भोपाल। राज्य साइबर पुलिस ने अंतरराष्ट्रीय साइबर स्कैम रैकेट का पर्दाफाश किया है, जिसमें युवाओं को विदेश में नौकरी का झांसा देकर थाईलैंड बुलाकर म्यांमार में बंधक बनाकर साइबर ठगी करवाने का मामला सामने आया। इस गिरोह के दो एजेंट गिरफ्तार किए गए हैं। यह मप्र में एमिग्रेशन एक्ट के तहत दर्ज पहला मामला है, जिसमें मानव तस्करी और संगठित अपराध की धाराएं भी जोड़ी गई हैं।
जांच में सामने आया कि भोपाल निवासी जितेंद्र अहिरवार को डेटा एंट्री जॉब का झांसा देकर टेलीग्राम के जरिए इंटरव्यू लिया गया और थाईलैंड भेजा गया। वहां से बॉर्डर पार कर अवैध रूप से म्यांमार पहुंचाया गया, जहां उसे बंधक बनाकर साइबर ठगी करवाई गई। बाद में म्यांमार आर्मी ने उसे रेस्क्यू किया।
एसपी प्रणय नागवंशी ने बताया कि जांच में मानव तस्करी और आईटी एक्ट के तहत अपराध सामने आए। पुलिस ने जमुई (बिहार) निवासी मो. फैज अकरम और मेरठ (उप्र) निवासी मोहित अग्रवाल को गिरफ्तार किया। आरोपियों से मोबाइल, टैबलेट और दस्तावेज जब्त किए गए।

जांच में पता चला कि भारत में बैठे एजेंट फेसबुक, इंस्टाग्राम, व्हाट्सएप और टेलीग्राम के जरिए बेरोजगार युवाओं को निशाना बनाते थे। उन्हें डेटा एंट्री, होटल या मर्चेंट नौकरियों के नाम पर 30-40 हजार थाई बाथ सैलरी का लालच दिया जाता था। युवाओं के हामी भरते ही ऑनलाइन इंटरव्यू कर थाईलैंड बुलाया जाता और फिर अवैध रूप से म्यांमार भेजकर साइबर स्कैम कंपनियों को बेच दिया जाता।
म्यांमार, लाओस और कंबोडिया के सीमावर्ती इलाकों में ऐसे साइबर स्कैम कंपाउंड बनाए गए हैं। यहां से 30 से ज्यादा देशों में सायबर गुलामों से ठगी करवाई जा रही है। इसमें भारत, पाकिस्तान, नेपाल, श्रीलंका, बांग्लादेश, नाइजीरिया, इथोपिया और फिलीपींस के युवक शामिल हैं।
सीबीआई ने बीते 30 जनवरी को मल्टीनेशनल ऑपरेशन ‘साइ-स्ट्राइक’ शुरू किया था, जिसमें अमेरिका की एफबीआई, ब्रिटेन, कुवैत, आयरलैंड और सिंगापुर की एजेंसियां भी शामिल थीं। इस अभियान में 10 राज्यों में 35 ठिकानों पर छापेमारी की गई थी।
विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे जॉब ऑफर से बचने के लिए सोशल मीडिया पर विदेशी नौकरी के विज्ञापनों पर आंख मूंदकर भरोसा न करें। बिना POE रजिस्ट्रेशन के विदेश भेजने वाला एजेंट गैरकानूनी है और पासपोर्ट जल्दी बनवाने का दबाव खतरे की निशानी है। किसी भी शक की स्थिति में 1930 हेल्पलाइन या cybercrime.gov.in पर शिकायत करें।
इस गिरफ्तारी से स्पष्ट संदेश गया कि साइबर ठगी और मानव तस्करी के अंतरराष्ट्रीय रैकेट के खिलाफ पुलिस सख्त कदम उठा रही है और युवाओं को झांसे में फंसने से बचाने के लिए जागरूक करने का प्रयास कर रही है।