीरता को निकट से अनुभव कर सकेंगे।

तीसरा दिन – 19 फरवरी

समापन दिवस पर पद्मश्री पं. ऋत्विक सान्याल ध्रुपद कार्यशाला का मार्गदर्शन देंगे और अपनी सांगीतिक प्रस्तुति से महोत्सव को गरिमा प्रदान करेंगे।


ग्वालियर: सदैव से संगीत की भूमि

कुलगुरु प्रो. स्मिता सहस्त्रबुद्धे एवं कुलसचिव अरुण सिंह चौहान ने बताया कि ग्वालियर सदैव से संगीत साधना की पावन भूमि रहा है। यह महोत्सव ध्रुपद की विरासत को नई पीढ़ी तक पहुंचाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल सिद्ध होगा।

उन्होंने कहा कि इस आयोजन के माध्यम से विद्यार्थियों को दिग्गज कलाकारों से सीधे सीखने का अवसर मिलेगा, जिससे पारंपरिक भारतीय संगीत की जड़ों को और अधिक सुदृढ़ किया जा सकेगा। सांस्कृतिक समिति अध्यक्ष डॉ. पारुल दीक्षित एवं पीआरओ कुलदीप पाठक भी इस अवसर पर उपस्थित रहे।

तीन दिनों तक चलने वाला ‘बैजू बावरा महोत्सव’ निस्संदेह ग्वालियर की सांगीतिक परंपरा को पुनर्जीवित करने और ध्रुपद की गंभीर एवं आध्यात्मिक धारा को जन-जन तक पहुंचाने का सशक्त माध्यम बनेगा।

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