सागर जिले के देवरी विकासखंड में एक युवा किसान ने पारंपरिक खेती से हटकर औषधीय खेती अपनाकर सफलता की नई मिसाल पेश की है। सुखचैन वार्ड निवासी राहुल लोधी ने अस्पताल की नौकरी छोड़कर अश्वगंधा की खेती शुरू की और आज बेहतर मुनाफा कमा रहे हैं।

राहुल लोधी पहले भोपाल के एलबीएस अस्पताल में पब्लिक रिलेशन ऑफिसर के पद पर कार्यरत थे। ग्रेजुएशन के बाद उन्होंने नौकरी तो शुरू की, लेकिन खेती के प्रति रुचि और कुछ नया करने की चाह ने उन्हें अलग रास्ता चुनने के लिए प्रेरित किया। सोशल मीडिया के माध्यम से उन्हें अश्वगंधा की खेती की जानकारी मिली, जिसके बाद उन्होंने इस दिशा में कदम बढ़ाया।
राहुल ने कोटा और जयपुर में प्रशिक्षण लेकर उच्च गुणवत्ता वाले बीज तैयार किए और नवंबर माह में 10 एकड़ भूमि पर अश्वगंधा की बुवाई की। वर्तमान में 5 एकड़ की फसल की कटाई हो चुकी है, जबकि शेष खेतों में हार्वेस्टिंग का कार्य जारी है। उनकी उपज की मांग देश की कई आयुर्वेदिक कंपनियों से लगातार बढ़ रही है।

आर्थिक दृष्टि से भी यह खेती काफी लाभकारी साबित हो रही है। राहुल के अनुसार अश्वगंधा की जड़ लगभग 30 हजार रुपये प्रति क्विंटल, बीज 20 हजार रुपये प्रति क्विंटल और भूसा 2 हजार रुपये प्रति क्विंटल तक बिकता है। एक एकड़ में 5 से 6 क्विंटल उत्पादन से करीब 2 लाख रुपये तक की आय संभव है। लगभग 30 हजार रुपये प्रति एकड़ की लागत में डेढ़ लाख रुपये तक मुनाफा प्राप्त हो रहा है।
राहुल का कहना है कि पारंपरिक फसलों की तुलना में औषधीय खेती अधिक लाभकारी है और इसमें बाजार की मांग भी लगातार बनी रहती है। वर्तमान में नीमच, कोटा सहित कई शहरों से उनकी उपज के लिए ऑर्डर मिल रहे हैं।
राहुल लोधी की यह सफलता न केवल क्षेत्र के अन्य किसानों के लिए प्रेरणा है, बल्कि यह भी दर्शाती है कि नई तकनीक और सही जानकारी के साथ खेती को लाभ का व्यवसाय बनाया जा सकता है।