सागर जिले के विकासखंड बीना के ग्राम गोदना में एक प्रगतिशील किसान ने यह साबित कर दिया है कि यदि आधुनिक तकनीक और सही मार्गदर्शन का उपयोग किया जाए, तो खेती न केवल लाभकारी बन सकती है बल्कि पर्यावरण संरक्षण में भी अहम भूमिका निभा सकती है। किसान कपिल लोधी ने स्ट्रॉ रीपर मशीन के माध्यम से नरवाई (पराली) को भूसे में बदलकर अतिरिक्त आय अर्जित करने का एक सफल मॉडल प्रस्तुत किया है।
परंपरागत रूप से फसल कटाई के बाद खेतों में बची नरवाई को जलाना एक आम प्रथा रही है, जिससे न केवल वायु प्रदूषण बढ़ता है बल्कि मिट्टी की उर्वरता भी प्रभावित होती है। ऐसे में कपिल लोधी का यह प्रयास एक सकारात्मक बदलाव का संकेत देता है। उन्होंने स्ट्रॉ रीपर (भूसा बनाने की मशीन) का उपयोग करते हुए न केवल अपनी फसल अवशेष का प्रबंधन किया, बल्कि इसे आय का एक मजबूत स्रोत भी बना लिया।
कपिल लोधी बताते हैं कि उन्हें यह जानकारी अवधेश राय द्वारा दी गई, जिन्होंने उन्हें कृषि विभाग मध्यप्रदेश शासन की अनुदान योजना के बारे में बताया। इस योजना के तहत उन्हें स्ट्रॉ रीपर खरीदने पर आर्थिक सहायता मिली, जिससे मशीन खरीदना उनके लिए आसान हो गया और उन पर वित्तीय बोझ भी कम पड़ा।

मशीन प्राप्त करने के बाद कपिल लोधी ने इसका प्रभावी उपयोग करते हुए अपने खेतों की नरवाई को भूसे में परिवर्तित किया। इसके साथ ही उन्होंने आसपास के किसानों को भी यह सुविधा उपलब्ध कराई। वे अपनी मशीन को किराए पर देकर अन्य किसानों के खेतों की पराली को भी भूसे में बदलने लगे। इस प्रकार उन्होंने न केवल अपनी आय बढ़ाई बल्कि अन्य किसानों की भी मदद की।
सिर्फ दो महीनों में लगभग 4 लाख रुपए की अतिरिक्त आय अर्जित करना इस बात का प्रमाण है कि सही तकनीक और दृष्टिकोण अपनाने से खेती को एक लाभकारी व्यवसाय बनाया जा सकता है। यह आय केवल उनके लिए ही नहीं, बल्कि पूरे क्षेत्र के किसानों के लिए प्रेरणा का स्रोत बन गई है।
इस पहल का एक बड़ा लाभ पर्यावरण संरक्षण के रूप में भी सामने आया है। नरवाई जलाने से होने वाले प्रदूषण में कमी आई है और मिट्टी की गुणवत्ता भी बेहतर बनी हुई है। भूसा बनने से पशुपालन के लिए चारे की उपलब्धता भी बढ़ी है, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को अतिरिक्त मजबूती मिलती है।
कपिल लोधी की यह सफलता कहानी यह दर्शाती है कि यदि किसान नई तकनीकों को अपनाने के लिए तैयार हों और उन्हें सही मार्गदर्शन एवं सरकारी योजनाओं का लाभ मिले, तो वे अपनी आय में उल्लेखनीय वृद्धि कर सकते हैं। साथ ही यह मॉडल टिकाऊ कृषि (Sustainable Agriculture) की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण कदम है।

आज जरूरत है कि अन्य किसान भी इस प्रकार के नवाचारों को अपनाएं और पराली जलाने जैसी हानिकारक प्रथाओं से दूरी बनाएं। सरकार और कृषि विभाग द्वारा दी जा रही योजनाओं का लाभ उठाकर वे अपनी खेती को अधिक आधुनिक, लाभकारी और पर्यावरण के अनुकूल बना सकते हैं।
अंततः, कपिल लोधी का यह प्रयास केवल व्यक्तिगत सफलता की कहानी नहीं है, बल्कि यह एक सामाजिक और पर्यावरणीय बदलाव की शुरुआत भी है, जो आने वाले समय में कृषि क्षेत्र को नई दिशा देने में सहायक सिद्ध हो सकता है।