महिला आरक्षण पर बीजेपी का हमला, कल आक्रोश रैली !

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मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल में महिला आरक्षण मुद्दे को लेकर राजनीतिक माहौल गरमा गया है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने बीजेपी प्रदेश कार्यालय में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में विपक्ष, खासकर कांग्रेस पर महिलाओं के अधिकार छीनने का गंभीर आरोप लगाया। उन्होंने ऐलान किया कि इस मुद्दे को लेकर प्रदेशभर में आक्रोश रैलियां और पदयात्राएं निकाली जाएंगी।

संसद में बिल पास न होने पर जताई नाराजगी

मुख्यमंत्री ने कहा कि महिला आरक्षण से जुड़ा संविधान का 131वां संशोधन बिल लोकसभा में पास नहीं हो पाना लोकतंत्र के लिए दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने इसे “निंदनीय और कष्टकारी” बताते हुए कहा कि यह देश की आधी आबादी के साथ अन्याय है।

उन्होंने कहा कि लोकतंत्र इस समय एक निर्णायक दौर से गुजर रहा है और संसद में जो घटनाक्रम हुआ, वह महिलाओं के सम्मान के खिलाफ है।

विपक्ष पर तीखा हमला

डॉ. मोहन यादव ने विपक्ष पर आरोप लगाते हुए कहा कि जब चुनाव नजदीक थे, तब सभी दलों ने महिला आरक्षण का समर्थन किया, लेकिन अब जब चुनाव दूर हैं, तो वही दल इसका विरोध कर रहे हैं।

उन्होंने कहा कि यह विपक्ष की “दोहरे चरित्र” वाली राजनीति को दर्शाता है। मुख्यमंत्री ने यह भी आरोप लगाया कि कांग्रेस ने हमेशा महिलाओं के मुद्दों की अनदेखी की है, चाहे वह तीन तलाक का मामला हो या अन्य सामाजिक विषय।

पीएम और गृह मंत्री के प्रयासों का उल्लेख

मुख्यमंत्री ने नरेंद्र मोदी और अमित शाह के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि उन्होंने इस बिल को लागू कराने के लिए सभी दलों को चर्चा और सुझाव देने का पूरा अवसर दिया।

उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री द्वारा सभी दलों को खुला पत्र लिखकर इस मुद्दे पर सहमति बनाने की कोशिश की गई थी, ताकि किसी को यह न लगे कि उसे अपनी बात रखने का मौका नहीं मिला।

विधानसभा का विशेष सत्र बुलाने के संकेत

मुख्यमंत्री ने कहा कि यदि आवश्यकता पड़ी तो इस मुद्दे पर मध्यप्रदेश विधानसभा का एक दिवसीय विशेष सत्र भी बुलाया जाएगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकार इस विषय पर पीछे हटने वाली नहीं है और हर मंच पर महिलाओं के अधिकारों की लड़ाई लड़ेगी।

प्रदेशभर में आंदोलन की तैयारी

मुख्यमंत्री ने घोषणा की कि इस मुद्दे को लेकर पूरे प्रदेश में जन-जागरण अभियान चलाया जाएगा। इसके तहत पदयात्राएं, आक्रोश सभाएं और विभिन्न स्थानीय निकायों में प्रस्ताव पारित किए जाएंगे।

उन्होंने कहा कि यह प्रेस कॉन्फ्रेंस इस अभियान की पहली कड़ी है और आने वाले दिनों में इसका विस्तार पूरे प्रदेश में किया जाएगा।

भाजपा नेताओं की भी तीखी प्रतिक्रिया

इस दौरान बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने भी विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि संसद में महिला आरक्षण जैसे महत्वपूर्ण विषय पर विपक्ष का रवैया उनकी “महिला विरोधी मानसिकता” को उजागर करता है।

उन्होंने कहा कि यह सिर्फ राजनीतिक मुद्दा नहीं, बल्कि देश की आधी आबादी के सम्मान और अधिकारों से जुड़ा विषय है।

राष्ट्रीय उपाध्यक्ष रेखा वर्मा का बयान

रेखा वर्मा ने कहा कि नारी शक्ति वंदन अधिनियम वर्षों से महिलाओं की मांग रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि जब इस कानून को लागू करने का समय आया, तब विपक्ष ने इसका विरोध कर दिया।

उन्होंने कहा कि यह दर्शाता है कि विपक्ष महिलाओं को उनका अधिकार देने के प्रति गंभीर नहीं है।

बिल क्यों नहीं हो पाया पास?

महिला आरक्षण से जुड़ा यह बिल लोकसभा में आवश्यक दो-तिहाई बहुमत हासिल नहीं कर पाया। कुल 528 सांसदों ने मतदान किया, जिसमें 298 ने समर्थन किया, जबकि 230 ने विरोध में वोट दिया। बिल को पास होने के लिए 352 वोटों की आवश्यकता थी, जिससे यह 54 वोटों से गिर गया।

भोपाल में हुए इस घटनाक्रम ने महिला आरक्षण के मुद्दे को फिर से राजनीतिक केंद्र में ला दिया है। जहां एक ओर सत्ताधारी दल इसे महिलाओं के अधिकारों की लड़ाई बता रहा है, वहीं विपक्ष पर इसके विरोध के आरोप लगाए जा रहे हैं।

आने वाले समय में यह मुद्दा प्रदेश ही नहीं, बल्कि राष्ट्रीय राजनीति में भी बड़ा मुद्दा बन सकता है, क्योंकि इससे सीधे तौर पर देश की आधी आबादी के अधिकार जुड़े हुए हैं।

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